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Gorakhpur News: वीजा पर बीती जवानी, 70 की उम्र में बनेंगे हिंदुस्तानी, जानिए किस देश के थे?
Wed, 17 Apr 2024 05:43 PM IST
रोहित सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Wed, 17 Apr 2024 05:43 PM IST
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CAA( सांकेतिक फोटो)
- फोटो : Amar Ujala
गोरखपुर में वीजा पर बीती जवानी, 70 की उम्र में बनेंगे हिंदुस्तानी। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू होने के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश से गोरखपुर भागकर आए तीन लोग अब भारतीय कहलाएंगे। यह लोग जब भारत आए थे, तब इनकी उम्र 25 से 30 वर्ष थी।
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इसमें कोई 52 साल तो एक भाई-बहन 41 वर्ष से वीजा पर यहां रह रहे थे। हर साल सरकारी कर्मचारी इनके घर जाकर वीजा नवीनीकरण करते थे। अब भारतीय होने की आस जगी है।
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विदेशी पंजीकरण अधिकारी कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि तीनों को उनके घर जाकर इसकी लिखित और मौखिक तौर पर जानकारी दे गई है। भारतीय नागरिकता ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करते ही नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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पाकिस्तान से भागकर अटारी चेक पोस्ट से होकर रमा पाठक और बसंत कुमार पाठक भारत में दाखिल हुए। मूल रूप से पीपीगंज के रहने वाले रामनरेश रोजगार के सिलसिले में पाकिस्तान गए थे और बंटवारे के बाद भी वह वहीं रह गए थे। बाद में जब वहां के हालात खराब होने लगे तो उनकी बेटी रमा पहले आई और उसके बाद भाई बसंत आया। रमा की पीपीगंज के सोनरा गांव में योगेन्द्र पाठक से शादी हो गई। बसंत भी बहन के साथ ही रहने लगे।
सिकरीगंज के धोबौली गांव निवासी राजमन की पत्नी भागीरथी देवी करीब 53 साल पहले बांग्लादेश से भागकर भारत आई थीं। भागीरथी देवी बांग्लादेश के बद्दीपुर की रहने वाली थीं। राजमन वहां कोशी नदी के बालू घाट पर नाव चलाते थे। पिता ने राजमन से उनकी शादी कर दी थी।
भारतीय नागरिक नहीं बन पाए गणेश प्रसाद
बड़हलगंज के ओझौली गांव के गणेश प्रसाद भी बांग्लादेश से भारत आए थे, लेकिन दो साल पहले उनका निधन हो गया वह नागरिक नहीं बन पाए। गणेश प्रसाद को भी सीएए लागू होने का बेसब्री से इंतजार था।