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Gorakhpur News: एनआईए की एंट्री के बाद ब्रिटिश मौलाना पर यूएपीए का शिकंजा कसने की तैयारी
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संतकबीरनगर। ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान पर कानूनी शिकंजा और कसता जा रहा है। सरकारी राजस्व का गबन व संपत्ति से जुड़े कई मामलों की जांच सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं। एनआईए की जांच शुरू होने के बाद शमशुल के खिलाफ अनलाॅफुल एक्टीविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (यूएपीए) के तहत कार्रवाई का अनुमान जताया जा रहा है।
दूसरी ओर सोशल मीडिया पर मौलाना की पत्नी के वायरल वीडियो के मुताबिक ईडी को उसके घर से कुछ नहीं मिला है, जबकि ईडी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कई बैंकों में लगभग 5 करोड़ रुपये एवं 17 अचल संपत्तियों के अधिग्रहण से संबंधित विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और अभिलेख बरामद करने और जब्त करने की जानकारी दी थी। इन संपत्तियों का घोषित खरीद मूल्य लगभग 3 करोड़ रुपये और इनका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 20 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया। एनआईए की जांच टीम ने कई विभागाध्यक्षों से मिलकर मौलाना मामले में जानकारी लेकर काफी महत्वपूर्ण अभिलेख अपने कस्टडी में लिया है।
दुधारा थाना क्षेत्र के देवरिया लाला गांव के मूल निवासी मौलाना शमशुल हुदा खान ने आजमगढ़ जनपद के मुबारकपुर स्थित मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया में सहायक अध्यापक के रूप में सेवा देने के दौरान ही वर्ष 2013 में ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली। इसके बाद भी सरकार से वेतन लेता रहा। इस दौरान उसने कई देशों की यात्रा की। खलीलाबाद शहर के मोतीनगर मोहल्ला में आलीशान मदरसा भी खड़ा कर लिया। साथ ही अपने व परिवार के नाम से कई संपत्तियां खरीदीं। शिकायत होने के बाद एटीएस की जांच पूरी होने के बाद मौलाना के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आई।
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जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की तहरीर पर कोतवाली खलीलाबाद में फेमा के तहत प्राथमिकी दर्ज है, जिसकी विवेचना स्थानीय पुलिस कर रही है। इसी बीच ईडी और फिर एनआईए की टीम ने भी जिले में पहुंचकर जांच की।
क्या है यूएपीए
अनलाॅफुल एक्टीविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (यूएपीए) का मकसद गैर कानूनी गतिविधियों और आतंकवाद को रोकना है। अगर कोई सरकार के साथ फ्राड करता है, गैर कानूनी जमीन, विदेशी फंड हासिल करता है और पाकिस्तानी संगठन के साथ संबंध रखता है तो वह यूएपीए के तहत आएगा। पाकिस्तानी संगठनों के साथ संबंध आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होना साबित होता है तो संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा माना जाता है।
13 साल के भीतर बनाई अकूत संपत्ति
वर्ष 2013 में ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने के बाद मौलाना शमशुल हुदा खान ने अकूत संपत्ति बनाई। उसी वर्ष नवंबर एवं सितंबर माह में उसने दो एनजीओ का पंजीकरण कराकर प्रबंध कमेटी के ओहदेदाराें में खुद सरपरस्त बनकर उसमें अपने ही सगे संबंधिधियों को शामिल कर लिया। इसके बाद पाकिस्तान समेत अन्य कई देशों की यात्रा करके दोहरी नागरिकता के बाद भी बिना सरकार की अनुमति के अपने नाम से जमीन खरीदी। साथ ही परिवार के कई लोगों के नाम पर संपत्ति बनाई। वर्ष 2017 में कक्षा एक से 10 तक की स्थायी मान्यता रजिष्ट्रार मदरसा शिक्षा परिषद के यहां से प्राप्त करके मदरसे का संचालन शुरू कर दिया। फरवरी 2024 में डीएम कोर्ट का आदेश आने के बाद धीरे-धीरे मौलाना पर कानूनी शिकंजा कसता गया और अब देश की दो महत्वपूर्ण जांच एजेंसियों ने मौलाना की जांच तेज कर दी है।
