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Gorakhpur News: जबसे केंद्र में आई मोदी सरकार, किसानों की स्थिति में आया बदलाव

Thu, 04 Jun 2026 02:26 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 04 Jun 2026 02:26 AM IST
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Before 2014, farming was a loss-making business, now farmers are prospering: CM
2014 के पहले खेती थी खेती घाटे का सौदा अब समृद्ध हो रहा किसान : सीएम
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मुख्यमंत्री योगी ने गोरखपुर, आजमगढ़ व बस्ती की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता संगोष्ठी-2026 का किया शुभारंभ

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित गोरखपुर, आजमगढ़ व बस्ती की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता संगोष्ठी-2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने 2014 के पहले किसान के हालात का जिक्र करते हुए यूपीए सरकार पर जमकर हमला बोला। कहा कि उस दौर में हर साल देश भर के एक लाख से अधिक किसान आत्महत्या करते थे। तब किसान को न तो अच्छी किस्म का बीज मिलता था और न ही एमएसपी पर उचित मूल्य। खेती घाटे का सौदा हो गई थी। मोदी के नेतृत्व में बनी सरकार ने किसानों की स्थिति बदल दी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश की सबसे अच्छी उर्वरा भूमि, सर्वाधिक सिंचित भूमि (86 फीसदी), रबी-खरीफ व जायद की फसलें यूपी में हो रही हैं। किसान जहां मेहनत कर रहा है, वहां उसे अच्छा दाम भी मिल रहा है। किसानों की मेहनत का परिणाम है कि यूपी का बीमारूपन दूर हुआ और राज्य समृद्ध बना। किसानों ने कृषि विकास दर को आठ फीसदी से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाने में सफलता हासिल की।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहली बार हुआ कि जिस तरह से लोग अपने उत्तम स्वास्थ्य के लिए हेल्थ चेकअप कराते हैं उसी तरह से प्रधानमंत्री ने मृदा परीक्षण किसानों के लिए फ्री कर दिया। धरती का परीक्षण होने से यह पता चलता है कि खेत में किस चीज की कमी है। इतना ही नहीं किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व प्रधानमंत्री सिंचाई योजना लागू की गई। किसान साहूकारों के जाल में न फंसे इसलिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना लागू की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए वर्षों से बंद पड़ी सिंचाई परियोजना जैसे बाड़सागर, सरयू नहर व बुंदेलखंड से जुड़ी परियोजनाओं को पूरा कराया। इससे 24 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई हो रही है।
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उन्होंने कहा कि किसानों को सरकारी नलकूपों के माध्यम से सिंचाई के लिए फ्री बिजली दी जा रही है। इतना ही नहीं निजी नलकूपों को भी मुफ्त बिजली मिल रही है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में देश में प्रथम है। कृषि विकास दर पहले 08 प्रतिशत था अब बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया है। क्षेत्रफल के हिसाब से प्रदेश चौथे स्थान पर है लेकिन खाद्यान्न उत्पादन में पहले स्थान पर है। यह इसलिए संभव हुआ कि सरकार किसानों के साथ खड़ी है।
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दशकों से लंबित परियोजनाएं हुईं पूरी
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में दशकों से सिंचाई की लंबित परियोजनाओं को प्रारंभ करने के साथ बाणसागर, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, बुंदेलखंड आदि से जुड़ी परियोजनाओं को पूरा कराया गया। 24 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई। सरकार निजी नलकूप में भी किसानों को फ्री बिजली देती है और इसके लिए 3000 करोड़ रुपये का भुगतान भी करती है।

यूपी ने खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को किया प्राप्त
सीएम ने कहा कि यूपी क्षेत्रफल में देश में चौथे स्थान पर है, इसके बावजूद सर्वाधिक खाद्यान्न, चीनी मिल संचालन, चीनी उत्पादन, एथेनॉल, आलू, सब्जी, दुग्ध उत्पादन कर रहा है। सरकार के साथ किसानों ने भी मेहनत प्रारंभ किया तो परिणाम सामने है। सरकार रबी, खरीफ के समय गोष्ठी के माध्यम से किसानों को बीज, तकनीक, शासन की योजनाओं के बारे में बताती है और उनके सुझाव/परेशानी को जानती है।


सीएम ने चुनौतियों पर भी चर्चा की
सीएम ने चुनौतियों की चर्चा की, कहा कि उत्पादन का पहला कार्य प्रारंभ होता है कि किसानों को सही बीज प्राप्त हो। सीएम ने क्वालिटी पर जोर देते हुए कहा कि कितना भी उत्पादन कर लें, यदि उत्पाद एक्सपोर्ट के लायक नहीं तैयार किया गया तो उचित मुनाफा नहीं होगा। आम का यहां 40-50 रुपये दाम मिलेगा जबकि यूरोप, अमेरिका समेत दुनिया के अन्य देशों में 800 से 1000 रुपये मिलता है। कार्गो का दाम डेढ़ सौ-200 रुपये होगा फिर भी 600 रुपये प्रति किलो की बचत होगी। इसके लिए क्वालिटी जरूरी है। सरकार ने कार्गो के सेंटर विकसित किए हैं। सीएम ने अपील की कि खाद्यान्न, सब्जी, औद्यानिक फसल आदि में न्यूनतम केमिकल-पेस्टिसाइड का प्रयोग करें।

सीएम ने निर्यात के मानकों पर खरा उतरने पर जोर देते हुए प्राकृतिक खेती (गो आधारित खेती) पर बल दिया। कहा कि इससे गोमाता की रक्षा भी होगी और केमिकल-पेस्टिसाइट से भी खेती का बचाव होगा। यह लागत को कम करने का भी माध्यम हो सकता है। किसान स्वयं वैज्ञानिक है। उसे पता है कि कब क्या करना है, बस तारतम्यता से जोड़ने की तैयारी करें। अतिवृष्टि व अनावृष्टि से बचने के लिए अभी से मौसम विभाग की ओर से दिए जाने वाले बुलेटिन के अनुरूप फसल चक्र को तैयार करें। यह कार्य बढ़ेंगे तो किसान की आमदनी भी बढ़ेगी।



सीएम ने सहफसली खेती पर भी दिया जोर
सीएम ने फसल के विविधीकरण की चर्चा करते हुए गन्ना, सब्जियों के साथ ही सहफसली खेती पर भी जोर दिया। बोले-ऐसा करने वाले किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। पिछले वर्ष मैंने व कृषि मंत्री ने मध्य यूपी के कई जनपदों में जाकर देखा कि किसान ने जैसे ही गेहूं का फसल काटा, तत्काल मक्का की खेती प्रारंभ की। इससे उन्हें एक लाख रुपये प्रति एकड़ की बचत भी हो रही है। इस दौरान कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, सांसद रवि किशन, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार आदि मौजूद रहे।
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