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Amla Navami 2022: आज मनाई जा रही है अक्षय नवमी, आंवले के वृक्ष की होगी पूजा-अर्चना

Wed, 02 Nov 2022 05:40 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 02 Nov 2022 05:40 AM IST
सार

वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, दो नवंबर को नवमी तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात्रि 10 बजकर 53 मिनट तक है। इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र रात्रि शेष चार बजकर छह मिनट और मित्र नामक औदायिक योग भी है, जो आपसी सौहार्द में वृद्धि करने वाला है।

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Amla Navami 2022 Worship celebration news
अक्षय नवमी पर आंवला वृक्ष का पूजन करती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अक्षय नवमी आज बुधवार को मनाई जा रही है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा और इसके नीचे भोजन बनाने व ग्रहण करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। स्नान, पूजन, तर्पण और अन्नादि के दान से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
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इस दिन भगवान लक्ष्मी नारायण के पूजन का भी विधान है। वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, दो नवंबर को नवमी तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात्रि 10 बजकर 53 मिनट तक है। इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र रात्रि शेष चार बजकर छह मिनट और मित्र नामक औदायिक योग भी है, जो आपसी सौहार्द में वृद्धि करने वाला है।
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ये है महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, हिंदू धर्म के सबसे बड़े अनुष्ठानों में एक अक्षय नवमी को भी माना गया है। अक्षय नवमी के दिन किए दान या किसी धर्मार्थ कार्य का लाभ व्यक्ति को वर्तमान और अगले जन्म में भी प्राप्त होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, अक्षय नवमी के दिन सतयुग प्रारंभ हुआ। इसके साथ ही एक अन्य कल्प में इसी दिन त्रेतायुग का भी प्रारंभ हुआ था। इस दिन को किसी भी पुण्य कार्य के लिए अनुकूल और शुभ समय माना जाता है।
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पूजन विधि
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इस दिन सुबह उठकर स्नानादि के बाद दाहिने हाथ में जल, अक्षत, पुष्प आदि लेकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद धात्री वृक्ष (आंवले) के नीचे पूर्व दिशा की ओर मुखकर बैठें। ‘ऊॅ धात्र्यै नम:’ मंत्र का जप करते हुए षोडशोपचार पूजन कर आंवले के वृक्ष की जड़ में दूध से जलाभिषेक करते हुए पितरों का तर्पण करें। सायंकाल आंवले के वृक्ष नीचे घी का दीपक प्रज्वलित करें और वृक्ष की सात परिक्रमा करें। जब परिक्रमा पूर्ण हो जाए तो प्रसाद वितरण करें और वृक्ष के नीचे ही भोजन भी करें।

 
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