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Gorakhpur News: आयुष विश्वविद्यालय में स्थापित होगा एनिमल ड्रग्स रिसर्च सेंटर
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- आयुर्वेदिक पद्धति से पशुओं के इलाज के लिए होंगे शोध कार्य
- आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार करने वाला प्रदेश का पहला संस्थान बनेगा आयुष विश्वविद्यालय
भटहट। महायोगी गुरु गोरखनाथ विश्व विश्वविद्यालय में पशुओं के आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज के लिए अब शोध होगा। इसके लिए विश्वविद्यालय में एनिमल ड्रग्स रिसर्च सेंटर की स्थापना की जाएगी। इसके लिए भारत सरकार की क्लीनिकल एथिकल कमेटी मान्यता मिल गई है।
आयुष विश्वविद्यालय पशुओं के आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार शुरू करने वाला उत्तर प्रदेश का पहला संस्थान बनने की दिशा में अग्रसर हो रहा है। यहां पशुओं में होने वाली विभिन्न बीमारियों के रोकथाम के साथ ही उपचार के लिए दवाएं भी विकसित की जाएंगी। आयुर्वेद होने के कारण इसका असर प्रभावी तो होगा ही किसी साइड इफेक्ट की भी आशंका नहीं होगी।
पशुओं में बीमारी या संक्रमण कई बार इतना गहरा हो जाता है कि वह जानलेवा हो जाता है। पशुओं की बीमारी पर शोध पर प्राय: कम ही काम हो पाते हैं। इस वजह से उन्हें लेकर पशुपालकों में जागरूकता का भी अभाव है। आयुष विश्वविद्यालय में एनिमल ड्रग्स रिसर्च सेंटर खुलने से नए अध्ययन और शोध तो होंगे ही सेमिनार और कार्यशालाओं से जागरूकता भी बढ़ेगी।
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गठित होगी विशेषज्ञों की समिति
विश्वविद्यालय में रिसर्च सेंटर की स्थापना को लेकर तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। जल्द ही इसके लिए विशेषज्ञों की टीम भी गठित की जाएगी। यहां आधुनिक उपकरणों और सुविधाओं से युक्त एक प्रयोगशाला भी स्थापित की जाएगी। यह पशुओं के लिए आयुर्वेद पद्धति पर अपनी तरह एक अनूठा शोध केंद्र होगा।
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क्लीनिकल एथिकल कमेटी से इस रिसर्च सेंटर के लिए मान्यता प्राप्त करने वाला विश्वविद्यालय राज्य का पहला संस्थान बन गया है। यहां राज्य के अन्य आयुर्वेद कॉलेजों में होने वाले शोध कार्य भी पंजीकृत किए जाएंगे। विश्वविद्यालय की तरफ से उन्हें क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया से मान्यता दिलाया जाएगा।
- प्रो. के. रामचंद्र रेड्डी, कुलपति
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- आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार करने वाला प्रदेश का पहला संस्थान बनेगा आयुष विश्वविद्यालय
भटहट। महायोगी गुरु गोरखनाथ विश्व विश्वविद्यालय में पशुओं के आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज के लिए अब शोध होगा। इसके लिए विश्वविद्यालय में एनिमल ड्रग्स रिसर्च सेंटर की स्थापना की जाएगी। इसके लिए भारत सरकार की क्लीनिकल एथिकल कमेटी मान्यता मिल गई है।
आयुष विश्वविद्यालय पशुओं के आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार शुरू करने वाला उत्तर प्रदेश का पहला संस्थान बनने की दिशा में अग्रसर हो रहा है। यहां पशुओं में होने वाली विभिन्न बीमारियों के रोकथाम के साथ ही उपचार के लिए दवाएं भी विकसित की जाएंगी। आयुर्वेद होने के कारण इसका असर प्रभावी तो होगा ही किसी साइड इफेक्ट की भी आशंका नहीं होगी।
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पशुओं में बीमारी या संक्रमण कई बार इतना गहरा हो जाता है कि वह जानलेवा हो जाता है। पशुओं की बीमारी पर शोध पर प्राय: कम ही काम हो पाते हैं। इस वजह से उन्हें लेकर पशुपालकों में जागरूकता का भी अभाव है। आयुष विश्वविद्यालय में एनिमल ड्रग्स रिसर्च सेंटर खुलने से नए अध्ययन और शोध तो होंगे ही सेमिनार और कार्यशालाओं से जागरूकता भी बढ़ेगी।
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गठित होगी विशेषज्ञों की समिति
विश्वविद्यालय में रिसर्च सेंटर की स्थापना को लेकर तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। जल्द ही इसके लिए विशेषज्ञों की टीम भी गठित की जाएगी। यहां आधुनिक उपकरणों और सुविधाओं से युक्त एक प्रयोगशाला भी स्थापित की जाएगी। यह पशुओं के लिए आयुर्वेद पद्धति पर अपनी तरह एक अनूठा शोध केंद्र होगा।
क्लीनिकल एथिकल कमेटी से इस रिसर्च सेंटर के लिए मान्यता प्राप्त करने वाला विश्वविद्यालय राज्य का पहला संस्थान बन गया है। यहां राज्य के अन्य आयुर्वेद कॉलेजों में होने वाले शोध कार्य भी पंजीकृत किए जाएंगे। विश्वविद्यालय की तरफ से उन्हें क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया से मान्यता दिलाया जाएगा।
- प्रो. के. रामचंद्र रेड्डी, कुलपति