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Gorakhpur News: दो अधिवक्ताओं के वकालत पर लगी रोक हटी
Fri, 31 May 2024 04:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 31 May 2024 04:35 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने प्रदेश बार काउंसिल की अनुशासन समिति के उस आदेश पर रोक लगा दिया है, जिसमें जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष केके त्रिपाठी एवं पूर्व मंत्री योगेंद्र कुमार मिश्र की वकालत पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी गई थी।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्र और अपूर्व कुमार शर्मा एग्जीक्यूटिव चेयरमैन ने केके त्रिपाठी और योगेन्द्र नाथ मिश्रा द्वारा दाखिल रिवीजन पर यह आदेश 30 मई को पारित किया। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपने आदेश में कहा कि बार काउंसिल ऑफ यूपी के आदेश में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे वकालत पर रोक लगाने का कोई कारण नजर आ रहा हो। अब इस मामले की सुनवाई दो अगस्त को गठित कमेटी के सामने होगी।
बता दें कि जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष केके त्रिपाठी एवं पूर्व मंत्री योगेंद्र कुमार मिश्र के विरुद्ध आरके श्रीवास्तव, जय नारायण दूबे, एसके चन्द, बृजेश कुमार सिंह, कृष्ण दामोदर पाठक सहित 50 अधिवक्ताओं ने बार काउंसिल ऑफ यूपी में कंप्लेंट दाखिल किया था। जिसमें नोटिस पर पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री हाजिर नहीं हुए और बार काउंसिल ऑफ यूपी की अनुशासन समिति ने 6 अप्रैल 24 को दोनों अधिवक्ता नेताओं के वकालत करने पर रोक लगा दी थी।
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गोरखपुर। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने प्रदेश बार काउंसिल की अनुशासन समिति के उस आदेश पर रोक लगा दिया है, जिसमें जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष केके त्रिपाठी एवं पूर्व मंत्री योगेंद्र कुमार मिश्र की वकालत पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी गई थी।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्र और अपूर्व कुमार शर्मा एग्जीक्यूटिव चेयरमैन ने केके त्रिपाठी और योगेन्द्र नाथ मिश्रा द्वारा दाखिल रिवीजन पर यह आदेश 30 मई को पारित किया। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपने आदेश में कहा कि बार काउंसिल ऑफ यूपी के आदेश में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे वकालत पर रोक लगाने का कोई कारण नजर आ रहा हो। अब इस मामले की सुनवाई दो अगस्त को गठित कमेटी के सामने होगी।
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बता दें कि जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष केके त्रिपाठी एवं पूर्व मंत्री योगेंद्र कुमार मिश्र के विरुद्ध आरके श्रीवास्तव, जय नारायण दूबे, एसके चन्द, बृजेश कुमार सिंह, कृष्ण दामोदर पाठक सहित 50 अधिवक्ताओं ने बार काउंसिल ऑफ यूपी में कंप्लेंट दाखिल किया था। जिसमें नोटिस पर पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री हाजिर नहीं हुए और बार काउंसिल ऑफ यूपी की अनुशासन समिति ने 6 अप्रैल 24 को दोनों अधिवक्ता नेताओं के वकालत करने पर रोक लगा दी थी।
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