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Gorakhpur News: हादसे में कटी सांस औरर भोजन की नली, बीआरडी में बची जान
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गोरखपुर। सड़क हादसे में गले की सांस, खाने और बोलने वाली नली कट जाने के बाद जिंदगी और मौत से जूझ रहे 27 वर्षीय युवक को बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन कर नई जिंदगी दी। अब वह खतरे से बाहर है।
बांसगांव क्षेत्र निवासी युवक सात जुलाई को तेज रफ्तार बाइक चलाते समय डिवाइडर से टकरा गया था, जिससे उसका गला गंभीर रूप से कट गया था। राहगीरों ने उसे निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। नाक, कान, गला रोग विभाग के डॉ. आदित्य पाठक के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया।
ऑपरेशन के दौरान मरीज को सामान्य तरीके से मुंह के रास्ते ऑक्सीजन और इंट्यूबेशन ट्यूब डालना संभव नहीं था। घटना के 17वें दिन यानी 24 जुलाई को चिकित्सकों ने गले के रास्ते विशेष तकनीक से ट्यूब डालकर मरीज की सांस को नियंत्रित किया और सर्जरी की। यह सर्जरी पूरी तरह सफल रही।
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टीम में डॉ. पीयूष के अलावा एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. सतीश कुमार और डॉ. शाहबाज अहमद शामिल रहे। डॉ. आदित्य पाठक ने बताया कि युवक के गले की एक प्रमुख रक्त वाहिका मात्र आधा मिलीमीटर के हिस्से से सुरक्षित बची थी। यदि वह भी कट जाती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।र
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बांसगांव क्षेत्र निवासी युवक सात जुलाई को तेज रफ्तार बाइक चलाते समय डिवाइडर से टकरा गया था, जिससे उसका गला गंभीर रूप से कट गया था। राहगीरों ने उसे निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। नाक, कान, गला रोग विभाग के डॉ. आदित्य पाठक के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया।
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ऑपरेशन के दौरान मरीज को सामान्य तरीके से मुंह के रास्ते ऑक्सीजन और इंट्यूबेशन ट्यूब डालना संभव नहीं था। घटना के 17वें दिन यानी 24 जुलाई को चिकित्सकों ने गले के रास्ते विशेष तकनीक से ट्यूब डालकर मरीज की सांस को नियंत्रित किया और सर्जरी की। यह सर्जरी पूरी तरह सफल रही।
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टीम में डॉ. पीयूष के अलावा एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. सतीश कुमार और डॉ. शाहबाज अहमद शामिल रहे। डॉ. आदित्य पाठक ने बताया कि युवक के गले की एक प्रमुख रक्त वाहिका मात्र आधा मिलीमीटर के हिस्से से सुरक्षित बची थी। यदि वह भी कट जाती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।र