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Gorakhpur News: दिल्ली से आई विशेषज्ञों की टीम ने शुरू की जांच, सप्ताह भर में देगी रिपोर्ट
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जंगल कौडिया फ्लाईओवर। संवाद
- जंगल कौड़िया फ्लाईओवर की भार क्षमता का कर रहे परीक्षण, तलाश रहे दरार की वजह
संवाद न्यूज एजेंसी
जंगल कौड़िया (गोरखपुर)। जंगल कौड़िया फ्लाईओवर में आई दरारों को भरे जाने के बाद दिल्ली से आई विशेषज्ञों की टीम ने फ्लाईओवर के भार क्षमता का परीक्षण शुरू कर दिया है। इसके साथ ही यह टीम दरार आने की वजह भी तलाश रही है। सप्ताह भर में यह टीम अपनी रिपोर्ट देगी। इसी आधार पर एनएचएआई सुरक्षा के मानकों को अपनाएगा।
एनएचएआई और कार्यदाई संस्था पीएनसी इंफ्राटेक के अधिकारियों का कहना है कि मौसम की विपरीत परिस्थितियों के कारण कभी-कभी बाल के समान पतली दरारें (हेयरलाइन क्रैक) आ जाती हैं, जिनसे आवागमन पर कोई असर नहीं पड़ता। दोनों हिस्सों (ऊपरी फ्लाईओवर और अंडरपास) से गुजरना पूरी तरह सुरक्षित है। वहीं स्थानीय लोगाें का आरोप है कि तीन लेन में ही दरारें आई हैं। बिना लोड टेस्ट पूरा किए ही इसे भारी वाहनों के लिए खोल दिया गया।
जंगल कौड़िया से सोनौली तक बन रहे 80 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग पर जंगल कौड़िया फ्लाईओवर के अंडरपास में करीब 10 दिन पहले तीन लेन की छत में दरारें नजर आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। अप्रैल 2022 में टेंडर के बाद शुरू हुए इस प्रोजेक्ट पर कुल 2,562 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। गोरखपुर और महाराजगंज जिले से गुजरने वाले इस फोरलेन पर अभी तक लगभग 18 सिक्स लेन फ्लाईओवर बनाए जा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश पर आवागमन शुरू हो चुका है।
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अधिकारियों के वर्जन
सभी अंडरपास का भार परीक्षण ठेकेदार के दायरे में ही शामिल है। सभी की जांच कराई जा रही है और फोटोग्राफिक रिकॉर्ड विभागीय डाटा में रखा जाएगा।
- केपीएस भदौरिया, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर, पीएनसी इंफ्राटेक
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फ्लाई ओवर के भार परीक्षण की टीम दिल्ली से आ चुकी है, जो विभिन्न फ्लाई ओवर की जांच कर रही है। सभी जांच सप्ताह भर में पूरी कर ली जाएगी।
- ललित प्रताप पाल, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
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संवाद न्यूज एजेंसी
जंगल कौड़िया (गोरखपुर)। जंगल कौड़िया फ्लाईओवर में आई दरारों को भरे जाने के बाद दिल्ली से आई विशेषज्ञों की टीम ने फ्लाईओवर के भार क्षमता का परीक्षण शुरू कर दिया है। इसके साथ ही यह टीम दरार आने की वजह भी तलाश रही है। सप्ताह भर में यह टीम अपनी रिपोर्ट देगी। इसी आधार पर एनएचएआई सुरक्षा के मानकों को अपनाएगा।
एनएचएआई और कार्यदाई संस्था पीएनसी इंफ्राटेक के अधिकारियों का कहना है कि मौसम की विपरीत परिस्थितियों के कारण कभी-कभी बाल के समान पतली दरारें (हेयरलाइन क्रैक) आ जाती हैं, जिनसे आवागमन पर कोई असर नहीं पड़ता। दोनों हिस्सों (ऊपरी फ्लाईओवर और अंडरपास) से गुजरना पूरी तरह सुरक्षित है। वहीं स्थानीय लोगाें का आरोप है कि तीन लेन में ही दरारें आई हैं। बिना लोड टेस्ट पूरा किए ही इसे भारी वाहनों के लिए खोल दिया गया।
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जंगल कौड़िया से सोनौली तक बन रहे 80 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग पर जंगल कौड़िया फ्लाईओवर के अंडरपास में करीब 10 दिन पहले तीन लेन की छत में दरारें नजर आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। अप्रैल 2022 में टेंडर के बाद शुरू हुए इस प्रोजेक्ट पर कुल 2,562 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। गोरखपुर और महाराजगंज जिले से गुजरने वाले इस फोरलेन पर अभी तक लगभग 18 सिक्स लेन फ्लाईओवर बनाए जा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश पर आवागमन शुरू हो चुका है।
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अधिकारियों के वर्जन
सभी अंडरपास का भार परीक्षण ठेकेदार के दायरे में ही शामिल है। सभी की जांच कराई जा रही है और फोटोग्राफिक रिकॉर्ड विभागीय डाटा में रखा जाएगा।
- केपीएस भदौरिया, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर, पीएनसी इंफ्राटेक
फ्लाई ओवर के भार परीक्षण की टीम दिल्ली से आ चुकी है, जो विभिन्न फ्लाई ओवर की जांच कर रही है। सभी जांच सप्ताह भर में पूरी कर ली जाएगी।
- ललित प्रताप पाल, परियोजना निदेशक, एनएचएआई