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अपराजिता नेशनल हाउस वाइफ-डे कॉन्टेस्ट: पति संभालते हैं बिजनेस, यह संभालती हैं घर
Thu, 28 Oct 2021 02:58 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 28 Oct 2021 02:58 PM IST
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अपराजिता नेशनल हाउस वाइफ-डे कॉन्टेस्ट
- फोटो : अमर उजाला।
पति बिजनेस को पूरा समय दे सकें। काम के दौरान उन्हें घर, परिवार, बच्चों की पढ़ाई, माता-पिता की देखभाल, इलाज, बिजली का बिल, राशन आदि की चिंता न करनी पड़े, इसलिए पत्नी घर संभालने की जिम्मेदारी बाखूबी निभा रही हैं। शहर के बड़े कारोबारी, शैक्षणिक संस्था के मालिक अपनी सफलता का श्रेय पत्नी को ही देते हैं। उनका कहना है कि पत्नी घर संभाल रही हैं, इसलिए वे बिजनेस संभाल पा रहे हैं।
नेशनल हाउस वाइफ-डे पर अमर उजाला का गेस्ट एडिटर बनने का उत्साह गृहिणियों में तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार को तीसरे दिन भी अमर उजाला के दो व्हाट्सएप नंबरों पर दिनभर प्रविष्टियां आती रहीं। मंगलवार की दस भाग्यशाली विजेताओं को उनका गिफ्ट हैंपर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दरअसल, अपराजिता 100 मिलियन स्माइल अभियान के तहत नेशनल हाउस वाइफ-डे (तीन नवंबर) पर अमर उजाला तीन हाउस वाइफ गेस्ट एडिटर पैनल के निर्देेशन में प्रकाशित किया जाएगा। गेस्ट एडिटर पैनल के लिए तीन हाउस वाइफ क्विज कॉंटेस्ट के जरिए चुनी जाएंगी। यह तीन गेस्ट एडिटर दो नवंबर को अमर उजाला संपादकीय टीम का नेतृत्व करेंगी। ये ऐसी महिलाएं होंगी जिन्होंने अपने परिवार के आगे कॅरियर को महत्व नहीं दिया।
अच्छी हाउस वाइफ होने का गर्व
गृहिणी श्वेता सिंह ने बताया कि एमएससी बॉयोटेक के बाद अमरीका में कॅरियर बनाने का मौका था, लेकिन मैंने अपने परिवार को प्राथमिकता दी। गर्व है कि एक अच्छी हाउस वाइफ हूं। घर, किचन के साथ ही परिवार के हर सदस्य की जिम्मेदारी शिद्दत से निभाती हूं। बच्चों को पढ़ाने का काम खुद करती हूं। परिवार के आर्थिक मामले भी संभालती हूं। पति को नहीं मालूम कि बीमा की किस्त कितनी और कब भरनी होती है। बिजली का बिल, बैंकिंग, भुगतान आदि कब किया जाना है। इन सभी चिंताओं से उन्हें मुक्त रखती हूं। ये अक्सर कहते भी हैं कि जितना काम तुम करती हो, अगर उसका वेतन देना पड़ता तो बहुत खर्च आता और इतना भरोसा भी नहीं होता।
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परंपरा और आधुनिकता का आदर्श संगम हैं पत्नी श्वेता
कैटलिस्ट कोचिंग के डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बताया कि मेरा मानना है कि पत्नी न तो रूढ़िवादी परिवार से हो और न बहुत ही आधुनिक। पत्नी श्वेता सिंह में दोनों गुणों का संगम है। उच्च शिक्षित होने के बावजूद परिवार में बुजुर्ग माता-पिता का अच्छी बेटी की तरह ख्याल रखती हैं। घर, परिवार, रिश्ते-नातेदारी को इतने बेहतर तरीके से संभाला है कि कहीं मेरी कमी महसूस नहीं होने देतीं। उनकी दखल सिर्फ मेरी जिंदगी में ही नहीं, बल्कि बिजनेस और अन्य कार्यों में भी पूरी तरह है। सच कहूं तो आज मैं जो भी हूं, उनकी बदौलत ही हूं।
