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Janmashtami: 30 वर्ष बाद पुण्यदायी जयंती योग में मनेगी जन्माष्टमी, पाप से मुक्ति, पुण्य में होगी वृद्धि

Sat, 02 Sep 2023 04:47 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 02 Sep 2023 04:47 PM IST
सार

पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के समय अर्ध रात्रि में हुआ था। इस वर्ष अष्टमी, बुधवार और रोहिणी नक्षत्र का योग होने से जयंती नामक योग बन रहा है, जो महा पुण्यदायक माना गया है।

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After 30 years Janmashtami will be celebrated in virtuous Jayanti Yoga
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी छह सितंबर को मनाई जाएगी। इस बार का पर्व श्रद्धालुओं के लिए खास होने वाला है। 30 वर्ष बाद इस बार जन्माष्टमी पर अत्यंत पुण्यदायी जयंती योग बन रहा है। इस योग में पूजन-अर्चन से श्रद्धालुओं को पापों से मुक्ति मिलेगी, वहीं पुण्य में वृद्धि होगी।

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वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण सप्तमी तिथि का मान शाम सात बजकर 58 मिनट तक पश्चात अष्टमी है। इस दिन कृत्तिका नक्षत्र भी दिन में दो बजकर 39 मिनट तक पश्चात रोहिणी नक्षत्र संपूर्ण रात्रि है। हर्षण योग सुबह चार बजकर 10 मिनट तक, इसके बाद सिद्धि नामक औदायिक योग है।
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पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के समय अर्ध रात्रि में हुआ था। इस वर्ष अष्टमी, बुधवार और रोहिणी नक्षत्र का योग होने से जयंती नामक योग बन रहा है, जो महा पुण्यदायक माना गया है।
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विभिन्न जगहों पर आयोजित होंगी कार्यक्रम

गीता वाटिका, गोपाल मंदिर, जलकल, पुलिस लाइन और जीआरपी के अलावा घरों में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाएगी। मनमोहक झांकियां सजाई जाएंगी। घरों और सार्वजनिक स्थलों पर मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म के बाद ...जय कन्हैया लाल की गूजेगा। प्रसाद वितरण से कार्यक्रम का समापन होगा।

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इस तरह करें व्रत-पूजन
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन प्रात: काल स्नानादि के बाद पूजन-अर्चन कर व्रत का संकल्प लें। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित कर झांकी सजाएं। इसके बाद विधि-विधान से पूजन करें। पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमश: लेना चाहिए। मध्य रात्रि 12 बजे जन्मोत्सव मनाएं। अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करें। दूसरे दिन सुबह स्नानादि पूजन-अर्चन कर ब्राह्मण को दान देकर व्रत का पारण करें।
 

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