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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कार्रवाई: जमकर हो रहा भूगर्भ जल दोहन...122 होटल व बैंक्वेट हाल को भेजे नोटिस
Wed, 06 Dec 2023 11:35 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 06 Dec 2023 11:35 AM IST
सार
प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, भूगर्भ जल अधिनियम 2019 के तहत कृषि और घरेलू प्रयोग को छोड़कर सभी प्रकार की संस्थाओं को भूगर्भ जल विभाग की ओर से एनओसी लेने का नियम है। ऐसे संचालकों को बोरवेल बंद करके नगर निगम के पानी का इस्तेमाल करना होगा।
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गली-गली में लगा है आरओ प्लांट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
गोरखपुर शहर में जमकर भूगर्भ जल दोहन हो रहा है। यदि ऐसा होता रहा तो आने वाले समय में बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं। इसी के चलते बिना एनओसी लिए भूगर्भ जल का दोहन करने वाले 122 होटल और बैंक्वेट हाॅल संचालकों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नोटिस जारी किया जा चुका है।
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गली-गली में आरओ प्लांट लगाकर पानी बेचने वाले भूगर्भ का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं। फिल्टर के लिए लगी मशीन जितना पानी उपयोग के लिए शुद्ध करती है, उससे दो गुना नालियों में बहा दिया जाता है। प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, भूगर्भ जल अधिनियम 2019 के तहत कृषि और घरेलू प्रयोग को छोड़कर सभी प्रकार की संस्थाओं को भूगर्भ जल विभाग की ओर से एनओसी लेने का नियम है। ऐसे संचालकों को बोरवेल बंद करके नगर निगम के पानी का इस्तेमाल करना होगा।
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इस समय पादरी बाजार, शाहपुर, रुस्तमपुर, मोहद्दीपुर, हुमायूंपुर, बिछिया, आजाद चौक आदि इलाकों में 10 से 15 आरओ प्लांट लगे हुए हैं। यहां से औसतन तीन से चार लाख लीटर पानी रोजाना बर्बाद हो रहा है।
अत्यधिक दोहन का दुष्प्रभाव सेहत पर भी
उप्र भूगर्भ जल (प्रबंधन एवं विनियमन) कानून 2019 के तहत कृषि एवं घरेलू उपयोग के लिए भूजल दोहन की छूट है। लेकिन इस कानून की आड़ में कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान व संस्थान भूगर्भ जल का अत्यधिक दोहन करते हैं। इसका दुष्परिणाम यह है कि जलस्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। पानी की बर्बादी से कई इलाकों में जल संकट भी खड़ा हो रहा है। भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन का दुष्प्रभाव लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है।
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क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि एनजीटी में आरपी बनाम केंद्रीय भूगर्भ जल आयोग का केस चल रहा है। कोर्ट के निर्देश पर नगर निगम से भूगर्भ जल का व्यावसायिक उपयोग करने वाली संस्थाओं, होटल-रेस्टोरेंट की सूची मांगी गई थी। सूची के आधार पर एनओसी नहीं लेने वालों को नोटिस दिया गया था। एनजीटी के समक्ष सभी को अपना पक्ष रखना है।
उप्र भूगर्भ जल (प्रबंधन एवं विनियमन) कानून 2019 के तहत कृषि एवं घरेलू उपयोग के लिए भूजल दोहन की छूट है। लेकिन इस कानून की आड़ में कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान व संस्थान भूगर्भ जल का अत्यधिक दोहन करते हैं। इसका दुष्परिणाम यह है कि जलस्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। पानी की बर्बादी से कई इलाकों में जल संकट भी खड़ा हो रहा है। भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन का दुष्प्रभाव लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है।
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क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि एनजीटी में आरपी बनाम केंद्रीय भूगर्भ जल आयोग का केस चल रहा है। कोर्ट के निर्देश पर नगर निगम से भूगर्भ जल का व्यावसायिक उपयोग करने वाली संस्थाओं, होटल-रेस्टोरेंट की सूची मांगी गई थी। सूची के आधार पर एनओसी नहीं लेने वालों को नोटिस दिया गया था। एनजीटी के समक्ष सभी को अपना पक्ष रखना है।