Exclusive: गोरखपुर में साफ हवा को तरस रहे शहरवासी, यहां की आबोहवा है जहरीली
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि हवा प्रदूषित होने से सबसे ज्यादा दिक्कत सांस के मरीजों को होती है। सामान्य लोगों को भी एलर्जी, खरास, सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है। मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीजों की समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। इसकी वजह यह है कि ऐसे मरीजों की इम्युनिटी कमजोर होती है।
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विस्तार
गोरखपुर शहर के प्रमुख स्थल गोलघर के अलावा औद्योगिक क्षेत्र गीडा की हवा स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से काफी खतरनाक हो चुकी है। नये साल की शुरुआत से ही इन इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। रिहायशी इलाकों की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के आसपास की हवा भी सेहत के लिए अच्छी नहीं है।
गोलघर और गीडा इलाके में पीएम-10 यानी पार्टीकुलेट मैटर (हवा में धूल का कण ) की मात्रा 300 के आसपास दर्ज की जा रही है। इस स्थिति को स्वास्थ्य के लिहाज से काफी खराब माना जाता है। हवा में इतना प्रदूषण होने से आंखों में जलन के अलावा सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। बच्चों की सेहत पर भी गंभीर असर पड़ता है। फेफड़ा सिकुड़ जाता है।
एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) मानक
0-50- अच्छा
51-100- संतोषजनक
101-200- थोड़ा खराब
201-300- खराब
301-400- अत्यंत खराब
401-500- गंभीर
(प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार)
आवासीय जोन एमएमएमयूटी के आसपास की स्थिति
| तारीख | पीएम-10 | एसओ-2 | एनओ-2 | एक्यूआई |
| 16 जनवरी | 131.24 | 1.82 | 5.85 | 121 |
| 26 जनवरी | 123.46 | 1.97 | 7.13 | 116 |
| 2 फरवरी | 85.9 | 1.59 | 5.87 | 85 |
| 6 फरवरी | 114.37 | 1.63 | 6.02 | 110 |
| 8 फरवरी | 119.51 | 1.84 | 6.97 | 113 |
औद्योगिक जोन गीडा में स्थिति चिंताजनक
| तारीख | पीएम-10 | एसओ-2 | एनओ-2 | एक्यूआई |
| 16 जनवरी | 352.18 | 34.57 | 48.67 | 303 |
| 26 जनवरी | 346.34 | 35.37 | 50.79 | 296 |
| 2 फरवरी | 350.76 | 38.15 | 53.98 | 301 |
| 6 फरवरी | 343.51 | 36.51 | 54.16 | 294 |
| 8 फरवरी | 347.98 | 34.18 | 52.18 | 298 |
व्यावसायिक जोन जलकल भवन, गोलघर में भी हालात खराब
| तारीख | पीएम-10 | एसओ-2 | एनओ-2 | एक्यूआई |
| 16 जनवरी | 324.13 | 8.05 | 20.76 | 274 |
| 26 जनवरी | 318.19 | 7.71 | 20.58 | 268 |
| 2 फरवरी | 318.45 | 7.59 | 21.68 | 268 |
| 6 फरवरी | 324.18 | 7.54 | 23.9 | 274 |
| 8 फरवरी | 321.34 | 7.28 | 22.13 | 271 |
नहीं होता है पानी का छिड़काव
शहर में चल रहे किसी भी प्रकार के निर्माण कार्यों को ढंककर करने या धूल न उड़े, इसके लिए पानी के छिड़काव की व्यवस्था की गई है। मगर, जिम्मेदारों की उदासीनता से इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। यही वजह है कि हवा में पार्टिकुलेट मैटर की संख्या अधिक हो जाती है।
सिर्फ तीन स्थानों पर ही लगा यंत्र
हवा के प्रदूषण के बारे में शहर के लोगों को सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। इसकी वजह यह है कि आवासीय से लेकर औद्योगिक क्षेत्र तक में सिर्फ तीन स्थानों पर ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग, हवा की गुणवत्ता मापने का यंत्र लगा पाया है। शहर के तमाम धूल वाले इलाकों में हवा की सेहत की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। इस वजह से हवा के प्रदूषण को रोकने के संबंध में समुचित उपाय भी नहीं हो पा रहे हैं।
वायु प्रदूषण से कौन से अंग होते हैं प्रभावित
वायु प्रदूषण से शरीर का लगभग हर अंग प्रभावित हो सकता है। अपने छोटे आकार के कारण, कुछ वायु प्रदूषक फेफड़ों के माध्यम से रक्तप्रवाह में प्रवेश करने में सक्षम होते हैं और पूरे शरीर में फैल जाते हैं, जिससे प्रणालीगत सूजन और कैरिसीनिजेनिसिटी हो जाती है। वायु प्रदूषण के संपर्क में आने वाले विशिष्ट रोग परिणामों में स्ट्रोक, इस्केमिक हृदय रोग, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, फेफड़े का कैंसर, निमोनिया और मोतियाबिंद (केवल घरेलू वायु प्रदूषण) शामिल हैं।
ऐसे करें बचाव
अपना स्थानीय एक्यूआई या पीएम-10 को चेक करते रहें। अगर वातावरण में इनकी मात्रा अधिक है तो घर से बाहर न जाएं। प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर अपने घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें। अगर आपको बाहर जाना है तो कम से कम तीन लेयर वाला सर्जिकल या एन 95 मास्क पहनें। कार से कहीं बाहर जा रहे हैं तो खिड़की के शीशे बंद रखें। स्मोकिंग और धुएं से बचें, खूब सारा पानी पिएं, सब्जियों और फलों का अच्छी मात्रा में सेवन करें। अगर आप सांस के मरीज हैं, तो आपको अपनी दवाओं को लेकर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें, खासकर अगर सांस की बीमारियों से पीड़ित मरीज हैं तो ये जरूरी है।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि हवा प्रदूषित होने से सबसे ज्यादा दिक्कत सांस के मरीजों को होती है। सामान्य लोगों को भी एलर्जी, खरास, सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है। मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीजों की समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। इसकी वजह यह है कि ऐसे मरीजों की इम्युनिटी कमजोर होती है। ऐसे में जिन इलाकों में ज्यादा प्रदूषण है, वहां लोगों को मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए।