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अनूप जलोटा बोले: रामचरितमानस को पढ़ने वाले जानते हैं ताड़ना का सही अर्थ, राजनीतिक फायदे के लिए उठाए जा रहे सवाल

Sun, 19 Feb 2023 10:53 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Published by: आकाश दुबे Updated Sun, 19 Feb 2023 10:53 PM IST
सार

अनूप जलोटा ने कहा कि इन दिनों कुछ राजनीतिक दल रामचरितमानस की चौपाइयों की व्याख्या अपने-अपने हिसाब से करके सियासी फायदा लेने की कोशिश कर रहे हैं।

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Anup Jalota said Those who read Ramcharitmanas know true meaning of tadna
भजन सम्राट अनूप जलोटा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा का कहना है कि जो लोग सकारात्मक हैं और रामचरितमानस को पढ़े हैं, वे ताड़ना का अर्थ निगरानी के रूप में लेते हैं, लेकिन जो लोग नकारात्मक हैं, वे इसे मारपीट के रूप में लेते हैं। उन्होंने कहा कि इन दिनों कुछ राजनीतिक दल रामचरितमानस की चौपाइयों की व्याख्या अपने-अपने हिसाब से करके सियासी फायदा लेने की कोशिश कर रहे हैं।

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बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित रामरमैया कार्यक्रम में शामिल होने आए अनूप जलोटा ने रविवार को एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि रामचरितमानस की चौपाइयां 400 वर्ष पहले लिखी गई हैं। जो लोग आज मानस की प्रतियां जला रहे हैं, वे बड़ी देर से जागे हैं। 400 साल पहले भी दियासलाई थी, मगर तब किसी ने सवाल नहीं उठाया। आज अचानक ऐसी बातें कहीं जा रही हैं, जिससे साबित होता है कि राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि केवल रामचरितमानस पढ़ लेने से बात नहीं बनेगी। इसे अपने जीवन में उतारने की जरूरत है। 

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हिंदू राष्ट्र हो घोषित
एक सवाल के जवाब में जलोटा ने कहा कि भारत हिंदू राष्ट्र है, केवल घोषित करना शेष है। हिंदू राष्ट्र होने की वजह से ही बाकी धर्मों के लोगों को अपने-अपने धर्म मानने की छूट है। आखिर पाकिस्तान को इस्लामिक और अमेरिका को ईसाइयों का देश क्यों कहा जाता है? क्योंकि वहां उस धर्म को मानने वाले लोगों की संख्या अधिक है। कोई तो एक ऐसा देश हो, जो हिंदू राष्ट्र हो। इससे किसी भी धर्म के अधिकारों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कश्मीर में बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ, लेकिन खून का एक भी कतरा नहीं बहा। अपनी मां के साथ दूसरों की मां की पूजा करना हिंदू धर्म सिखाता है।

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21 शहरों में 21 प्रतिभाएं होंगी प्रस्तुत
भजन गायक ने कहा कि भारत सबसे अधिक आध्यात्मिक देश है। हर एक शहर में जहां-जहां पवित्र नदियां जाती हैं, उनके घाटों पर ओंकारम की ओर से संगीत के अलावा अध्यात्म की प्रस्तुति दी जाएगी। इसमें योग, संगीत, नृत्य, मंत्रों का उच्चारण, तबला वादन, गिटार वादन सिखाया जाएगा। आज हमारे देश की युवा पीढ़ी को इससे परिचित कराने की आवश्यकता है। इसी तरह 21 शहरों में 21 प्रतिभाओं को प्रस्तुत किया जाएगा। कुछ प्रतिभाएं मुंबई से पहुंची हैं।

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