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Gorakhpur News: गर्भ संस्कार पर एम्स करेगा शोध, दो समूहों में गर्भवतियों को बांटा जाएगा
Thu, 07 May 2026 01:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 07 May 2026 01:39 AM IST
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गोरखपुर। एम्स गर्भवती महिलाओं पर शोध करेगा। ये शोध गर्भ के दो संस्कारों, प्रीटनल केयर और गर्भ संस्कारों पर होगा। इस शोध में आधार पर एम्स की टीम जानने का प्रयास करेगी कि दोनों प्रक्रियाओं में गुजरने वाली गर्भवतियों के गर्भ में पल रहे शिशु पर क्या प्रभाव पड़ेगा। ये शोध दोनों वर्ग की गर्भवती महिलाओं के ब्लड शुगर, बीपी, स्ट्रेस (तनाव) के आधार पर किया जाएगा।
एम्स शोध में महायोगी गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय की मदद भी लेगा। एम्स की मीडिया सेल की चेयरपर्सन व स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि आयुर्वेद के गर्भ संस्कार को एलोपैथ की भाषा में प्रीनेटल केयर कहते हैं। इसमें पोषण, डॉक्टरी जांच, विटामिन की खुराक और तनाव-मुक्त रहने की सलाह दी जाती है।
इसके अलावा एलोपैथ में इस धारणा के तहत काम किया जाता है कि गर्भ में शिशु बाहरी आवाजों, भावनाओं और संगीत पर प्रतिक्रिया करता है या नहीं। अगर ऐसा नहीं है तो कई तरह की जांचें समय-समय पर कराई जाती है। इन्हीं दोनों को आधार मानकर शोध का फैसला लिया गया है। इसके तहत गर्भवतियों को दो समूहों में बांटा जाएगा। एक समूह को गर्भ संस्कार क्रिया के तहत ट्रीट किया जाएगा और दूसरे समूह का प्रीनेटल केयर के तहत इलाज होगा।
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एम्स शोध में महायोगी गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय की मदद भी लेगा। एम्स की मीडिया सेल की चेयरपर्सन व स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि आयुर्वेद के गर्भ संस्कार को एलोपैथ की भाषा में प्रीनेटल केयर कहते हैं। इसमें पोषण, डॉक्टरी जांच, विटामिन की खुराक और तनाव-मुक्त रहने की सलाह दी जाती है।
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इसके अलावा एलोपैथ में इस धारणा के तहत काम किया जाता है कि गर्भ में शिशु बाहरी आवाजों, भावनाओं और संगीत पर प्रतिक्रिया करता है या नहीं। अगर ऐसा नहीं है तो कई तरह की जांचें समय-समय पर कराई जाती है। इन्हीं दोनों को आधार मानकर शोध का फैसला लिया गया है। इसके तहत गर्भवतियों को दो समूहों में बांटा जाएगा। एक समूह को गर्भ संस्कार क्रिया के तहत ट्रीट किया जाएगा और दूसरे समूह का प्रीनेटल केयर के तहत इलाज होगा।
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