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Gorakhpur News: गोरखपुर विश्वविद्यालय में पीजी के समकक्ष मान्य होगा सीए का सर्टिफिकेट
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गोरखपुर। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) का प्रमाणपत्र अब दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में परास्नातक के समकक्ष मान्य होगा। इसके बाद पीएचडी में उन्हें बिना परास्नातक डिग्री के ही प्रवेश मिल सकेगा। इसे लेकर प्रस्ताव तैयार किया गया है। एक जून को विद्या परिषद की बैठक में इसे मंजूरी दिलाने की तैयारी है।
डीडीयू में पीएचडी में प्रवेश के लिए परास्नातक की डिग्री जरूरी है। ऐसे में कई बार चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) ने अपने प्रमाणपत्र के आधार पर ही मैनेजमेंट या वाणिज्य संकाय में पीएचडी में प्रवेश की कोशिश की लेकिन बात नहीं बन सकी। अब उनकी कोशिशें परवान चढ़ती दिख रही हैं। इसे लेकर वर्ष 2021 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दिशा-निर्देश जारी किया था कि सीए के प्रमाणपत्र को परास्नातक के समकक्ष माना जाए। देश के कई विश्वविद्यालयों में उसके आधार पर पीएचडी में प्रवेश भी लिया जा रहा है।
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) और डीडीयू के बीच एमओयू प्रस्तावित किया गया है। एमओयू के प्रस्ताव के दौरान ही आईसीएआई ने पीएचडी में प्रवेश को लेकर अपनी बात रखी। इसे देखते हुए अधिष्ठाता वाणिज्य संकाय प्रो. आरपी सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रस्ताव दिया था। डीडीयू प्रशासन ने इस प्रस्ताव को विद्या परिषद के एजेंडे में शामिल कर लिया है।
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यूजीसी के दिशा-निर्देशों के आधार पर प्रस्ताव
डीन कॉमर्स प्रो. आरपी सिंह ने बताया कि यूजीसी की ओर से जारी दिशा-निर्देश कहता है कि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई)] इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया (आईसीएसआई), और इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट मैनेजमेंट एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएमएआई) के प्रमाणपत्रों को संस्थान पीजी की डिग्री के समकक्ष मानें। इसी आधार पर सीए यूजीसी-नेट में भी हिस्सा लेते हैं।
बोलीं कुलपतिइस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि यूजीसी के दिशा-निर्देशों के क्रम में इस प्रस्ताव को स्वीकार किया गया है। इसे विद्या परिषद के एजेंडा में शामिल किया गया है। विद्या परिषद से मंजूरी मिलने पर नए सत्र से सीए भी पीएचडी कर सकेंगे।
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डीडीयू में पीएचडी में प्रवेश के लिए परास्नातक की डिग्री जरूरी है। ऐसे में कई बार चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) ने अपने प्रमाणपत्र के आधार पर ही मैनेजमेंट या वाणिज्य संकाय में पीएचडी में प्रवेश की कोशिश की लेकिन बात नहीं बन सकी। अब उनकी कोशिशें परवान चढ़ती दिख रही हैं। इसे लेकर वर्ष 2021 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दिशा-निर्देश जारी किया था कि सीए के प्रमाणपत्र को परास्नातक के समकक्ष माना जाए। देश के कई विश्वविद्यालयों में उसके आधार पर पीएचडी में प्रवेश भी लिया जा रहा है।
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इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) और डीडीयू के बीच एमओयू प्रस्तावित किया गया है। एमओयू के प्रस्ताव के दौरान ही आईसीएआई ने पीएचडी में प्रवेश को लेकर अपनी बात रखी। इसे देखते हुए अधिष्ठाता वाणिज्य संकाय प्रो. आरपी सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रस्ताव दिया था। डीडीयू प्रशासन ने इस प्रस्ताव को विद्या परिषद के एजेंडे में शामिल कर लिया है।
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यूजीसी के दिशा-निर्देशों के आधार पर प्रस्ताव
डीन कॉमर्स प्रो. आरपी सिंह ने बताया कि यूजीसी की ओर से जारी दिशा-निर्देश कहता है कि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई)] इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया (आईसीएसआई), और इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट मैनेजमेंट एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएमएआई) के प्रमाणपत्रों को संस्थान पीजी की डिग्री के समकक्ष मानें। इसी आधार पर सीए यूजीसी-नेट में भी हिस्सा लेते हैं।
बोलीं कुलपतिइस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि यूजीसी के दिशा-निर्देशों के क्रम में इस प्रस्ताव को स्वीकार किया गया है। इसे विद्या परिषद के एजेंडा में शामिल किया गया है। विद्या परिषद से मंजूरी मिलने पर नए सत्र से सीए भी पीएचडी कर सकेंगे।