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नेशनल हाउस वाइफ-डे पर अमर उजाला का गेस्ट एडिटर बनने का उत्साह गृहिणियों में तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार को तीसरे दिन भी अमर उजाला के दो व्हाट्सएप नंबरों पर दिनभर प्रविष्टियां आती रहीं। मंगलवार की दस भाग्यशाली विजेताओं को उनका गिफ्ट हैंपर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दरअसल, अपराजिता 100 मिलियन स्माइल अभियान के तहत नेशनल हाउस वाइफ-डे (तीन नवंबर) पर अमर उजाला तीन हाउस वाइफ गेस्ट एडिटर पैनल के निर्देेशन में प्रकाशित किया जाएगा। गेस्ट एडिटर पैनल के लिए तीन हाउस वाइफ क्विज कॉंटेस्ट के जरिए चुनी जाएंगी। यह तीन गेस्ट एडिटर दो नवंबर को अमर उजाला संपादकीय टीम का नेतृत्व करेंगी। ये ऐसी महिलाएं होंगी जिन्होंने अपने परिवार के आगे कॅरियर को महत्व नहीं दिया।
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अच्छी हाउस वाइफ होने का गर्व
गृहिणी श्वेता सिंह ने बताया कि एमएससी बॉयोटेक के बाद अमरीका में कॅरियर बनाने का मौका था, लेकिन मैंने अपने परिवार को प्राथमिकता दी। गर्व है कि एक अच्छी हाउस वाइफ हूं। घर, किचन के साथ ही परिवार के हर सदस्य की जिम्मेदारी शिद्दत से निभाती हूं। बच्चों को पढ़ाने का काम खुद करती हूं। परिवार के आर्थिक मामले भी संभालती हूं। पति को नहीं मालूम कि बीमा की किस्त कितनी और कब भरनी होती है। बिजली का बिल, बैंकिंग, भुगतान आदि कब किया जाना है। इन सभी चिंताओं से उन्हें मुक्त रखती हूं। ये अक्सर कहते भी हैं कि जितना काम तुम करती हो, अगर उसका वेतन देना पड़ता तो बहुत खर्च आता और इतना भरोसा भी नहीं होता।
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परंपरा और आधुनिकता का आदर्श संगम हैं पत्नी श्वेता
कैटलिस्ट कोचिंग के डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बताया कि मेरा मानना है कि पत्नी न तो रूढ़िवादी परिवार से हो और न बहुत ही आधुनिक। पत्नी श्वेता सिंह में दोनों गुणों का संगम है। उच्च शिक्षित होने के बावजूद परिवार में बुजुर्ग माता-पिता का अच्छी बेटी की तरह ख्याल रखती हैं। घर, परिवार, रिश्ते-नातेदारी को इतने बेहतर तरीके से संभाला है कि कहीं मेरी कमी महसूस नहीं होने देतीं। उनकी दखल सिर्फ मेरी जिंदगी में ही नहीं, बल्कि बिजनेस और अन्य कार्यों में भी पूरी तरह है। सच कहूं तो आज मैं जो भी हूं, उनकी बदौलत ही हूं।
परिवार और बेटियों को समर्पित है जीवन
