एंबुलेंस माफिया: पुलिस ने की कार्रवाई, चार वाहन छोड़कर फिर निकल भागे चालक
एसपी (नार्थ ) मनोज अवस्थी ने कहा कि प्राइवेट एंबुलेंस समेत चार वाहनों को सीज कर दिया गया है। फरार पांच लोगों की तलाश में पुलिस टीम लगी है। जल्द ही उनकी गिरफ्तारी कर ली जाएगी। आरोपियों पर इनाम भी जल्द घोषित होगा।
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एंबुलेंस-मरीज माफिया के खिलाफ मंगलवार की देर रात पुलिस ने फिर कार्रवाई की। बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर में खड़ी तीन प्राइवेट एंबुलेंस व एक कार को सीज कर दिया गया। लेकिन, चालक और माफिया हत्थे नहीं आए। पुलिस का दावा है कि सभी भाग गए।
चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले 22 दिनों से फरार पांच एंबुलेंस माफिया अब भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। पुलिस अब इन माफिया पर इनाम घोषित करने की तैयारी में है। बार-बार पुलिस के हाथ से माफिया-चालकों के निकल भागने से सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
बता दें नौ जुलाई की रात चेकिंग के दौरान एंबुलेंस पकड़े जाने पर एंबुलेंस मरीज माफिया ने बवाल काटा था। चौकी पर घेराबंदी कर पुलिस से हाथापाई की गई। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया था। लेकिन, मौके से पांच आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए। उन सभी को आरोपी तो बनाया गया पर अबतक गिरफ्तारी नहीं हो पाई।
इसबीच एडीजी अखिल कुमार व कमिश्नर अनिल ढींगरा की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी विभागों को कार्रवाई का आदेश दिया गया। मंगलवार की रात में मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस परिसर में गश्त पर थी। इस दौरान फिर पुलिस को तीन प्राइवेट एंबुलेंस दिखे। तीनों को सीज कर दिया।
इस दौरान पुलिस को पता चला कि इनके साथी बाहर खड़े हैं, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही सभी एक लग्जरी कार को छोड़कर फरार हो गए। पुलिस ने को भी सीज कर दिया। बीआरडी में चालकों और माफिया के बार-बार पुलिस के हत्थे न चढ़ने को लेकर तमाम चर्चाएं रहीं।
एसपी (नार्थ ) मनोज अवस्थी ने कहा कि प्राइवेट एंबुलेंस समेत चार वाहनों को सीज कर दिया गया है। फरार पांच लोगों की तलाश में पुलिस टीम लगी है। जल्द ही उनकी गिरफ्तारी कर ली जाएगी। आरोपियों पर इनाम भी जल्द घोषित होगा।
कमिश्नर बोले... तीन दिन अभियान चलाकर भूल गए आरटीओ
एंबुलेंस-मरीज माफिया सरकारी से प्राइवेट अस्पताल में मरीजों को शिफ्ट करते हैं और फिर फर्जी अस्पताल में मरीज अपनी जान गंवा देते हैं। पुलिस जांच में खुली इस पोल को कमिश्नर अनिल ढींगरा ने भी गंभीरता से लिया। 19 जुलाई को पुलिस, आरटीओ, सीएमओ, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के साथ बैठक में सभी विभागों की जिम्मेदारी तय की गई। लेकिन, कमिश्नर के आदेश को विभागों ने गंभीरता से लिया ही नहीं। आरटीओ ने तीन दिन अभियान चलाया और यातायात जागरूकता पखवाड़े का हवाला देकर बंद कर दिया।
स्वास्थ्य विभाग के अभियान का भी यही हाल है। 187 में महज 30 अस्पतालों का आवेदन निरस्त किया गया है। सीएमओ का कहना है कि अस्पताल अवैध नहीं बल्कि आवेदन में चूक हो गई। उनका यह तर्क गले नहीं उतरता है। अगर सब कुछ ठीक है तो फिर आए दिन प्राइवेट अस्पताल में मरीज की मौत के बाद बिना डिग्री वाले डॉक्टर कैसे सामने आ जाते हैं। अभी जुलाई में ही फर्जी डॉक्टर काजू के इलाज से एक मरीज की जान चली गई थी।
जानकारी के मुताबिक, कमिश्नर ने मेडिकल कॉलेज में सीसी टीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था। जगह तलाशी गई, लेकिन आगे बात नहीं बन सकी। कुछ यही हाल प्राइवेट एंबुलेंस पर अस्पताल के नाम व नंबर लिखने का भी है। एंबुलेंस पर नाम, नंबर लिखने का काम भी नहीं हो सका है। सिर्फ कमिश्नर के आदेश के बाद चंद दिन विभागों ने अभियान चलाया और फिर खानापूरी कर बंद कर दिया गया।
अधिकारियों ने क्या कहा
187 प्राइवेट अस्पताल, पैथॉलाॅजी के कागजात में खामी थी। इसमें से 30 के आवेदन को निरस्त कर दिया गया। कई लोगों ने दो बार आवेदन कर दिया था। कोई अवैध नहीं है, सिर्फ आवेदन में ही खामी सामने आई है। सबको एक मौका दिया गया है, ताकि वह कागजात सही करा लें। ऐसा नहीं किया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. आशुतोष दुबे, सीएमओ।