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Gorakhpur Zoo: ठंड बढ़ी तो अब हीटर-ब्लोअर के सामने बैठ रहा तेंदुआ, अन्य जंगली जीवों के लिए भी अलग-अलग सुविधाएं
Mon, 08 Dec 2025 12:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 08 Dec 2025 12:45 PM IST
सार
कर्मचारी जरूरत के अनुसार उपकरणों को समय-समय पर संचालित कर रहे हैं। हिरन जैसे खुले में विचरण करने वाले जीवों के लिए बाड़े में पुआल बिछाया गया है, ताकि उन्हें प्राकृतिक गर्माहट मिल सके। पक्षियों के बाड़ों पर चटाई के पर्दे लगाए गए हैं, जिससे ठंडी हवा अंदर न पहुंच सके। जलीय जीवों- कछुआ, मगरमच्छ और दरियाई घोड़े को ठंड से बचाने के लिए तालाब का पानी प्रतिदिन बदला जा रहा है।
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गोरखपुर जू में ब्लोवर के सामने बैठा तेंदुआ
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में सर्दी का असर बढ़ते ही वन्यजीवों को गर्माहट देने की विशेष व्यवस्थाएं शुरू हो गई हैं। रामगढ़ताल के किनारे बसे इस चिड़ियाघर में तापमान सामान्य से कम महसूस होता है, ऐसे में प्रशासन ने 338 पशु-पक्षियों को ठंड से बचाने की व्यापक तैयारी की है। अब वन्यजीव हीटर और ब्लोअर के सामने बैठ रहे हैं।
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सरीसृप गृह में आधुनिक वीआरवी एसी सिस्टम लगाया गया है, जो तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे जाते ही अपने आप चालू होकर वातावरण को नियंत्रित रखता है। शेर, बाघ और तेंदुए जैसे बड़े मांसाहारी वन्यजीवों के नाइट सेल में ब्लोअर लगाए गए हैं, जबकि सियार, भालू, बंदर और लोमड़ी के लिए हीटर की व्यवस्था है।
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कर्मचारी जरूरत के अनुसार उपकरणों को समय-समय पर संचालित कर रहे हैं। हिरन जैसे खुले में विचरण करने वाले जीवों के लिए बाड़े में पुआल बिछाया गया है, ताकि उन्हें प्राकृतिक गर्माहट मिल सके। पक्षियों के बाड़ों पर चटाई के पर्दे लगाए गए हैं, जिससे ठंडी हवा अंदर न पहुंच सके।
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जलीय जीवों- कछुआ, मगरमच्छ और दरियाई घोड़े को ठंड से बचाने के लिए तालाब का पानी प्रतिदिन बदला जा रहा है। इसके लिए विशेष मोटर लगाई गई है, ताकि जल का तापमान नियंत्रित रहे।
उप निदेशक एवं मुख्य वन्यजीव चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि ठंड को देखते हुए 35 हीटर, 20 ब्लोअर और कई एसी इकाइयों की मदद से वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और आरामदायक वातावरण सुनिश्चित किया है।