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डिसेंट हॉस्पिटल में इंश्योरेंस ठगी: आरोपी मैनेजर हो गया था 'अंडरग्राउंड'...गिरफ्तार, भेजा गया जेल
Sat, 08 Nov 2025 05:15 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 08 Nov 2025 05:15 PM IST
सार
रामगढ़ताल थाना प्रभारी नितिन रघुनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि ठगी के मामले में अब तक अस्पताल संचालक शमशुल कमर समेत पांच गिरफ्तार कर जेल भिजवाया जा चुका है। शुक्रवार को फर्जीवाड़े में शामिल डिसेंट अस्पताल के मैनेजर राकेश कुमार ओझा को भी गिरफ्तार किया गया। दोपहर बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
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डिसेंट हॉस्पिटल का गिरफ्तार मैनेजर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
डिसेंट हाॅस्पिटल में 1.20 करोड़ रुपये की इंश्योरेंस ठगी मामले में पुलिस की जांच अब और गहराती जा रही है। शुक्रवार को रामगढ़ताल पुलिस ने डिसेंट अस्पताल के मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान बांसगांव के भिटहा निवासी राकेश कुमार ओझा के रूप में हुई है।
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आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह अधिक रुपये कमाने के लालच में साजिश में शामिल हो गया था। इंश्योरेंस एजेंटों से सीधी डीलिंग करता था। नौ सितंबर को बजाज आलियांज जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों ने रामगढ़ताल थाना पुलिस को तहरीर दी थी।
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आरोप था कि डिसेंट और एपेक्स हाॅस्पिटल के नाम पर फर्जी मरीज भर्ती दिखाकर करोड़ों की रकम निकाल ली गई। जांच में सामने आया कि बीमा धारकों के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाए गए। खास बात यह रही कि एपेक्स नाम का हास्पिटल तो शहर में अस्तित्व में ही नहीं है।
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रामगढ़ताल थाना प्रभारी नितिन रघुनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि ठगी के मामले में अब तक अस्पताल संचालक शमशुल कमर समेत पांच गिरफ्तार कर जेल भिजवाया जा चुका है। शुक्रवार को फर्जीवाड़े में शामिल डिसेंट अस्पताल के मैनेजर राकेश कुमार ओझा को भी गिरफ्तार किया गया। दोपहर बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
संतकबीरनगर और बस्ती में भी हॉस्पिटल पाए गए संदिग्ध
थानाप्रभारी ने बताया कि अस्पताल संचालक शुमशुल कमर का छोटा भाई ताहिर का था। आरोपी सीधे एजेंटों के संपर्क में था। बीमा क्लेम पास कराने के लिए फर्जी मरीजों का दाखिला दिखाना, कागजात बनवाना और रकम का बंटवारा करना उसका जिम्मा था।
राकेश का पूरे रैकेट में बराबर का भागीदार रहा है। पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि ठगी का यह नेटवर्क सिर्फ डिसेंट तक सीमित नहीं है। गोरखपुर के अलावा संतकबीरनगर व बस्ती जिले के आठ हाॅस्पिटल संदिग्ध पाए गए हैं।
साइबर सेल खंगाल रही खातों का हिसाब
बीमा क्लेम की रकम कंपनियां सीधे अस्पताल के खाते में ट्रांसफर करती थीं। रकम कहां गई और किसे बांटी गई, इसका पता लगाने के लिए साइबर सेल की टीम को लगाया गया है। टीम बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और मेल खंगाल रही हैं। पुलिस ने 15 बीमा कंपनियों से संदिग्ध क्लेम की डिटेल और एजेंटों की सूची भी मांगी है।