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Gorakhpur News: बैंक में फर्जीवाड़े की रिपोर्ट तैयार...कई कर्मचारी रडार पर

Sun, 15 Mar 2026 02:56 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Mar 2026 02:56 AM IST
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Bank fraud report ready...many employees on radar
एसबीआई की सरदारनगर शाखा में इनएक्टिव खातों के जरिये लेनदेन कर फर्जीवाड़े का मामला
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चार हजार पन्नों में बैंक खातों का लेन-देन दर्ज, सेंट्रल टीम ने की खातों की जांच

गोरखपुर। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की सरदारनगर शाखा में इनएक्टिव खातों के जरिये लेनदेन कर फर्जीवाड़े के मामले की जांच पूरी हो गई है। सेंट्रल जांच टीम ने चार हजार पन्नों में रिपोर्ट तैयार की है। इसमें कई बैंककर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। इन कर्मियों पर अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है। बताया जा रहा है कि एक कर्मचारी निलंबित भी किया जा चुका है। बैंक की तरफ से उससे 20 लाख रुपये भी वसूला जा चुके हैं। हालांकि, अंदरखाने यह भी चर्चा है कि मामले में जिम्मेदार कुछ बड़ों को बचाने के लिए कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी है।
मामला नवंबर 2025 में सामने आया। इस मामले में केसरी कुमार ने बैंक खातों के साथ आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की थी। उन्होंने शिकायत में आरोप लगाया कि बैंक शाखा में मृत व्यक्तियों के इनएक्टिव खातों के जरिये लेन-देन कर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। यह भी आरोप है कि ये खाते बिना पैन और आधार कॉर्ड के संचालित हो रहे हैं। बैंककर्मियों की मिलीभगत से इनएक्टिव खातों में खेल किया गया था। शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए प्रशासनिक कार्यालय से एक टीम गठित की गई थी।
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हालांकि प्रशासनिक कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि मामले में पहले से भी एक गोपनीय जांच चल रही थी। जांच के दौरान सामने आया कि दो ग्राहक सेवा केंद्र संचालकों ने भारी गड़बड़ी की थी। बैंक के खातों से इन केंद्रों में रुपये भेजे जाने में जिन-जिन बैंककर्मियों की आईडी कोड का प्रयोग हुआ, वे सभी जांच में सामने आ गए हैं। बताया जा रहा है कि चार हजार पन्नों की रिपोर्ट में पिछले तीन से चार सालों में सभी ग्राहक सेवा केंद्रों की बैंक के साथ रुपयों के लेन-देन के रिकाॅर्ड दर्ज हैं। जांच के दौरान बैंक के एक कर्मी की भूमिका संदिग्ध मिली, जिसकी आईडी बंद कर दी गई। बैंक ने उसे निलंबित कर दिया है।
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प्रशासनिक कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि निलंबित कर्मचारी से 20 लाख रुपये भी जमा करवाए गए हैं। हालांकि शनिवार को प्रशासनिक कार्यालय पहुंचे एक ग्राहक सेवा केंद्र संचालक ने जांच पर सवाल उठाया। कहा कि बैंक के कर्मचारी जान-बूझकर साजिश के तहत गलती कर रहे हैं तो उनपर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ग्राहक सेवा केंद्र वालों से अनजाने में भी कोई गलती हो गई तो बिना वार्निंग दिए सीधे उनकी आईडी बंद कर दी जा रही है।

जांच में तेजी...कहीं प्रमोशन का चक्कर तो नहीं

एसबीआई में कार्यरत कुछ बड़े अधिकारियों का मार्च में प्रमोशन होना है। सूत्रों ने बताया कि इस प्रमोशन के चक्कर में कहीं बड़े अधिकारी न नप जाएं इसीलिए जल्दी-जल्दी में जांच पूरी करवाई गई और ग्राहक सेवा केंद्रों पर कार्रवाई कर बड़े खिलाड़ियों को बचाया गया है। जबकि यह पूरा खेल बैंक की बिना मिलीभगत के संभव ही नहीं हो सकता है। मामले में अगर गोपनीय तरीके से दूसरी किसी यूनिट की तरफ से जांच कराई जाए तो कुछ बड़े जिम्मेदार भी फंस सकते हैं।



टीम गठित हुई थी और जांच भी पूरी हो गई है। बैंक ने रिकवरी की कार्रवाई भी की है। मामले में जो भी दोषी मिलेंगे, उनपर कार्रवाई तय है। बैंक आम लोगों एक विश्वास का केंद्र है।ग्राहक सेवा केंद्र सीधे बैंक की ओर से संचालित नहीं होते हैं, फिर भी जिम्मेदारी बैंक की है। किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
-आनंद कुमार, डीजीएम, एसबीआई
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