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Gorakhpur News: रिच सिग्नल मल्टी बिजनेस के निदेशकों पर एक और प्राथमिकी दर्ज

Sat, 17 Jan 2026 02:31 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jan 2026 02:31 AM IST
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Another FIR registered against directors of Rich Signal Multi Business
- पर्सनल लोन दिलाकर शिक्षक से 64 लाख का कराया निवेश, बैंक की ईएमआई जमा करने का भी दिया था झांसा
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- तीन दिनों में जालसाज निदेशकों के खिलाफ तीन प्राथमिकी, पुलिस ने तलाश तेज की
- चौरीचौरा व रामगढ़ताल थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, मोबाइल बंद कर भूमिगत हुए आरोपी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। निजी कंपनियों में निवेश के नाम पर सुनियोजित ठगी के एक और मामले में रिच सिग्नल मल्टी बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के खिलाफ नई प्राथमिकी दर्ज की गई है। सहायक अध्यापक को पर्सनल लोन 64 लाख रुपये दिलाकर निवेश कराने के बाद रकम हड़पने का आरोप है। पीड़ित की तहरीर पर रामगढ़ताल थाने में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने जांच तेज कर दी है। बीते तीन दिनों में कंपनी के निदेशकों सुशील कुमार निगम, किशन कुमार, सुशील की पत्नी रश्मि बाला व सहयोगियों गणेश और छेदी के खिलाफ यह तीसरा मामला है। इससे ठगी के बड़े नेटवर्क की आशंका और गहरा गई है।
महाराजगंज के नौतनवां पकदह शाहपुर निवासी चंद्र भानु प्रसाद इलाके के उच्च प्राथमिक विद्यालय जमुहानी कंपोजिट में सहायक अध्यापक हैं। उन्होंने बताया कि गोरखपुर में संचालित रिच सिग्नल मल्टी बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी ऑल ट्रेड मार्ट लिमिटेड के प्रोपराइटर सरैया टोला लौठरवा निवासी सुशील कुमार निगम और अन्य निदेशकों ने अधिक मुनाफे का लालच देकर उन्हें निवेश के लिए तैयार किया। इस पूरे प्रकरण में फरेंदा के सरकारी शिक्षक गणेश प्रसाद और छेदी प्रसाद निषाद ने मध्यस्थ बनकर भरोसा दिलाया कि रुपये निवेश के बाद बैंक में ईएमआई कंपनी की ओर से जमा होती रहेगी। साथ ही मुनाफा भी मिलता रहे। ईएमआई बाउंस नहीं होने दी जाएगी।
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इसके बाद आरोपियों ने विभिन्न बैंकों से पर्सनल लोन कराकर कुल 64 लाख रुपये कंपनी में निवेश कराए। शर्त यह तय हुई कि कंपनी हर माह ईएमआई का भुगतान करेगी। शुरुआत में करीब छह माह तक ईएमआई समय से जमा होती रही, लेकिन अक्तूबर 2024 के बाद अचानक भुगतान रोक दिया गया। इसके बाद लगातार टालमटोल शुरू हो गई। मजबूरी में पीड़ित ने कर्ज लेकर जनवरी 2025 तक किसी तरह ईएमआई जमा की। लेकिन बाद में आर्थिक हालात इतने खराब हो गए कि बैंक के सामने हाथ खड़े करने पड़े।
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पीड़ित का आरोप है कि कर्ज और आर्थिक दबाव के कारण वह गंभीर अवसाद में चला गया है और बीपी, शुगर व आईबीएस जैसी बीमारियों से ग्रसित हो चुका है। पीड़ित ने पुलिस से 64 लाख रुपये मूलधन और 28.90 लाख रुपये बकाया ईएमआई, कुल 92.90 लाख रुपये वापस कराए जाने की मांग की है, ताकि वह बैंक का कर्ज चुका सके।


कोट
आरोपियों के खिलाफ अब तक तीन मामले दर्ज किए जा चुके हैं। चौरीचौरा व रामगढ़ताल थाना पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। सभी नामजद आरोपियों के मोबाइल बंद हैं और वे भागे हुए रहे हैं। साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
- योगेंद्र सिंह, सीओ कैंट
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