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पत्नी की मौत के सदमे में चली गई पति की भी जान, एक चिता पर दंपती का दाह संस्कार
Fri, 03 Jan 2020 10:32 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Fri, 03 Jan 2020 10:32 PM IST
सार
- साठ साल साथ जिए, साथ ही दुनिया छोड़ गए
- नंदानगर में पत्नी की मौत के सदमे में गई पति की भी जान
- एक चिता पर बुजुर्ग दंपती के शवों का हुआ दाह संस्कार
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हरिराम चौधरी और उनकी पत्नी रेशमा चौधरी (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नंदानगर के गोकुलपुरम में पत्नी की मौत का सदमा न सह पाने वाले पति ने भी दम तोड़ दिया। एक साथ बुजुर्ग दंपती की अर्थियां उठीं, जिसे देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। राजघाट में एक ही चिता पर दोनों शवों का दाह संस्कार किया गया।
हरिराम चौधरी (85) और उनकी पत्नी रेशमा चौधरी (83) नंदानगर के गोकुलपुर में रहते थे। उनके दो पुत्र हैं। सभी की शादी हो चुकी है। परिवार और पड़ोस के लोगों ने बताया कि हरिराम और उनकी पत्नी के दाम्पत्य जीवन की लोग मिसाल देते थे। साठ साल से दंपती साथ थे। दोनों लोग अक्सर लोगों से कहते थे कि अगर उनकी मौत एक साथ हो जाए तो उनकी अर्थियां साथ उठाकर एक ही चिता पर दाह संस्कार किया जाए।
हरिराम चौधरी सेना से इंजीनियरिंग सर्विसेज से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके पुत्र विजय चौधरी और विनय चौधरी नंदानगर में ही व्यापारी हैं। परिजनों के मुताबिक बुधवार को दिन में रेशमा देवी की तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने उनको घर ले जाकर सेवा करने की सलाह दी। बृहस्पतिवार की सुबह पांच बजे रेशमा देवी की मौत हो गई। उसके एक घंटा बाद ही हरेराम चौधरी की भी सांसें थम गईं।
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हरिराम चौधरी (85) और उनकी पत्नी रेशमा चौधरी (83) नंदानगर के गोकुलपुर में रहते थे। उनके दो पुत्र हैं। सभी की शादी हो चुकी है। परिवार और पड़ोस के लोगों ने बताया कि हरिराम और उनकी पत्नी के दाम्पत्य जीवन की लोग मिसाल देते थे। साठ साल से दंपती साथ थे। दोनों लोग अक्सर लोगों से कहते थे कि अगर उनकी मौत एक साथ हो जाए तो उनकी अर्थियां साथ उठाकर एक ही चिता पर दाह संस्कार किया जाए।
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हरिराम चौधरी सेना से इंजीनियरिंग सर्विसेज से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके पुत्र विजय चौधरी और विनय चौधरी नंदानगर में ही व्यापारी हैं। परिजनों के मुताबिक बुधवार को दिन में रेशमा देवी की तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने उनको घर ले जाकर सेवा करने की सलाह दी। बृहस्पतिवार की सुबह पांच बजे रेशमा देवी की मौत हो गई। उसके एक घंटा बाद ही हरेराम चौधरी की भी सांसें थम गईं।
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