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दूसरी ओर सोशल मीडिया पर मौलाना की पत्नी के वायरल वीडियो के मुताबिक ईडी को उसके घर से कुछ नहीं मिला है, जबकि ईडी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कई बैंकों में लगभग 5 करोड़ रुपये एवं 17 अचल संपत्तियों के अधिग्रहण से संबंधित विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और अभिलेख बरामद करने और जब्त करने की जानकारी दी थी। इन संपत्तियों का घोषित खरीद मूल्य लगभग 3 करोड़ रुपये और इनका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 20 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया। एनआईए की जांच टीम ने कई विभागाध्यक्षों से मिलकर मौलाना मामले में जानकारी लेकर काफी महत्वपूर्ण अभिलेख अपने कस्टडी में लिया है।
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दुधारा थाना क्षेत्र के देवरिया लाला गांव के मूल निवासी मौलाना शमशुल हुदा खान ने आजमगढ़ जनपद के मुबारकपुर स्थित मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया में सहायक अध्यापक के रूप में सेवा देने के दौरान ही वर्ष 2013 में ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली। इसके बाद भी सरकार से वेतन लेता रहा। इस दौरान उसने कई देशों की यात्रा की। खलीलाबाद शहर के मोतीनगर मोहल्ला में आलीशान मदरसा भी खड़ा कर लिया। साथ ही अपने व परिवार के नाम से कई संपत्तियां खरीदीं। शिकायत होने के बाद एटीएस की जांच पूरी होने के बाद मौलाना के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आई।
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जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की तहरीर पर कोतवाली खलीलाबाद में फेमा के तहत प्राथमिकी दर्ज है, जिसकी विवेचना स्थानीय पुलिस कर रही है। इसी बीच ईडी और फिर एनआईए की टीम ने भी जिले में पहुंचकर जांच की।
क्या है यूएपीए
अनलाॅफुल एक्टीविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (यूएपीए) का मकसद गैर कानूनी गतिविधियों और आतंकवाद को रोकना है। अगर कोई सरकार के साथ फ्राड करता है, गैर कानूनी जमीन, विदेशी फंड हासिल करता है और पाकिस्तानी संगठन के साथ संबंध रखता है तो वह यूएपीए के तहत आएगा। पाकिस्तानी संगठनों के साथ संबंध आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होना साबित होता है तो संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा माना जाता है।
13 साल के भीतर बनाई अकूत संपत्ति
वर्ष 2013 में ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने के बाद मौलाना शमशुल हुदा खान ने अकूत संपत्ति बनाई। उसी वर्ष नवंबर एवं सितंबर माह में उसने दो एनजीओ का पंजीकरण कराकर प्रबंध कमेटी के ओहदेदाराें में खुद सरपरस्त बनकर उसमें अपने ही सगे संबंधिधियों को शामिल कर लिया। इसके बाद पाकिस्तान समेत अन्य कई देशों की यात्रा करके दोहरी नागरिकता के बाद भी बिना सरकार की अनुमति के अपने नाम से जमीन खरीदी। साथ ही परिवार के कई लोगों के नाम पर संपत्ति बनाई। वर्ष 2017 में कक्षा एक से 10 तक की स्थायी मान्यता रजिष्ट्रार मदरसा शिक्षा परिषद के यहां से प्राप्त करके मदरसे का संचालन शुरू कर दिया। फरवरी 2024 में डीएम कोर्ट का आदेश आने के बाद धीरे-धीरे मौलाना पर कानूनी शिकंजा कसता गया और अब देश की दो महत्वपूर्ण जांच एजेंसियों ने मौलाना की जांच तेज कर दी है।