Exclusive: मार्च 2023 तक गोरखपुर के धुरियापार में बनने लगेगी बायोगैस, PM मोदी कर सकते हैं लोकार्पण
प्रदेश के कानपुर देहात, कन्नौज और मुजफ्फरनगर में भी कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाया जा रहा है। कानपुर देहात का प्लांट एएबायो एनर्जी चलाएगी। इसकी शुरुआत दिसंबर 2022 तक हो जाएगी। कानपुर देहात में घास, डेयरी प्रोडक्ट व खराब सब्जी व फल की फसलों से बायोगैस बनाई जाएगी।
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विस्तार
धुरियापार के कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट से मार्च 2023 तक उत्पादन शुरू हो जाएगा। प्रतिदिन 230 टन कचरे से 28 टन बायोगैस बनाई जाएगी। इसका निर्माण कार्य दिसंबर 2022 तक पूरा होगा। बायोगैस प्लांट का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर सकते हैं। बायोगैस को ‘इंडि ग्रीन’ नाम दिया गया है।
इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) गोरखपुर के धुरियापार में 160 करोड़ रुपये से बायोगैस प्लांट लगा रहा है। माना जा रहा है कि प्लांट में उत्पादन शुरू होने के साथ ही क्षेत्र की आर्थिक व सामाजिक परिस्थिति बदल जाएगी। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से करीब 500 लोगों को रोजगार मिलेगा। कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट चलाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
गोरखपुर और इसके आसपास की चीनी मिलों को प्लांट से जोड़ा गया है। आसपास के ग्रामीण व किसानों से गोबर और पुआल खरीदा जाएगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। गोबर व पुआल का सही इस्तेमाल किया जा सकेगा। अभी पुआल को खेतों में जला दिया जाता है, जिससे प्रदूषण फैलता है।
खुलेंगे 10 पंप, बिकेगी सीबीजी
सीबीजी को आम जनता तक पहुंचाने के लिए पंप खोले जाएंगे। पंपों को सीएनजी स्टेशन ही बोला जाएगा। आईओसी ने पंप लगाने का खाका तैयार कर लिया है। गोरखपुर में छह, बस्ती, कुशीनगर और सिद्धार्थनगर में एक-एक पंप खोले जा रहे हैं।
सीएनजी से सस्ती होगी
धुरियापार में बनने वाली सीबीजी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) से सस्ती होगी। केंद्र सरकार का प्रावधान है कि सीबीजी के दाम चार वर्षों तक नहीं बढ़ेंगे। सरकार चाहे तो इसे और सस्ता कर सकती है।
अच्छा माइलेज मिलेगा
सीबीजी में मीथेन की मात्रा 94 फीसदी रहती है। इसकी मदद से चलने वाली गाड़ियों को सीएनजी से भी अच्छा माइलेज मिल सकता है।
प्रदेश के तीन और जिलों में बायोगैस प्लांट
प्रदेश के कानपुर देहात, कन्नौज और मुजफ्फरनगर में भी कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाया जा रहा है। कानपुर देहात का प्लांट एएबायो एनर्जी चलाएगी। इसकी शुरुआत दिसंबर 2022 तक हो जाएगी। कानपुर देहात में घास, डेयरी प्रोडक्ट व खराब सब्जी व फल की फसलों से बायोगैस बनाई जाएगी।
इसी तरह कन्नौज व मुजफ्फरनगर में भी प्लांट लगाए जा रहे हैं। इन सबसे जो भी बायोगैस तैयार होगी, उसे इंडियन ऑयल खरीदेगा। इसके बाद अपने पंपों के माध्यम से बिक्री करेगा। इस संबंध में करार हो चुका है। इन प्लांटों से आईओसीएल का सीधा लेना-देना नहीं रहेगा।
धुरियापार में इनकी मदद से बनेगी बायोगैस
गोबर, पुआल, गन्ना पेराई के बाद निकलने वाली खोइया व धान कुटाई के बाद निकलने वाली भूसी।
मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी सुधरेगी
बायोगैस बनने के बाद जो खाद निकलेगी, उसे किसान प्लांट से सीधे खरीद सकेंगे। इसकी कीमत सामान्य रहेगी। किसान खाद खरीदकर खेतों में डाल सकेंगे। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बेहतर होगी। फसलों की पैदावार बढ़ेगी।
स्वदेशी तकनीक से होगा गैस का उत्पादन
उत्तर प्रदेश राज्य कार्यालय के कार्यकारी निदेशक संजीव कक्कड़ ने बताया कि आईओसीएल कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट दिसंबर तक बन जाएगा, फिर परीक्षण होगा। मार्च 2023 से बायोगैस का उत्पादन शुरू हो जाएगा। उत्पादन व बिक्री की व्यवस्था बना ली गई है। बायोगैस को इंडि ग्रीन नाम दिया गया है। यह सीएनजी जैसी ही होगी। गैस में मीथेन की मात्रा 94 फीसदी है, जो वाहनों को अच्छा माइलेज देगी। स्वदेशी तकनीक से गैस का उत्पादन होगा। आईओसीएल की रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम ने सब कुछ डिजाइन किया है।
एक नजर में
बायोगैस प्लांट की लागत- 160 करोड़
क्षेत्रफल- 50 एकड़
उत्पादन- 28 टन प्रतिदिन
शिलान्यास- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 18 सितंबर 2019 को किया था।