फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   always been conflict between DDU student groups in university

गोरखपुर विश्वविद्यालय में बवाल: अराजकता की पुरानी राह, फिर याद आया सिरफोड़वा

Sat, 22 Jul 2023 03:42 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 22 Jul 2023 03:42 PM IST
सार

विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव न कराने से भी सभी छात्र संगठनों में नाराजगी रही है। सभी छात्र संगठनों और छात्रनेताओं हंगामा भी किया। तालाबंदी से लेकर प्रदर्शन तक किए गए। कुलपति द्वारा छात्रों से कम संवाद करना भी नाराजगी की बड़ी वजह बताई जा रही है।

विज्ञापन
always been conflict between DDU student groups in university
DDU Gorakhpur - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्वविद्यालय में हुए बवाल ने 1998 की घटनाओं को ताजा कर दिया। तब एक के बाद एक करके सात शिक्षकों व कर्मचारियों का सिर फोड़ दिया गया। उस दौर में सिरफोड़वा की घटना भला कौन भूला होगा। पूरा शहर हिल गया था। गोरखपुर विश्वविद्यालय में किस शिक्षक के घर की घंटी बजेगी और सिर पर हमला होगा, यह कहना मुश्किल था।

विज्ञापन


विश्वविद्यालय में करफ्यू जैसा माहौल था। इसके पहले 1999 में तत्कालीन कुलपति प्रो. आरके मिश्रा की गाड़ी में तोड़फोड़ करके आग लगा दी गई थी। आए दिन परिसर और हॉस्टल में बम और गोलियां चलती थीं।
विज्ञापन


शुक्रवार को विश्वविद्यालय में बवाल से हर कोई सन्न है। यकीन कर पाना मुश्किल है कि ज्ञान-शील-एकता का सूत्र लेकर काम करनी वाली संस्था एबीवीपी के लोग ऐसी घटना को अंजाम देंगे। लोग यह कहते भी सुने गए कि 25 बरस पहले वाला दौर शुरू हो गया, विश्वविद्यालय आज उसी अराजकता वाले राह पर चल पड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसे भी पढ़ें: गोरखपुर विश्वविद्यालय में बवाल: छात्रों ने कुलपति के साथ की अभद्रता, मांगों को लेकर चल रहा था विवाद

विश्वविद्यालय में हिंसक घटनाएं तो कई बार हुई हैं। एक दौर था, जब विश्वविद्यालय में गोली और बम आए दिन चलते थे। हॉस्टल से लेकर छात्रसंघ कार्यालय तक पर कई बार हमले हुए। आंदोलन के दौरान पथराव भी हुआ। तत्कालीन एडीएम सिटी बादल चटर्जी के निर्देश पर विश्वविद्यालय परिसर में पीएसी ने जमकर आतंक मचाया था। लेकिन यह पहली बार है कि जब आंदोलित छात्र हिंसक हो रहे हैं। सप्ताह भर में दो घटनाओं ने विश्वविद्यालय को हिला दिया है।

विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष दिनेश चंद त्रिपाठी कहते हैं, उनके दौर में हिंसा की घटनाएं होती रहीं है। एक बार दो ब्राह्मण-क्षत्रिय के बीच संघर्ष ने इतना विकराल रूप ले लिया कि दोनों पक्ष आमने-सामने थे और बीच में पुलिस। दोनों तरफ से पथराव भी हुए। लेकिन कुलपति व अधिकारियों से अभद्रता नहीं होती थी। वह कहते हैं, इसका दूसरा पहलू संवादहीनता और तानाशाही है। यह घटना अचानक नहीं है बल्कि कई महीनों से बन रहे माहौल का परिणाम भी है।

इसे भी पढ़ें: कैंट थाने के सामने सड़क जाम की कोशिश, पुलिस ने हटाया; धरने पर बैठ गए थे ABVP कार्यकर्ता

छात्रसंघ चुनाव न कराने से भी सभी गुटों में थी नाराजगी
विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव न कराने से भी सभी छात्र संगठनों में नाराजगी रही है। सभी छात्र संगठनों और छात्रनेताओं हंगामा भी किया। तालाबंदी से लेकर प्रदर्शन तक किए गए। कुलपति द्वारा छात्रों से कम संवाद करना भी नाराजगी की बड़ी वजह बताई जा रही है।

गोरखपुर पूर्व कुलपति प्रो. आरके मिश्रा ने कहा कि विश्वविद्यालय की घटना की वीडियो देखा हूं। बहुत ही कष्ट हुआ। गुरु-शिष्य के रिश्तों का कत्ल आज कैसे हो रहा है, इसे देखकर महसूस हुआ। जो पार्टी सत्ता में है, उसके आनुषंगिक संगठन ऐसा करें तो बहुत ही निंदनीय है। इसका सीधा अर्थ है कि हम पॉवर में है तो हर व्यक्ति हमारी सुने। इसी मानसिकता से संगठन काम कर रहे हैं। हमारे समय भी बवाल होते थे पर इस तरह नहीं। यह तो जैसे पेशेवर लोग हों। सरकार को इस पर कड़ा रुख अपनाना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: ABVP का जमकर बवाल, कुलपति से हाथापाई, कुलसचिव और दरोगा को पीटा

गोरखपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रो. चितरंजन सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय के इतिहास में यह घटना बहुत ही दुखद और निंदनीय है। लोकतांत्रिक मर्यादाओं का इस तरह हनन में मैंने पहले कभी नहीं देखा। लेकिन इस माहौल के लिए सिर्फ छात्र ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि कुलपति ने भी इसे हवा दी है। एक अध्यापक पर प्राणघातक हमला हुआ है। विश्वविद्यालय अराजकता का अड्डा बन गया है। मेरी मांग है कि राज्य सरकार इसकी उच्चस्तरीय जांच कराए और जो भी जिम्मेदार हो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed