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Gorakhpur News: अमेरिका में प्रतिबंधित गोरखपुर का तस्कर साइबर क्राइम में भी है माहिर, थाईलैंड में दर्ज है ठगी का केस

Wed, 12 Nov 2025 02:01 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 12 Nov 2025 02:01 AM IST
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A smuggler from Gorakhpur, banned in the US, is also adept at cybercrime; a fraud case has been registered in Thailand.
गोरखपुर। अमेरिका में प्रतिबंधित गोरखपुर का तस्कर साइबर क्राइम में भी माहिर है। उसके खिलाफ थाईलैंड और अमेरिका में साइबर क्राइम का केस दर्ज है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के साथ थाई पुलिस भी उसकी तलाश में जुटी है। आरोपी ने अपने थाई साथियों के साथ मिलकर माइक्रोसॉफ्ट टेक सपोर्ट के नाम पर कई अमेरिकी नागरिकों से लाखों डॉलर की ठगी की।
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थाई पुलिस ने अत्युत्या प्रांत के सेना जिले में स्थित उसके आवास से लैपटॉप, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए हैं।


पिछले दिनों थाईलैंड से लौटे कौड़ीराम निवासी एक युवक को एसटीएफ ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। हालांकि पूछताछ के बाद उसे देर रात छोड़ दिया था। पूछताछ के दौरान युवक ने इलाके के एक तस्कर का नाम लिया। जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना तस्करी करता है। जिसे हाल में ही शहर में देखा गया है। एसटीएफ सूत्रों के अनुसार, जांच में पता चला कि आरोपी अपने थाई साथियों की मदद से कई अमेरिकी नागरिकों खुद को माइक्रोसॉफ्ट अधिकारी बताते हुए रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कराने के बाद उनके खातों से लाखों डॉलर उड़ा दिए थे। आरोपी व उसके साथियों के खिलाफ थाइलैंड व अमेरिका में भी केस दर्ज है।
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आरोपी ने थाईलैंड में खोले थे कई फर्जी अकाउंट
एसटीएफ सूत्रों के अनुसार, आरोपी अपने थाई सहयोगियों की मदद से कई फर्जी कंपनियां पंजीकृत करवाईं हैं। जिनके जरिये ठगी और सोना तस्करी का रुपया कॉर्पोरेट खातों में डाला जाता था। इसमें एक खाता टिंट रियल्टी लिमिटेड पार्टनरशिप के नाम से है। आरोपी ठगी के डॉलर को बैंकॉक की सोने की दुकानों के माध्यम से सोने की छड़ों में बदलते हैं। एफबीआई और थाई साइबर क्राइम ब्यूरो ने इसे अंतरराष्ट्रीय संगठित साइबर धोखाधड़ी करार दिया है। आरोपी के नेटवर्क ने अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों को निशाना बनाया।
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भारत में भी फैला नेटवर्क
जांच में पर्दाफाश हुआ है कि आरोपी के भारत में कई संपर्क हैं। वह गोरखपुर और दिल्ली से कॉल सेंटर स्टाफ की भर्ती कर उन्हें थाईलैंड में प्रशिक्षित करता था। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, वह सोना तस्करी में भी सक्रिय था। थाई साथियों की मदद से धन शोधन का नेटवर्क चला रहा था।




क्या होता है टेक सपोर्ट स्कैम
यह एक ऐसा साइबर अपराध है जिसमें ठग खुद को तकनीकी सहायता प्रतिनिधि बताकर पीड़ितों को कंप्यूटर या अकाउंट की फर्जी समस्या दिखाते हैं। रिमोट एक्सेस के जरिये वे पीड़ितों के खातों तक पहुंच बनाकर रुपये ठग लेते हैं। एसटीएफ सूत्रों के अनुसार, अश्वनी का गिरोह खासकर 60 वर्ष से अधिक आयु के अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाता है।



इनपुट के आधार पर जांच चल रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उस आधार पर कार्रवाईकी जाएगी
सत्यप्रकाश, निरीक्षक, एसटीएफ
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