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Gorakhpur News: मौत के कारणों का विश्लेषण नीति निर्धारण व शोध के लिए उपयोगी
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स्वास्थ्य विभाग और टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट ने जनगणना कार्य निदेशालय के सहयोग से बीआरडी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। गोरखपुर व आसपास के जिलों के डॉक्टर कार्यशाला में शामिल हुए। कार्यशाला का शुभारंभ अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ नरेंद्र गुप्ता और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ राजकुमार ने किया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए अपर निदेशक डॉ नरेंद्र गुप्ता ने कहा कि मृत्यु के कारणों का चिकित्सकीय प्रमाणन, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (यथा संशोधित 2023) के अंतर्गत किया जाता है। अंतिम इलाज करने वाले प्रत्येक डॉक्टर द्वारा मृत्यु के कारण को प्रमाणित करना अनिवार्य है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामकुमार ने कहा कि मृत्यु के कारणों का पता लगाना और प्रमाणीकरण हमारे व्यावसायिक दक्षता को भी बढ़ाता है। इससे अनुसंधान और नवाचार को भी बढ़ावा मिलता है। सहायक निदेशक जनगणना कार्य निदेशालय डॉ. गौरव पांडेय ने कहा है कि वर्ष 2018 में जहां प्रदेश में 38 प्रतिशत मृत्यु पंजीकरण होता था, वहीं पिछले 3 वर्षों में यूपी में 72 प्रतिशत तक मृत्यु पंजीकरण में सुधार हुआ है।
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टाटा कैंसर अस्पताल के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ निशांत कुमार और डॉ अंजली के साथ-साथ उप निदेशक जनगणना कार्य निदेशालय दिव्या जैन ने चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया। इस दौरान ज्वाइंट डॉयरेक्टर हेल्थ डॉ बीएम राव, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मंडलीय प्रबन्धक अरविंद पांडेय, गोरखपुर जनपद के नोडल अधिकारी अनिल सिंह, सहायक शोध अधिकारी रत्नाकर शुक्ला और आदिल प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।
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कार्यशाला को संबोधित करते हुए अपर निदेशक डॉ नरेंद्र गुप्ता ने कहा कि मृत्यु के कारणों का चिकित्सकीय प्रमाणन, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (यथा संशोधित 2023) के अंतर्गत किया जाता है। अंतिम इलाज करने वाले प्रत्येक डॉक्टर द्वारा मृत्यु के कारण को प्रमाणित करना अनिवार्य है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामकुमार ने कहा कि मृत्यु के कारणों का पता लगाना और प्रमाणीकरण हमारे व्यावसायिक दक्षता को भी बढ़ाता है। इससे अनुसंधान और नवाचार को भी बढ़ावा मिलता है। सहायक निदेशक जनगणना कार्य निदेशालय डॉ. गौरव पांडेय ने कहा है कि वर्ष 2018 में जहां प्रदेश में 38 प्रतिशत मृत्यु पंजीकरण होता था, वहीं पिछले 3 वर्षों में यूपी में 72 प्रतिशत तक मृत्यु पंजीकरण में सुधार हुआ है।
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टाटा कैंसर अस्पताल के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ निशांत कुमार और डॉ अंजली के साथ-साथ उप निदेशक जनगणना कार्य निदेशालय दिव्या जैन ने चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया। इस दौरान ज्वाइंट डॉयरेक्टर हेल्थ डॉ बीएम राव, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मंडलीय प्रबन्धक अरविंद पांडेय, गोरखपुर जनपद के नोडल अधिकारी अनिल सिंह, सहायक शोध अधिकारी रत्नाकर शुक्ला और आदिल प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।