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UP News: बैंक कर्मियों ने बेच दी सरकारी जमीन, बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य प्रबंधक समेत पांच पर जालसाजी का आरोप
Tue, 12 Jul 2022 02:08 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 12 Jul 2022 02:08 PM IST
सार
नीलामी में आमंत्रित कर बैंक कर्मियों ने सरकारी जमीन ही बेच दी। राजस्व टीम की आपत्ति के बाद मामला खुलकर सामने आया।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर जिले में नीलामी में आमंत्रित कर बैंक कर्मियों ने सरकारी जमीन ही बेच दी। राजस्व टीम की आपत्ति के बाद मामला खुलकर सामने आया। कैंट पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य प्रबंधक मनोरंजन बोई, कुंवरजीत चौहान, बसंत चौधरी, अनिल कुमार व पंकज कुमार के खिलाफ जालसाजी और धमकी देने के आरोप में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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पुलिस ने कैंट इलाके के बेतियाहाता आवास विकास कॉलोनी निवासी पीड़ित राजीव मिश्रा की तहरीर पर केस दर्ज किया है। इसके मुताबिक, 29 अक्तूबर 2020 को नीलामी की सूचना के बाद राजीव गए थे। बैंक ने बताया कि तीन प्लाट मिले हैं, जिसके 26 लाख 54 हजार 4 सौ रुपये 15 दिनों के अंदर जमा किया जाए, जिससे रजिस्ट्री की जा सके। राजीव ने बैंक में रुपये जमा कर दिए। जिसके बाद बैंक ने 11 दिसंबर 2020 को तीनों प्लाटों का सेल सर्टिफिकेट भी दे दिया।
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बैंक के अधिकारी पंकज कुमार, अनिल कुमार सिंह और बसंत चौधरी, मुख्य प्रबंधक मनोरंजन बोई के माध्यम से नीलामी से प्राप्त हुए जमीन के पास ले जाकर इशारे के माध्यम से प्लाटों को दिखाया गया। बताया गया कि प्लाटों पर मिट्टी पाटने का कार्य शुरू करें। कुछ दिनों बाद आपको रजिस्ट्री कर दी जाएगी।
इसके बाद राजीव ने मिट्टी पाटने का काम शुरू किया तो 23 दिसंबर 2020 को सदर तहसील की राजस्व टीम ने काम रुकवा दिया और बताया कि यह सरकारी सार्वजनिक पोखरा है। इस पर किसी प्रकार का निर्माण व कब्जा नहीं किया जा सकता।
इस घटना की सूचना पीड़ित ने बैंक के अधिकारियों को दी। इसके बाद बैंक अधिकारी धमकी देने लगे। पीड़ित की शिकायत पर कमिश्नर ने मामले की जांच कराई तो सच्चाई सामने आ गई। कैंट पुलिस ने तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
इसके बाद राजीव ने मिट्टी पाटने का काम शुरू किया तो 23 दिसंबर 2020 को सदर तहसील की राजस्व टीम ने काम रुकवा दिया और बताया कि यह सरकारी सार्वजनिक पोखरा है। इस पर किसी प्रकार का निर्माण व कब्जा नहीं किया जा सकता।
इस घटना की सूचना पीड़ित ने बैंक के अधिकारियों को दी। इसके बाद बैंक अधिकारी धमकी देने लगे। पीड़ित की शिकायत पर कमिश्नर ने मामले की जांच कराई तो सच्चाई सामने आ गई। कैंट पुलिस ने तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।