सेना दिवस विशेष: भारतीय सेना से गोरखपुर के युवाओं का है गहरा लगाव, पाक से हुए युद्ध में शामिल रहे हैं पूर्वांचल के योद्धा
गोरखपुर के नौजवान केवल सेना में भर्ती होने को ही आतुर नहीं रहते, बल्कि ड्यूटी करते हुए शहीद होने में भी किसी से पीछे नहीं हैं। सेमरा ददरी निवासी श्याम बिहारी शाही की शहादत से शुरू हुई इस शृंखला में एक दर्जन से भी अधिक नाम जुड़ चुके हैं।
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अपने अदम्य शौर्य के लिए पूरी दुनिया में खास पहचान रखने वाली भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए गोरखपुर के युवाओं का दिल धड़कता है। जब भी कहीं भर्ती प्रक्रिया शुरू होती है, गोरखपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व वहां जरूर रहता है। आजादी के बाद से अब तक हुए हर युद्ध में इस क्षेत्र के सैनिकों ने अपनी कुर्बानी देकर पूर्वांचल की माटी का मान बढ़ाया है।
वीर सेनानी कल्याण संस्थान के जिलाध्यक्ष अनिरुद्ध शाही बताते हैं कि गोरखपुर मंडल में 30 हजार से अधिक पूर्व सैनिक हैं। लगभग इतनी संख्या में यहां के नौजवान सेना व अर्द्धसैनिक बलों की अलग-अलग बटालियनों में तैनात हैं।
सुविधा नहीं, फिर भी है जोश
सेना में भर्ती होने का जोश इस कदर है कि भोर में चार बजे ही ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश पक्की सड़कों पर युवाओं की टोली व्यायाम करती, दौड़ती नजर आती है। ये वे नौजवान हैं, जिनके मन में देश प्रेम का जज्बा है। एक सैनिक के तौर पर आने वाली कठिनाइयों से खुद को वाबस्ता कर रहे इन युवाओं के मन में प्रशिक्षण की सुविधाओं की कमी खटकती नहीं है।
युवाओं को तराश रहे रिटायर्ड कैप्टन आद्या प्रसाद दुबे
रिटायर्ड कैप्टन आद्या प्रसाद दुबे बीते 28 वर्षों से युवाओं को सेना में भर्ती होने का गुर सिखा रहे हैं। वर्ष 1992 में रिटायर होकर अपने गांव चौरीचौरा के मिठाबेल लौटे कैप्टन आद्या प्रसाद दुबे ने गांव के पांच लड़कों को सेना में भर्ती देने की ट्रेनिंग शुरू की। इनके नि:शुल्क ट्रेनिंग सेंटर में अब गोरखपुर के अलावा आसपास जिलों के युवा भी आते हैं। गुरुजी के नाम से विख्यात हो चुके कैप्टन आद्या दुबे बताते हैं कि जब कोई जवान सीमा पर ड्यूटी के दौरान याद करता है, मन में जो संतोष का भाव आता है, उससे पूरी फीस वसूल हो जाती है।
शहादत में आगे हैं गोरखपुर के जवान
गोरखपुर के नौजवान केवल सेना में भर्ती होने को ही आतुर नहीं रहते, बल्कि ड्यूटी करते हुए शहीद होने में भी किसी से पीछे नहीं हैं। सेमरा ददरी निवासी श्याम बिहारी शाही की शहादत से शुरू हुई इस शृंखला में एक दर्जन से भी अधिक नाम जुड़ चुके हैं। कारगिल में शहीद होने वाले राइफल मैन शिव सिंह छेत्री और ले. गौतम गुरुंग तो युवाओं के रोल मॉडल बन चुके हैं। इसके अलावा हवलदार राम बहादुर चंद (गगहा), शंभू शरण तिवारी (कसिहार), रघु प्रसाद पांडेय (भीटी), अशोक कुमार तिवारी (घसपुरवा), रामनवल शुक्ला (सिविल लाइंस गोरखपुर), रामानंद (वसुवा), रणवीर सिंह (टुगरा), संतोष पांडेय (बेलीपार), विनय सिंह (भीटी) आदि का नाम भी शुमार है।
बांग्लादेश की आजादी में भी रहा योगदान
वर्ष 1971 की लड़ाई में भी गोरखपुर के योद्धाओं ने अपने पराक्रम का प्रदर्शन किया था। मेजर जनरल शिव कुमार जायसवाल, ऑनरेरी कैप्टन रामानंद निषाद, बैजनाथ समेत कई सैनिक उस युद्ध में शामिल रहे। पिछले दिनों एक कार्यक्रम में मेजर जनरल शिव कुमार जायसवाल ने उस युद्ध से जुड़े रोचक प्रसंग भी सुनाए थे।
संक्रमण के चलते इस बार नहीं होगा कार्यक्रम
सेना दिवस के अवसर पर 15 जनवरी को हर साल भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता रहा है। परंतु इस बार कोरोना संक्रमण के चलते इस कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है। वीर सेनानी कल्याण संस्थान के जिलाध्यक्ष अनिरुद्ध शाही बताते हैं कि हर साल जीआरडी, सैनिक कल्याण विभाग व संगठन की तरफ से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता था।