गृहिणी जया जालान ने बताया कि हाउस वाइफ, होम मेकर भी कहलाती हैं, यह काम मैं बखूबी निभा रही हूं। यही वजह है कि पति बेफिक्र होकर बिजनेस पर ध्यान देते हैं। उन्हें कोई चिंता न हो इसके लिए मैंने अपना जीवन परिवार और बेटियों को समर्पित कर रखा है। बेटी आरिका लगातार कक्षा और स्कूल टॉपर बनी हुई है। जब उसकी तारीफ होती है तो गर्व होता है कि मैं उसे अच्छी तरह पढ़ा रही हूं। दो साल की बेटी माहिरा की भी तारीफ हो रही है। वह खुश रहें, इसलिए हर जरूरत समय पर पूरी होती है। मेरी भूमिका यहीं तक सीमित नहीं है, इनको भी बिजनेस में पूरा सहयोग देती हूं। आपस में समन्वय और प्रेम ही हमारी मजबूती है।
मुझसे ज्यादा बड़ी भूमिका जया निभा रहीं
जालान कॉनकास्ट लिमिटेड के निदेशक तनुज जालान ने बताया कि मैं तो सिर्फ बिजनेस कर रहा हूं, लेकिन पत्नी जया मुझसे बड़ी भूमिका निभा रही हैं। वह इतनी मजबूत हैं कि मेरा बिजनेस भी संभाल सकती हैं, लेकिन अगर मुझसे कहा जाए कि उनका रोल निभाऊं तो नहीं कर पाऊंगा। घर में कोई बीमार हो तो उसे इलाज दिलाना, बेटियों को अच्छी शिक्षा, घर की देखभाल, रिश्तेदारों से लेनदेन, व्यवहार हर क्षेत्र में जया बहुत कुशल हैं। उसके रहते मैं निश्चिंत होकर अपना कारोबार संभालता हूं या यू कहें कि जब बिजनेस में कोई समस्या आती है तो जया मुझे गाइड की तरह राह दिखाती हैं।
घर की मैनेजर तो मैं ही हूं
गृहिणी बबिता वर्मा ने बताया कि पति विनय वर्मा कारोबार के सिलसिले में अक्सर घर से बाहर रहते हैं। ऐसे में जिम्मेदारी बढ़ जाती है। बच्चों को तैयार करके स्कूल भेजना, फिर परिवार की देखभाल करना होता है। हर जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन करती हूं। पति को कभी कोई दिक्कत न आए, यही प्रयास रहता है। हमारी सोच-समझ एक दूसरे से मिलती है। कौन क्या चाहता है, यह आसानी से समझ जाते हैं। संयुक्त परिवार है। सास-ससुर व जेठ-जेठानी सब मिलकर रहते हैं। सब एक दूसरे का सम्मान करते हुए सहयोग से आगे बढ़ते हैं। बड़ी बेटी भूमि, कशिश, कुशाग्र व तुषार भी समझदार हैं। पति घर के बाहर की व्यवस्था संभालते हैं, लेकिन घर की असली मैनेजर तो मैं हूं। सब कुछ संभाल लेती हूं।
प्रबंध निदेशक भूमि वेब प्राइवेट लिमिटेड विनय वर्मा ने बताया कि बबिता के बगैर जीवन अधूरा है। 2004 में शादी हुई थी। तब से अब तक तमाम तरह की चुनौतियां आईं। बबिता का पूरा सहयोग मिला। नतीजा रहा कि सारी चुनौतियों से उबर गया। कारोबार के सिलसिले में अक्सर बाहर रहना होता है। लिहाजा, परिवार को ज्यादा समय नहीं दे पाता हूं। संयुक्त परिवार है। पत्नी के साथ ही अच्छे माता-पिता, भाई व भाभी हैं। इससे सब कुछ और आसान हो गया। पत्नी अच्छी हैं तो परिवार की तरफ से निश्चिंत होकर पूरा ध्यान कारोबार पर लगाता हूं।
मुझसे ज्यादा बड़ी भूमिका जया निभा रहीं
