शोध में खुलासा: शोर-प्रदूषण से पक्षियों का गोरखपुर शहर से किनारा...बसेरा अब गांव में
प्रो. विनय ने बताया कि पक्षियों को प्रजनन के लिए शांत वातावरण की जरूरत होती है। शहर में वाहनों के बढ़ते शोर की वजह से उन्हें गांव की तरफ पलायन करना पड़ रहा है। गीडा में उद्योग और घरों में एसी बढ़ने की वजह से शहर का तापमान भी तेजी से बढ़ रहा है।
विस्तार
तेजी से हो रहे निर्माण कार्य और विस्तार की वजह से शहरी इलाकों में पक्षियों की संख्या कम हो रही है। शोर और प्रदूषण की वजह से पक्षी गांव में घोंसला बना रहे हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान विभाग में हुई एक शोध के मुताबिक, शहर में पक्षियों की लगभग 45 प्रजातियां हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र की बात करें तो वहां पर लगभग 363 प्रजातियां मौजूद हैं।
प्रदूषण की वजह से पक्षी विलुप्त हो रहे हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि अभी गोरखपुर में इनकी संख्या ठीकठाक है। यहां पर देसी के साथ ही कई विदेशी प्रजाति के पक्षी मौजूद हैं।
डीडीयू के प्राणि विज्ञान विभाग के आचार्य प्रो. विनय कुमार सिंह बताते हैं कि शहर में तेजी से हो रहे निर्माण कार्य की वजह से पक्षी कम हो रहे हैं क्योंकि उनके रहने के लिए पेड़ की जरूरत होती है, जबकि शहर में कंक्रीट के जंगल बढ़ रहे हैं। इसके विपरीत ग्रामीण इलाकों में अब भी पक्षियों की संख्या अच्छी है। गांवों में इन्हें रहने के लिए बड़े पेड़ और भोजन मिल जाते हैं।
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ध्वनि प्रदूषण बड़ा कारण
प्रो. विनय ने बताया कि पक्षियों को प्रजनन के लिए शांत वातावरण की जरूरत होती है। शहर में वाहनों के बढ़ते शोर की वजह से उन्हें गांव की तरफ पलायन करना पड़ रहा है। गीडा में उद्योग और घरों में एसी बढ़ने की वजह से शहर का तापमान भी तेजी से बढ़ रहा है। यह भी पक्षियों के पलायन का बड़ा कारण है। वह ठंडे मौसम में ही रहना पसंद करते हैं। उन्होंने बताया कि अन्य जगहों की अपेक्षा गोरखपुर का वातावरण पक्षियों के लिए ठीक है। ग्रामीण इलाकों में 363 तरह की प्रजातियां मौजूद हैं।
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गोरखपुर में पाए जाने वाले पक्षी
गौरेया, कॉमन कूट, धनेष, बगुले, बत्तख, टिटिहरी, मैना, कौवा, रूफस ट्रीपी, सनबर्ड, मोर, बुलबुल, कोयल, भारतीय रॉबिन, काला भुजंगा, गुलाबी मैना, नीलकंठ आदि कुछ ऐसे पक्षी हैं जो गोरखपुर में देखे जाते हैं। इसमें कुछ बड़े पैमाने पर पाए जाते हैं, कुछ दुर्लभ तो कुछ मौसमी और प्रवासी हैं।
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रामगढ़ताल में हर साल नवंबर-दिसंबर में बड़ी संख्या में मौसमी और प्रवासी पक्षी आते हैं। ठंड के मौसम में ही इनकी ब्रीडिंग होती है। इस साल ठंड कम पड़ने की वजह से इनकी संख्या बहुत कम है। चिड़ियाघर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि गोरखपुर में पक्षियों की कई प्रजातियां मौजूद हैं। प्रवासी पक्षी हर साल नवंबर खत्म होने तक रामगढ़ताल में आ जाते थे। इस साल ठंड में देरी हुई तो नहीं आए। ठंड के मौसम में ही इनकी ब्रीडिंग होती है इसीलिए यह रामगढ़ताल को चुनते हैं।