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Gorakhpur News: गोष्ठी के माध्यम से कृषिमंत्री ने जानी किसानों की समस्याएं
Sun, 23 Jun 2024 01:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 23 Jun 2024 01:33 AM IST
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शनिवार को एनेक्सी भवन सभागार में मंडलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी का आयोजन कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही की अध्यक्षता में किया गया। गोष्ठी में गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल के कृषि एवं पशुपालन, उद्यान, विद्युत, सिचांई एवं अन्य विभागों के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में कृषक सम्मिलित हुए। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के सुझाव दिए। धान में अधिकतम उत्पादकता प्राप्त करने के लिए धान की नई किस्मों, खरपतवार नाशकों, कीटनाशकों तथा नई कृषि पद्धति के बारे में जानकारी दी गई। कृषि मंत्री ने कहा कि गोष्ठी का उद्देश्य कृषि की उपलब्धियों को बताने के साथ ही कृषि के क्षेत्र में आ रही समस्याओं से अवगत होना है।
किसानों ने गोष्ठी में रखी अपनी बात
महाराजगंज से आए किसान वीरेंद्र चौरसिया ने एफपीओ से संबंधित मुद्दा उठाया। देवरिया से आए किसान रमेश सिंह ने मृदा परीक्षण में सूक्ष्म तत्वों की जांच नहीं करने की समस्या को उठाया तो बस्ती के राजेंद्र प्रसाद ने जंगली पशुओं से फसलों के नष्ट होने की समस्या को मंत्री के समक्ष रखा। इसी प्रकार देवरिया से आए एक किसान ने किसान क्रेडिट कार्ड से संबंधित समस्या को मंत्री के समक्ष रखा तो बलिया से आए एक किसान ने प्राकृतिक खेती के लिए और भी सुविधा देने की मांग की।
गोष्ठी का उद्देश्य किसानों की समस्याओं काे जानना
कृषि मंत्री ने कहा कि पिछली गोष्ठियों में प्राप्त किसानों के सुझाव के अनुसार काम किये गये हैं। आज प्रदेश चावल उत्पादकता में राष्ट्रीय औसत उत्पादकता के करीब पहुंच चुका है। इसे सामूहिक प्रयास से और आगे ले जाना है। उन्होंने किसानों से कहा कि वे कृषि के साथ बागवानी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन में भी ध्यान दें। गन्ना किसानों को समय पर भुगतान, बंजर भूमि विकास हेतु जिप्सम का वितरण, एफपीओ को कृषि यंत्रों पर अनुदान, एमएसपी में निरन्तर वृद्धि आदि प्रयासों के माध्यम से सरकार कृषि विकास एवं किसान कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। किसानों से ढैचा की खेती करने का आह्वान करते हुए कृषि मंत्री जी ने कहा कि यह अत्यंत कम लागत वाली कृषि है जो आय के साथ भूमि के स्वास्थ्य को भी उत्तम बनायेगी।
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सूक्ष्म सिंचाई पद्धति अपनाएं किसान: मनोज कुमार
इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने कहा कि कृषक गण उत्पादन बढ़ाने के लिए समतल भूमि पर रेखीय बुआई करें। सूक्ष्म सिचांई पद्धति यथा स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सिंचाई विधि अपनाएं। अपर मुख्य सचिव देवेश चतुर्वेदी ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश में बीज एवं खाद की कमी नहीं है। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं पर बारीकी से नजर रखें तथा किसानों को परेशान करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों को कठोरतम दण्ड देने की संस्तुति शासन से अवश्य करें।
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किसानों ने गोष्ठी में रखी अपनी बात
महाराजगंज से आए किसान वीरेंद्र चौरसिया ने एफपीओ से संबंधित मुद्दा उठाया। देवरिया से आए किसान रमेश सिंह ने मृदा परीक्षण में सूक्ष्म तत्वों की जांच नहीं करने की समस्या को उठाया तो बस्ती के राजेंद्र प्रसाद ने जंगली पशुओं से फसलों के नष्ट होने की समस्या को मंत्री के समक्ष रखा। इसी प्रकार देवरिया से आए एक किसान ने किसान क्रेडिट कार्ड से संबंधित समस्या को मंत्री के समक्ष रखा तो बलिया से आए एक किसान ने प्राकृतिक खेती के लिए और भी सुविधा देने की मांग की।
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गोष्ठी का उद्देश्य किसानों की समस्याओं काे जानना
कृषि मंत्री ने कहा कि पिछली गोष्ठियों में प्राप्त किसानों के सुझाव के अनुसार काम किये गये हैं। आज प्रदेश चावल उत्पादकता में राष्ट्रीय औसत उत्पादकता के करीब पहुंच चुका है। इसे सामूहिक प्रयास से और आगे ले जाना है। उन्होंने किसानों से कहा कि वे कृषि के साथ बागवानी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन में भी ध्यान दें। गन्ना किसानों को समय पर भुगतान, बंजर भूमि विकास हेतु जिप्सम का वितरण, एफपीओ को कृषि यंत्रों पर अनुदान, एमएसपी में निरन्तर वृद्धि आदि प्रयासों के माध्यम से सरकार कृषि विकास एवं किसान कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। किसानों से ढैचा की खेती करने का आह्वान करते हुए कृषि मंत्री जी ने कहा कि यह अत्यंत कम लागत वाली कृषि है जो आय के साथ भूमि के स्वास्थ्य को भी उत्तम बनायेगी।
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सूक्ष्म सिंचाई पद्धति अपनाएं किसान: मनोज कुमार
इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने कहा कि कृषक गण उत्पादन बढ़ाने के लिए समतल भूमि पर रेखीय बुआई करें। सूक्ष्म सिचांई पद्धति यथा स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सिंचाई विधि अपनाएं। अपर मुख्य सचिव देवेश चतुर्वेदी ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश में बीज एवं खाद की कमी नहीं है। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं पर बारीकी से नजर रखें तथा किसानों को परेशान करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों को कठोरतम दण्ड देने की संस्तुति शासन से अवश्य करें।