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सांसद-सभासद विवाद में दो गुटों में बंटी भाजपा
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सांसद-सभासद विवाद में दो गुटों में बंटी भाजपा
देवरिया। जिला पंचायत कैंपस स्थित सदर सांसद रमापति राम त्रिपाठी के आवास पर ठेकेदार एवं सभासद आशुतोष तिवारी के बीच हुई कहासुनी एवं मारपीट मामले में भाजपा दो गुटों में बंट गई है। एक गुट अंदरूनी तौर पर सभासद की मदद कर रहा है। रविवार को इस मामले में सभासद ने एसपी कार्यालय को प्रार्थनापत्र सौंपा। हालांकि सदर सांसद ने मामले को राजनीतिक साजिश करार दिया है।
आरोप है कि 19 नवंबर की रात साढ़े दस बजे भाजपा के सदर सांसद एवं भाजपा सभासद के बीच टाउनहाल प्रेक्षागृह का नाम रखने के प्रकरण पर कहासुनी हो गई थी। इस दौरान एक ठेकेदार ने पिस्टल निकाल ली और कई लोगों ने मिलकर सभासद की पिटाई कर दी। मामले में राघवनगर वार्ड नंबर-17 के सभासद आशुतोष तिवारी तहरीर लेकर एसपी से मिलने गए थे, लेकिन मुलाकात न होने पर उन्होंने कैंप आफिस में प्रार्थनापत्र दे दिया। अमर उजाला में सांसद और सभासद के बीच कहासुनी, मारपीट की खबर प्रकाशित होने के बाद सांसद के आवास पर कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो गई। मामले को तूल देने में लिप्त संगठन के एक पूर्व पदाधिकारी भी पहुंचे। उन्होंने सभासद के बारे में कुछ बोला तो सांसद ने डांटकर चुप करा दिया। सच क्या है यह तो जांच से ही पता चलेगा, लेकिन इस घटना से सांसद आहत हैं। उन्होंने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। सिर्फ इतना कहा कि इस घटना में राजनीतिक साजिश की बू आ रही है।
क्या है पूरा मामला
20 दिसंबर 2019 को नगर पालिका की बोर्ड बैठक में टाउनहाल स्थित प्रेक्षागृह का नाम पूर्व पीएम स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखे जाने का प्रस्ताव सभासद आशुतोष तिवारी ने रखा था। इसे नगर पालिका बोर्ड ने पास कर दिया। कमिश्नर ने भी संस्तुति प्रदान कर दी, लेकिन सितंबर 2020 को अज्ञात लोगों ने पूर्व सांसद स्व. मोहन सिंह की प्रतिमा स्थापित कर दी। प्रेक्षागृह में उनका नाम भी लिख दिया गया। 19 नवंबर को रात साढ़े दस बजे जिला पंचायत परिसर में सदर सांसद के आवास पर प्रतिमा प्रकरण पर ठेकेदार गिरीश सिंह मुन्ना और सभासद के बीच धक्कामुक्की हुई। आरोप है कि उन्होंने पिस्टल निकाल कर धमकी दी और भाग जाने को कहा। सभासद का कहना है कि सांसद ने भी उनसे मारपीट की, जबकि सांसद ने ऐसी घटना से इनकार किया है।
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देवरिया। जिला पंचायत कैंपस स्थित सदर सांसद रमापति राम त्रिपाठी के आवास पर ठेकेदार एवं सभासद आशुतोष तिवारी के बीच हुई कहासुनी एवं मारपीट मामले में भाजपा दो गुटों में बंट गई है। एक गुट अंदरूनी तौर पर सभासद की मदद कर रहा है। रविवार को इस मामले में सभासद ने एसपी कार्यालय को प्रार्थनापत्र सौंपा। हालांकि सदर सांसद ने मामले को राजनीतिक साजिश करार दिया है।
आरोप है कि 19 नवंबर की रात साढ़े दस बजे भाजपा के सदर सांसद एवं भाजपा सभासद के बीच टाउनहाल प्रेक्षागृह का नाम रखने के प्रकरण पर कहासुनी हो गई थी। इस दौरान एक ठेकेदार ने पिस्टल निकाल ली और कई लोगों ने मिलकर सभासद की पिटाई कर दी। मामले में राघवनगर वार्ड नंबर-17 के सभासद आशुतोष तिवारी तहरीर लेकर एसपी से मिलने गए थे, लेकिन मुलाकात न होने पर उन्होंने कैंप आफिस में प्रार्थनापत्र दे दिया। अमर उजाला में सांसद और सभासद के बीच कहासुनी, मारपीट की खबर प्रकाशित होने के बाद सांसद के आवास पर कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो गई। मामले को तूल देने में लिप्त संगठन के एक पूर्व पदाधिकारी भी पहुंचे। उन्होंने सभासद के बारे में कुछ बोला तो सांसद ने डांटकर चुप करा दिया। सच क्या है यह तो जांच से ही पता चलेगा, लेकिन इस घटना से सांसद आहत हैं। उन्होंने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। सिर्फ इतना कहा कि इस घटना में राजनीतिक साजिश की बू आ रही है।
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क्या है पूरा मामला
20 दिसंबर 2019 को नगर पालिका की बोर्ड बैठक में टाउनहाल स्थित प्रेक्षागृह का नाम पूर्व पीएम स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखे जाने का प्रस्ताव सभासद आशुतोष तिवारी ने रखा था। इसे नगर पालिका बोर्ड ने पास कर दिया। कमिश्नर ने भी संस्तुति प्रदान कर दी, लेकिन सितंबर 2020 को अज्ञात लोगों ने पूर्व सांसद स्व. मोहन सिंह की प्रतिमा स्थापित कर दी। प्रेक्षागृह में उनका नाम भी लिख दिया गया। 19 नवंबर को रात साढ़े दस बजे जिला पंचायत परिसर में सदर सांसद के आवास पर प्रतिमा प्रकरण पर ठेकेदार गिरीश सिंह मुन्ना और सभासद के बीच धक्कामुक्की हुई। आरोप है कि उन्होंने पिस्टल निकाल कर धमकी दी और भाग जाने को कहा। सभासद का कहना है कि सांसद ने भी उनसे मारपीट की, जबकि सांसद ने ऐसी घटना से इनकार किया है।
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