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गोरखपुर एम्स : अब AI तकनीक से डिजिटल डाटा बेस होगा तैयार...ट्रैक की जाएगी त्वचा की बीमारी
Sun, 04 Jan 2026 01:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jan 2026 01:53 AM IST
सार
एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ विभा दत्ता ने बताया कि संस्थान एआई तकनीक की मदद से त्वचा रोगों की सटीक पहचान और निदान करने की दिशा में काम कर रहा है। इसमें विटिलिगो (सफेद दाग) के अलावा ल्यूकोडर्मा, सोरायसिस, फंगल इंफेक्शन और लैप्रोसी (कुष्ठ रोग) जैसी अन्य बीमारियों को भी डेटा एनालिसिस के जरिये समझा जाएगा।
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एम्स की कार्यकारी निदेशक विभा दत्ता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
एम्स एआई तकनीक का उपयोग अब त्वचा रोगों की पहचान और इलाज को प्रभावी बनाने में करेगा। इसके सहयोग से मरीजों को सटीक दवा देना आसान हो जाएगा। त्वचा विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित डिजिटल सिस्टम तैयार करने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है।
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एम्स में प्रतिदिन 20 से 25 मरीज विटिलिगो (सफेद दाग) का इलाज कराने के लिए आते हैं। हर सप्ताह चार से पांच मरीजों की सर्जरी भी की जा रही है। कई बार विटिलिगो बीमारी की सटीक पहचान मुश्किल हो जाती है। एम्स अब एआई तकनीक से मरीजों का एक डिजिटल डाटा बेस तैयार कर रहा है, जिसमें यह ट्रैक किया जाएगा कि किस मरीज को कौन सी त्वचा की बीमारी है।
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मरीज को कौन सी दवाएं दी गईं और उनका कितना असर पड़ा। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन सी दवा किस स्थिति में कारगर है। इससे आगे चलकर रोग आधारित दवा चयन प्रणाली तैयार की जा सकेगी जो हर मरीज को व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार इलाज उपलब्ध कराएगी।
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आज भी है कई भ्रांतियां
विटिलिगो को लेकर आज भी समाज में कई भ्रांतियां मौजूद हैं। लोग इसे छुआछूत मानते हैं। इससे प्रभावित युवाओं की शादी में भी रुकावट आती हैं। कई परिवार इससे मानसिक रूप से टूट जाते हैं, जबकि यह एक अनुवांशिक या ऑटोइम्यून रोग है। इसका छूने या सामाजिक अभिशाप से कोई संबंध नहीं है।
त्वचा रोगों को लेकर समाज में भ्रम और मानसिक तनाव की स्थिति आज भी बनी हुई है। विशेषकर विटिलिगो को लेकर शादी-विवाह जैसे सामाजिक पहलुओं में भेदभाव देखने को मिलता है। हम चाहते हैं कि विज्ञान और सहानुभूति के साथ-साथ हम इस सोच को बदलें। एआई तकनीक हमें न केवल बीमारी का बेहतर विश्लेषण देती है बल्कि दवा का चयन भी अधिक वैज्ञानिक तरीके से संभव बनाती है: डॉ. सुनील कुमार गुप्ता, विभागाध्यक्ष, त्वचा विभाग, एम्स
संस्थान एआई तकनीक की मदद से त्वचा रोगों की सटीक पहचान और निदान करने की दिशा में काम कर रहा है। इसमें विटिलिगो (सफेद दाग) के अलावा ल्यूकोडर्मा, सोरायसिस, फंगल इंफेक्शन और लैप्रोसी (कुष्ठ रोग) जैसी अन्य बीमारियों को भी डेटा एनालिसिस के जरिये समझा जाएगा: डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स