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Gorakhpur News: बाले मियां का मुख्य मेला कल, तैयारियां पूरी
Fri, 12 May 2023 09:34 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 12 May 2023 09:34 PM IST
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शहर के पश्चिमी छोर पर बहरामपुर में लगने वाला मेला हिन्दू-मुस्लिम एकता का है प्रतीक
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। शहर के पश्चिमी छोर पर स्थित बहरामपुर में बाले मियां के मैदान में लगने वाला मुख्य मेला 14 मई को लगेगा। मेले में भारी संख्या में लोग पहुंच कर हजरत सैयद सालार मसऊद गाजी रहमतुल्लाह अलैह बाले मियां के मजार पर मत्था टेकते हैं। मेले में हर धर्म के लोग आते हैं और मजार पर चादर चढ़ा कर अपनी बेहतरी की दुआ मांगते हैं। यह मेल हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।
ज्येष्ठ माह के पहले रविवार को लगने वाला यह मेला पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़े मेले में शुमार है। बाले मियां कमेटी के हिस्सेदार मोहम्मद खालिक ने बताया कि मेले में आने वाले जायरीनों और अकीदतमंदों द्वारा किए जाने वाले जियारत की तैयारी कर ली गई है। पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के प्रबंध किए गए हैं।
मेला एक माह तक चलता है। लोग मेला में लगे झूले, ड्रैगन व सर्कस और लजीज पकवानों आनंद उठाते हैं। महिलाओं के लिए शृंगार और बच्चों के लिए खिलौनों की दुकानें सजकर तैयार हैं।
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रविवार को मुख्य मेला के दिन बाले मियां के विवाह की रस्म पूरी की जाती है। मेला के दिन कनूरी, अंखिया, मुर्गा, कौड़ी और चादर व गागर के साथ प्राचीन परंपरा का निर्वाहन करते हुए मजार शरीफ पर चादर पेश की जाती है।
मोहम्मद खालिक, सलाहुद्दीन, शहंशाह, इबरार अहमद एवं मोहम्मद असलम ने संयुक्त रूप से बताया कि हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक यह मेला सभी के लिए सुख की अनुभूति कराता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। शहर के पश्चिमी छोर पर स्थित बहरामपुर में बाले मियां के मैदान में लगने वाला मुख्य मेला 14 मई को लगेगा। मेले में भारी संख्या में लोग पहुंच कर हजरत सैयद सालार मसऊद गाजी रहमतुल्लाह अलैह बाले मियां के मजार पर मत्था टेकते हैं। मेले में हर धर्म के लोग आते हैं और मजार पर चादर चढ़ा कर अपनी बेहतरी की दुआ मांगते हैं। यह मेल हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।
ज्येष्ठ माह के पहले रविवार को लगने वाला यह मेला पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़े मेले में शुमार है। बाले मियां कमेटी के हिस्सेदार मोहम्मद खालिक ने बताया कि मेले में आने वाले जायरीनों और अकीदतमंदों द्वारा किए जाने वाले जियारत की तैयारी कर ली गई है। पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के प्रबंध किए गए हैं।
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मेला एक माह तक चलता है। लोग मेला में लगे झूले, ड्रैगन व सर्कस और लजीज पकवानों आनंद उठाते हैं। महिलाओं के लिए शृंगार और बच्चों के लिए खिलौनों की दुकानें सजकर तैयार हैं।
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रविवार को मुख्य मेला के दिन बाले मियां के विवाह की रस्म पूरी की जाती है। मेला के दिन कनूरी, अंखिया, मुर्गा, कौड़ी और चादर व गागर के साथ प्राचीन परंपरा का निर्वाहन करते हुए मजार शरीफ पर चादर पेश की जाती है।
मोहम्मद खालिक, सलाहुद्दीन, शहंशाह, इबरार अहमद एवं मोहम्मद असलम ने संयुक्त रूप से बताया कि हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक यह मेला सभी के लिए सुख की अनुभूति कराता है।