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चालान तो महज बहाना: एंबुलेंस माफिया-नर्सिंग होम गठजोड़ पर कार्रवाई असली निशाना, आज तक नहीं की कार्रवाई
Tue, 11 Jul 2023 01:52 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 11 Jul 2023 01:52 PM IST
सार
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि पुलिस से कुछ लोग उलझ गए थे। पुलिस ने केस दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस टीम लगी है। पुलिस गहराई से पूरे प्रकरण की जांच कर रही है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
आधी रात में चालान को बहाना बनाकर एंबुलेंस माफिया यूं ही नहीं पुलिस से उलझ गए हैं, दरअसल, इसके पीछे एंबुलेंस माफिया और नर्सिंग होम के दलालों के गठजोड़ के खिलाफ पुलिस की सख्ती वजह है। बीती छह मई को एक मरीज को प्राइवेट एंबुलेंस से जबरन नर्सिंग होम भेजे जाने का मामला सामने आया था। तब एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने केस दर्ज कर स्टॉफ नर्स समेत चार लोगों को जेल भिजवाया था। तभी से एंबुलेंस माफिया, पुलिस से खार खाए हैं।
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इस तरह का मामला लगातार सामने आने के बाद भी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होने से एंबुलेंस माफिया की मनबढई और बढ़ गई है। एएसपी मानुष पारिक ने मामले की जांच की थी। रिपोर्ट में गठजोड़ उजागर होने के बाद पुलिस की ओर से स्वास्थ्य महकमे को सूचना दी गई, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हो पाई। इसके बाद से पुलिस अपने स्तर से कार्रवाई कर रही है। पार्किंग में वाहन न होने पर भारी जुर्माना किया जाता है तो दूसरे तरीकों से गठजोड़ तोड़ने की कोशिश की जा रही है। इसी को लेकर एंबुलेंस माफिया और पुलिस में ठनी हुई है।
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जानकारी के मुताबिक, एएसपी की जांच में यह साफ हो चुका है कि मरीजों को प्राइवेट एंबुलेंस के हाथों बेचा जाता है। इस अवैध काम में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी शामिल हैं, जो मरीज के बदले रुपये लेते हैं। वहीं गठजोड़ में शामिल दलाल मरीज को अंदर बेहतर इलाज का झांसा देते हैं तो कभी डिस्चार्ज कराकर प्राइवेट एंबुलेंस की मदद से मरीज को नर्सिंग होम पहुंचा दिया जाता है।
छह मई को ट्रामा सेंटर से बिहार के मनोज यादव को जबरन नर्सिंग होम भेजा जा रहा था। तब सामने आया था कि जिस दीक्षा नर्सिंग होम में मरीज को भेजा रहा था, उसका सीधा संबंध स्टॉफ नर्स मोना चौरसिया से है। पुलिस ने अपने केस में मोना को आरोपी भी बनाया और जेल भी भिजवाया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की जांच अभी पूरी नहीं हो सकी है।
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इसके बाद ही एसएसपी ने पूरे प्रकरण की जांच ट्रेनी आईपीएस एएसपी मानुष पारिक को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही चौकी इंचार्ज व दो सिपाही को चौकी से हटा दिय गया था। उनके खिलाफ आरोप है कि वे भी गठजोड़ में शामिल थे। अब धीरे-धीरे कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है।
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि पुलिस से कुछ लोग उलझ गए थे। पुलिस ने केस दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस टीम लगी है। पुलिस गहराई से पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोई भी बख्शा नहीं जाएगा।
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इसके बाद ही एसएसपी ने पूरे प्रकरण की जांच ट्रेनी आईपीएस एएसपी मानुष पारिक को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही चौकी इंचार्ज व दो सिपाही को चौकी से हटा दिय गया था। उनके खिलाफ आरोप है कि वे भी गठजोड़ में शामिल थे। अब धीरे-धीरे कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है।
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि पुलिस से कुछ लोग उलझ गए थे। पुलिस ने केस दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस टीम लगी है। पुलिस गहराई से पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोई भी बख्शा नहीं जाएगा।