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Gorakhpur News: जेई के बाद अब एईएस में भी मृत्यु दर महज 0.3 प्रतिशत

Thu, 28 Sep 2023 02:07 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 28 Sep 2023 02:07 AM IST
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After JE, now the death rate in AES is only 0.3 percent
गोरखपुर। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) गोरखपुर में जेई-एईएस के इलाज के लिए एलाइजा (एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोसॉरबेंट असे) तकनीक का दो दिवसीय प्रशिक्षण बुधवार को संपन्न हुआ। बताया गया कि एईएस के मामले में मृत्यु दर अब मात्र 0.3 प्रतिशत ही है।
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दो दिन के इस प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत एडी हेल्थ डॉ. आईवी विश्वकर्मा और समापन एडी हेल्थ डॉ. नीरज पांडेय ने किया। प्रशिक्षण के दौरान, लैब तकनीशियनों को जेई-एईएस की जांच के लिए एलाइजा तकनीक की जानकारी दी गई।
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बताया गया कि जेई-एईएस के मामलों में वर्ष 2017 से 2023 के बीच काफी कमी आई है। एईएस के मामलों में मृत्यु दर घटकर 0.3 प्रतिशत रह गई है। इंसेफेलाइटिस उपचार केंद्र में उच्च ग्रेड के बुखार के मामलों का भी निदान किया जा रहा है। तीनों मंडलों के मुख्यालय प्रयोगशाला में सभी आवश्यक जांच उपलब्ध हैं।
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डॉ. राजीव सिंह (वैज्ञानिक सी) ने इस प्रशिक्षण के दौरान नमूने के संग्रहण की प्रक्रिया और उनके परिवहन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। प्रशिक्षण में बताया गया कि नमूने के संग्रहण में सही तरीका और स्थानीय गाइडलाइंस का पालन करना महत्वपूर्ण है। लैब तकनीशियनों ने नमूने के संग्रहण के दौरान आने वाली कठिनाइयों के बारे में भी चर्चा की। ए
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि जांच प्रक्रिया में एंटीजन और एंटीबॉडी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यह प्रक्रिया एंटीजन-एंटीबॉडी के विशिष्ट परिसंख्या के आधार पर काम करती है। एलाइसा किट में उपयोग होने वाले रीएजेंट के बारे में विस्तार से चर्चा की गई।

डाॅ. गौरव ने एलाइसा रीडर वॉशर व मशीन के फंक्शन के बारे में समझाया। डाॅ. अमरेश सिंह ने एईस के कारकों में विभिन्न बैक्टीरिया एन मेनिनजाइटिस, स्ट्रेप्टोकोकोस न्यूमोनिया व एमटीबी के बारे समझाते हुए वायरस व बैक्टीरिया द्वारा एईएस के अंतर को समझाया।प्रशिक्षुओं को सर्टिफिकेट भी दिया गया। संचालन डाॅ. पूजा भारद्वाज ने किया। डाॅ. राजीव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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