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अफगानिस्तान: वतन के हालात से चिंतित हैं यासीन खान, बोले- अल्लाह से यही दुआ है कि वहां खून-खराबा न हो
Wed, 18 Aug 2021 03:04 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 18 Aug 2021 03:04 PM IST
सार
36 वर्षों से गोरखपुर में रह रहे हैं अफगानिस्तान के गजनी में पैदा हुए यासीन।
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अफगानिस्तान में तालिबानी
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
अल्लाह जाने, आबाई वतन (मातृभूमि) के क्या हालात होंगे? वतन पर एक बार फिर तालिबानियों ने कब्जा कर लिया है। बस अल्लाह से यही दुआ है कि वहां खून-खराबा न हो, अमन चैन रहे। यह चिंता अफगानिस्तान से आकर गोरखपुर शहर के दुर्गाबाड़ी इलाके में बसे यासीन खान ने जताई। वह गोरखपुर में बीते 36 वर्ष से रह रहे हैं।
अफगानिस्तान के गजनी शहर में पैदा हुए यासीन खान कहते हैं कि उनकी उम्र दस-बारह वर्ष रही होगी जब पिता ने उन्हें खुद मुख्तार (आत्मनिर्भर) होने की नसीहत देते हुए अलग कर दिया था। तब वह बेचने के लिए मेवे लेकर भारत आए थे और यहीं के होकर रह गए।
शहर के दुर्गाबाड़ी इलाके में साढ़े तीन दशक से रह रहे यासीन कपड़े का कारोबार करते हैं। उन्होंने भारत में ही शादी की और चार बच्चों की परवरिश कर रहे हैं। उर्दू मिश्रित हिंदी में यासीन ने बताया कि जब वह अफगानिस्तान से आए थे तो वतन में अमन था। फिर तालिबान की सरकार बनी और कत्लोगारत (हत्या और हिंसा) की वजह से वतन का अमन-चैन छिन गया। हालांकि, वह लौट कर दोबारा अफगानिस्तान नहीं गए लेकिन वतन में तशद्दुद (हिंसा) की खबरें दुखी करती थीं।
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अमेरिका की मदाखलत (हस्तक्षेप) के बाद वतन एक बार फिर तरक्की की ओर बढ़ रहा था। अब एक बार फिर अमेरिका तालिबान को सत्ता सौंप कर अलग हो गया। जिस तरह की खबरें आ रही हैं वह फिक्र (चिंता) पैदा करने वाली हैं। गजनी में कई रिश्तेदार हैं। अल्लाह पाक उनके साथ सभी को अपनी मेहर और आमान में रखे, यही दुआ है।
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अफगानिस्तान के गजनी शहर में पैदा हुए यासीन खान कहते हैं कि उनकी उम्र दस-बारह वर्ष रही होगी जब पिता ने उन्हें खुद मुख्तार (आत्मनिर्भर) होने की नसीहत देते हुए अलग कर दिया था। तब वह बेचने के लिए मेवे लेकर भारत आए थे और यहीं के होकर रह गए।
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शहर के दुर्गाबाड़ी इलाके में साढ़े तीन दशक से रह रहे यासीन कपड़े का कारोबार करते हैं। उन्होंने भारत में ही शादी की और चार बच्चों की परवरिश कर रहे हैं। उर्दू मिश्रित हिंदी में यासीन ने बताया कि जब वह अफगानिस्तान से आए थे तो वतन में अमन था। फिर तालिबान की सरकार बनी और कत्लोगारत (हत्या और हिंसा) की वजह से वतन का अमन-चैन छिन गया। हालांकि, वह लौट कर दोबारा अफगानिस्तान नहीं गए लेकिन वतन में तशद्दुद (हिंसा) की खबरें दुखी करती थीं।
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अमेरिका की मदाखलत (हस्तक्षेप) के बाद वतन एक बार फिर तरक्की की ओर बढ़ रहा था। अब एक बार फिर अमेरिका तालिबान को सत्ता सौंप कर अलग हो गया। जिस तरह की खबरें आ रही हैं वह फिक्र (चिंता) पैदा करने वाली हैं। गजनी में कई रिश्तेदार हैं। अल्लाह पाक उनके साथ सभी को अपनी मेहर और आमान में रखे, यही दुआ है।