जालान कॉनकास्ट लिमिटेड के निदेशक तनुज जालान ने बताया कि मैं तो सिर्फ बिजनेस कर रहा हूं, लेकिन पत्नी जया मुझसे बड़ी भूमिका निभा रही हैं। वह इतनी मजबूत हैं कि मेरा बिजनेस भी संभाल सकती हैं, लेकिन अगर मुझसे कहा जाए कि उनका रोल निभाऊं तो नहीं कर पाऊंगा। घर में कोई बीमार हो तो उसे इलाज दिलाना, बेटियों को अच्छी शिक्षा, घर की देखभाल, रिश्तेदारों से लेनदेन, व्यवहार हर क्षेत्र में जया बहुत कुशल हैं। उसके रहते मैं निश्चिंत होकर अपना कारोबार संभालता हूं या यू कहें कि जब बिजनेस में कोई समस्या आती है तो जया मुझे गाइड की तरह राह दिखाती हैं।
घर की मैनेजर तो मैं ही हूं
गृहिणी बबिता वर्मा ने बताया कि पति विनय वर्मा कारोबार के सिलसिले में अक्सर घर से बाहर रहते हैं। ऐसे में जिम्मेदारी बढ़ जाती है। बच्चों को तैयार करके स्कूल भेजना, फिर परिवार की देखभाल करना होता है। हर जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन करती हूं। पति को कभी कोई दिक्कत न आए, यही प्रयास रहता है। हमारी सोच-समझ एक दूसरे से मिलती है। कौन क्या चाहता है, यह आसानी से समझ जाते हैं। संयुक्त परिवार है। सास-ससुर व जेठ-जेठानी सब मिलकर रहते हैं। सब एक दूसरे का सम्मान करते हुए सहयोग से आगे बढ़ते हैं। बड़ी बेटी भूमि, कशिश, कुशाग्र व तुषार भी समझदार हैं। पति घर के बाहर की व्यवस्था संभालते हैं, लेकिन घर की असली मैनेजर तो मैं हूं। सब कुछ संभाल लेती हूं।
प्रबंध निदेशक भूमि वेब प्राइवेट लिमिटेड विनय वर्मा ने बताया कि बबिता के बगैर जीवन अधूरा है। 2004 में शादी हुई थी। तब से अब तक तमाम तरह की चुनौतियां आईं। बबिता का पूरा सहयोग मिला। नतीजा रहा कि सारी चुनौतियों से उबर गया। कारोबार के सिलसिले में अक्सर बाहर रहना होता है। लिहाजा, परिवार को ज्यादा समय नहीं दे पाता हूं। संयुक्त परिवार है। पत्नी के साथ ही अच्छे माता-पिता, भाई व भाभी हैं। इससे सब कुछ और आसान हो गया। पत्नी अच्छी हैं तो परिवार की तरफ से निश्चिंत होकर पूरा ध्यान कारोबार पर लगाता हूं।
बनिए गेस्ट एडिटर, चलिए रेडिसन ब्लू
अमर उजाला के नेशनल वाइफ-डे यानी तीन नवंबर के संस्करण के लिए तीन गृहिणियों को गेस्ट एडिटर बनने का मौका मिलेगा। अमर उजाला का गेस्ट एडिटर बनने का उत्साह गृहिणियों में सिर चढ़कर बोल रहा है। बुधवार को सभी प्रविष्टियों में उत्तर तो शत प्रतिशत सही पाए गए, लेकिन 14 गृहिणियों ने साथ में अपनी फोटो नहीं भेजी इसलिए उनकी प्रविष्टि पर विचार नहीं किया गया। अधिक प्रविष्टियां होने के कारण दस भाग्यशाली विजेताओं का चयन लकी ड्रॉ से किया गया। चुनी गईं दस गृहिणियों को आकर्षक गिफ्ट हैंपर दिए जाएंगे। 31 अक्तूबर तक चुने गए विजेताओं में से गेस्ट एडिटर पैनल के लिए तीन और चलिए होटल रेडिसन ब्लू के लिए चार गृहिणियों का चुनाव किया जाएगा।
हम आपको बता दें कि तीन नवंबर को नेशनल हाउस वाइफ-डे पर अमर उजाला का जो अंक आपके हाथों में होगा, उसे तीन हाउस वाइफ का गेस्ट एडिटर पैनल तैयार करेगा। दो नवंबर को वह अमर उजाला कार्यालय में वे एक संपादक की तरह अमर उजाला की रिपोर्टिंग टीम से काम लेंगी। खबरों का चयन करेंगी और उन्हें अखबार में कहां स्थान देना है, वह भी वे ही तय करेंगी।
