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Exclusive: जम्मू-कश्मीर के बाद भाजपा इस राज्य में दमदारी से लड़ेगी चुनाव, जानिए क्या है रणनीति
Sun, 27 Dec 2020 01:56 PM IST
vivek shukla
संतोष सिंह, गोरखपुर।
संतोष सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 27 Dec 2020 01:56 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : पीटीआई
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जम्मू-कश्मीर की जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव में अच्छे नतीजों से उत्साहित भाजपा ने प्रदेश में पंचायत चुनाव लड़ने की रणनीति में बदलाव किया है। अब मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी पार्टी ग्राम प्रधानी का चुनाव लड़ेगी। ऐसा पहली बार होगा। जाटव और यादव बहुल ग्राम पंचायतों की सूची तैयार कराई जा रही है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि जहां भाजपा का जनाधार कम है, वहां किसी राजनीतिक दल को वाकओवर नहीं दिया जाएगा। पार्टी का झंडा हर ग्राम पंचायत में दिखे और जीत मिले, इसी रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरा जाएगा।
भाजपा ने पंचायत चुनाव लड़ने का एलान बहुत पहले किया था। यह भी साफ किया था कि सिर्फ जिला पंचायत सदस्य और ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ा जाएगा। भले ही प्रत्याशियों को पार्टी का चुनाव चिह्न नहीं दिया जाएगा, लेकिन अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी होगी। ग्राम प्रधानी के चुनाव से पार्टी ने किनारा किया था। रणनीतिकारों का मानना था कि ग्राम प्रधानी का चुनाव एक साथ 20-20 प्रत्याशी लड़ते हैं। ऐसे में अधिकृत या समर्थित प्रत्याशी उतारने से नाराजगी बढ़ सकती है। 2022 में विधानसभा चुनाव भी होने हैं।
इसी बीच जम्मू-कश्मीर के जिला परिषद चुनाव के नतीजे आ गए। भाजपा ने मुस्लिम बहुल श्रीनगर में भी सीटें जीती हैं। लिहाजा, पार्टी ने ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने की रणनीति में कुछ बदलाव किया है। जिन ग्राम पंचायतों में भाजपा का जनाधार कम है, वहां प्रत्याशियों को समर्थन देने की बात कही है। पार्टी नेताओं के मुताबिक ज्यादातर मुस्लिम, जाटव भाजपा को वोट नहीं देते हैं। कुछ यादव भी किनारा करते हैं। अब स्थानीय स्तर पर प्रत्याशियों को समर्थन देकर इन सबके बीच पैठ बनाने की रणनीति बनाई गई है।
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भाजपा ने पंचायत चुनाव लड़ने का एलान बहुत पहले किया था। यह भी साफ किया था कि सिर्फ जिला पंचायत सदस्य और ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ा जाएगा। भले ही प्रत्याशियों को पार्टी का चुनाव चिह्न नहीं दिया जाएगा, लेकिन अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी होगी। ग्राम प्रधानी के चुनाव से पार्टी ने किनारा किया था। रणनीतिकारों का मानना था कि ग्राम प्रधानी का चुनाव एक साथ 20-20 प्रत्याशी लड़ते हैं। ऐसे में अधिकृत या समर्थित प्रत्याशी उतारने से नाराजगी बढ़ सकती है। 2022 में विधानसभा चुनाव भी होने हैं।
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इसी बीच जम्मू-कश्मीर के जिला परिषद चुनाव के नतीजे आ गए। भाजपा ने मुस्लिम बहुल श्रीनगर में भी सीटें जीती हैं। लिहाजा, पार्टी ने ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने की रणनीति में कुछ बदलाव किया है। जिन ग्राम पंचायतों में भाजपा का जनाधार कम है, वहां प्रत्याशियों को समर्थन देने की बात कही है। पार्टी नेताओं के मुताबिक ज्यादातर मुस्लिम, जाटव भाजपा को वोट नहीं देते हैं। कुछ यादव भी किनारा करते हैं। अब स्थानीय स्तर पर प्रत्याशियों को समर्थन देकर इन सबके बीच पैठ बनाने की रणनीति बनाई गई है।
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रणनीति में बदलाव इसलिए
गोरखपुर क्षेत्र में कई मुस्लिम बहुल इलाके ऐसे हैं, जहां चुनाव लड़ने के लिए भाजपा को प्रत्याशी नहीं मिलते हैं। पार्टी का झंडा बहुत कम दिखता है। इन इलाकों में सपा, बसपा या कांग्रेस का बोलबाला रहता है। यही हाल जाटव बहुल क्षेत्रों में भी होता है। ऐसे इलाकों में बसपा मजबूत रहती है। यादव बहुल क्षेत्रों में सपा ताकतवर मानी जाती है। इसी संबंध में भाजपा ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।
गोरखपुर क्षेत्र के जिले
गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज, देवरिया, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, आजमगढ़, मऊ और बलिया।
इन क्षेत्रों में लोकसभा की 13 और विधानसभा की 62 सीटें
गोरखपुर क्षेत्र के तीन मंडलों से संबंधित 10 जिलों में लोकसभा की 13 और विधानसभा की 62 सीटें हैं। 10 लोकसभा सीटें भाजपा ने जीती थीं। विधानसभा की 44 सीटें भाजपा के पास हैं।
भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल के 10 जिलों के जिलाध्यक्षों से मुस्लिम, जाटव और यादव बहुल ग्राम पंचायतों की सूची मांगी है। इन ग्राम पंचायतों में मजबूती से चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई जाएगी। भाजपा कार्यकर्ताओं को समर्थन देना है। जल्द ही मुस्लिम, जाटव व यादव बहुल ग्राम पंचायतों की सूची मिल जाएगी, फिर चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
गोरखपुर क्षेत्र के जिले
गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज, देवरिया, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, आजमगढ़, मऊ और बलिया।
इन क्षेत्रों में लोकसभा की 13 और विधानसभा की 62 सीटें
गोरखपुर क्षेत्र के तीन मंडलों से संबंधित 10 जिलों में लोकसभा की 13 और विधानसभा की 62 सीटें हैं। 10 लोकसभा सीटें भाजपा ने जीती थीं। विधानसभा की 44 सीटें भाजपा के पास हैं।
भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल के 10 जिलों के जिलाध्यक्षों से मुस्लिम, जाटव और यादव बहुल ग्राम पंचायतों की सूची मांगी है। इन ग्राम पंचायतों में मजबूती से चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई जाएगी। भाजपा कार्यकर्ताओं को समर्थन देना है। जल्द ही मुस्लिम, जाटव व यादव बहुल ग्राम पंचायतों की सूची मिल जाएगी, फिर चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।