अमर उजाला इंपैक्ट: विकलांग व्यवस्था में फंसे दिव्यांग राहुल को मिली नौकरी, हार चुके थे हिम्मत
श्रमिक पद पर नियुक्ति होने के बाद दिव्यांग राहुल खान की आंखों में खुशी थी। बहनें सोनी और मुस्कान ने बताया कि नौकरी नहीं होने से परिवार के भरण-पोषण के लिए दूसरों के घरों का काम भी करना पड़ता था। हम उम्मीद हार चुके थे कि हमारे परिवार में पढ़ा-लिखा और जिम्मेदार दूसरा कोई नहीं है।
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बिजली निगम की विकलांग व्यवस्था में फंसे दिव्यांग राहुल को आखिरकार नौकरी मिल ही गई। विभागीय प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद शुक्रवार को उन्हें विभाग में मृतक आश्रित कोटे से चार साल बाद श्रमिक पद पर नियुक्ति मिल गई। दिवंगत बिजलीकर्मी गूड्डू खान के पुत्र राहुल खान की तैनाती ग्रामीण खंड प्रथम में हुई है।
निगम से नौकरी पाने की इस लड़ाई में राहुल ने सारी उम्मीदें छोड़ दी थीं। लेकिन, कर्मचारी नेता अजय शाही के प्रयास से उन्हें बल मिला। वहीं वर्तमान मुख्य अभियंता ने राहुल के दिव्यांग होने की वजह से प्राथमिकता आधार पर उनकी नियुक्ति का निर्देश जारी किया।
चौरीचौरा खंड में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी गुड्डू खान का 2018 में निधन हो गया था। पत्नी उन्हें पहले ही छोड़कर चली गईं थीं। ऐसे में इकलौते बेटे राहुल खान ने 2019 में बिजली निगम में मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी का आवेदन किया था। कागजी प्रक्रिया करने और खुद के दिव्यांग होने का प्रमाणपत्र लगाने के बाद भी उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी। साल दर साल कागज इधर से उधर घूमता रहा। 2022 में इसकी जानकारी अमर उजाला को हुई।
14 जनवरी को ‘विकलांग व्यवस्था में फंसा दिवंगत बिजलीकर्मी का दिव्यांग आश्रित’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई। इस खबर को प्रबंध निदेशक पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और चेयरमैन पावर कारपोरेशन के पास भी भेजा। चेयरमैन ने मामले का संज्ञान लेते हुए दिव्यांग को सहायता प्रदान करने के लिए जिले की स्वास्थ्य विभाग से प्रमाणपत्र मांगा। इसके बाद मामला फिर लटकने लगा।
अमर उजाला के प्रयास से बोर्ड का हुआ गठन
मामला लटकता देख कर्मचारी नेता अजय शाही ने पूरी बात एक बार फिर अमर उजाला से संपर्क कर साझा की। नौकरी में मेडिकल बोर्ड की अड़चन आने की बात बताई। इसके बाद सीएमओ से संपर्क कर पूरी बात बताई गई। सीएमओ ने 18 जून को मेडिकल बोर्ड का गठन किया। राहुल खान का परीक्षण होने के बाद उनकी जांच रिपोर्ट चौरीचौरा खंड को भेजी गई। इस रिपोर्ट में चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद माना कि राहुल खान काम करने योग्य हैं। हालांकि, वह दिव्यांग होने की वजह से सीढ़ी पर चढ़ने के अलावा शारीरिक परीक्षण का काम करने में असमर्थता जता सकते हैं।
मुख्य अभियंता ने रिपोर्ट परखी, की नियुक्ति
मुख्य अभियंता एके सिंह के सामने जब से मामला आया तो उन्होंने हैरत जताई। बिजली कर्मी का आश्रित वह भी दिव्यांग और वह नौकरी के लिए चार वर्ष से भटक रहा था। जानकारी होने पर उन्होंने पत्रावलियों को तलब किया। सभी जरूरी कागजात की जांच-पड़ताल की। दो दिन पहले राहुल खान को अपने दफ्तर बुलाकर बिजली निगम के नियमों की जानकारी, उसके ऊपर आश्रित दोनों बहनों की जिम्मेदारी उठाने की बात शपथ में लेने के बाद उसकी नियुक्ति कर दी।
हिम्मत हार चुके थे, उमर उजाला ने दी ताकत
श्रमिक पद पर नियुक्ति होने के बाद दिव्यांग राहुल खान की आंखों में खुशी थी। बहनें सोनी और मुस्कान ने बताया कि नौकरी नहीं होने से परिवार के भरण-पोषण के लिए दूसरों के घरों का काम भी करना पड़ता था। हम उम्मीद हार चुके थे कि हमारे परिवार में पढ़ा-लिखा और जिम्मेदार दूसरा कोई नहीं है। भाई खुद दिव्यांग है तो वह लड़ाई भी कैसे लड़ेगा? कर्मचारी नेता अजय शाही ने अमर उजाला से संपर्क करवाया। इसके बाद जब पत्रावलियां फिर से निगम की तरफ से मांगी जाने लगीं तो उम्मीद बंध गई। इसी का नतीजा है कि आज भाई को उसका अधिकारी मिल गया।