क्विज कांटेस्ट की नियम-शर्तें
यह कांटेस्ट केवल महिलाओं के लिए है
महिला का विवाहित होना अनिवार्य है
शैक्षणिक योग्यता स्नातक होनी चाहिए
उम्र 50 वर्ष से अधिक न हो
क्विज में उसी दिन के अमर उजाला में प्रकाशित समाचारों से संबंधित प्रश्न
पूछे जाएंगे। जवाब के विकल्पों में सही पर टिक करना होगा
31 अक्तूबर को आखिरी क्विज प्रकाशित होगी
20 सफल विजेताओं से तीन गेस्ट एडिटर चुनी जाएंगी
गेस्ट एडिटर का चुनाव होटल रेडिसन ब्लू में सामान्य लिखित परीक्षा से होगा
अमर उजाला के पाठकों के अलावा अन्य गृहणियां भी भाग ले सकतीं हैं। उन्हें अमर उजाला में प्रकाशित क्विज फार्मेट की फोटो स्टेट कराकर भरकर भेजना होगा।
एक बार विजेता घोषित होने के बाद अन्य क्विज में एंट्री नहीं शामिल होगी।
निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम होगा
आज के विजेता
लकी ड्रा के जरिए चुनी गईं विजेता
गोरखपुर। अपराजिता नेशनल हाउस वाइफ डे कॉन्टेस्ट में बड़ी संख्या में महिलाएं प्रतिभाग कर रही हैं। तीसरे दिन 1188 प्रविष्टियां आईं। शाम छह बजे तक मिली इन प्रविष्टियों में से लकी ड्रा के जरिए 10 महिलाओं को विजेता चुना गया।
हम आपको बता दें कि तीन नवंबर को नेशनल हाउस वाइफ-डे पर अमर उजाला का जो अंक आपके हाथों में होगा, उसे तीन हाउस वाइफ का गेस्ट एडिटर पैनल तैयार करेगा। दो नवंबर को वह अमर उजाला कार्यालय में वे एक संपादक की तरह अमर उजाला की रिपोर्टिंग टीम से काम लेंगी। खबरों का चयन करेंगी और उन्हें अखबार में कहां स्थान देना है, वह भी वे ही तय करेंगी।
क्विज कांटेस्ट की नियम-शर्तें
यह कांटेस्ट केवल महिलाओं के लिए है
महिला का विवाहित होना अनिवार्य है
शैक्षणिक योग्यता स्नातक होनी चाहिए
उम्र 50 वर्ष से अधिक न हो
क्विज में उसी दिन के अमर उजाला में प्रकाशित समाचारों से संबंधित प्रश्न
पूछे जाएंगे। जवाब के विकल्पों में सही पर टिक करना होगा
31 अक्तूबर को आखिरी क्विज प्रकाशित होगी
20 सफल विजेताओं से तीन गेस्ट एडिटर चुनी जाएंगी
गेस्ट एडिटर का चुनाव होटल रेडिसन ब्लू में सामान्य लिखित परीक्षा से होगा
अमर उजाला के पाठकों के अलावा अन्य गृहणियां भी भाग ले सकतीं हैं। उन्हें अमर उजाला में प्रकाशित क्विज फार्मेट की फोटो स्टेट कराकर भरकर भेजना होगा।
एक बार विजेता घोषित होने के बाद अन्य क्विज में एंट्री नहीं शामिल होगी।
निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम होगा
आज के विजेता
लकी ड्रा के जरिए चुनी गईं विजेता
गोरखपुर। अपराजिता नेशनल हाउस वाइफ डे कॉन्टेस्ट में बड़ी संख्या में महिलाएं प्रतिभाग कर रही हैं। तीसरे दिन 1188 प्रविष्टियां आईं। शाम छह बजे तक मिली इन प्रविष्टियों में से लकी ड्रा के जरिए 10 महिलाओं को विजेता चुना गया।