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Gorakhpur News: धनवान व्यक्ति वही है जो तन मन आैर धन से सेवा भक्ति करे
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भनवापुर के धनोहरी में श्रीमदभागवत कथा सुनाते आचार्य श्रीकृष्ण शास्त्री। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। स्थानीय ब्लाॅक क्षेत्र के धनोहरी गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार रात कथा वाचक आचार्य श्रीकृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। कहा धनवान व्यक्ति वही है जो अपने तन, मन, धन से सेवा भक्ति करे। परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम के द्वारा संभव है।
पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज ने बताया कि पूतना राक्षसी ने बालकृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पूतना का वध कर उसका कल्याण किया। वहीं, गति प्रदान की जो गति मां यशोदा मैया को दी है। भगवान कहते हैं मेरा भक्त कैसा भी हो एक बार मेरी शरण में आने के बाद में उसे इस भवसागर से पार कर देता हूं और सदैव के लिए अपनी शरण प्रदान कर देता हूं। ऐसे भगवान दीनबंधु की शरण भला कौन नहीं लेना चाहेगा।
उन्होंने कहा कि आज कल की युवा पीढ़ी अपने धर्म, अपने भगवान को नहीं मानती है, लेकिन तुम अपने धर्म को जानना चाहते हो तो पहले गीता, भागवत, रामायण पढ़ो, तुम नहीं तुम्हारी आने वाली पीढ़ी भी संस्कारी हो जाएगी। ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा छोड़कर गिरिराज की पूजा शुरू कर दी, तो इंद्र ने कुपित होकर मूसलाधार बारिश की, तब कृष्ण भगवान ने अपनी कनिष्ठ अंगुली पर पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। इस दौरान मुनेश्वर चौधरी, सावित्री, राज, विजय, ज्ञान प्रकाश आदि मौजूद रहे।ो
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भनवापुर। स्थानीय ब्लाॅक क्षेत्र के धनोहरी गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार रात कथा वाचक आचार्य श्रीकृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। कहा धनवान व्यक्ति वही है जो अपने तन, मन, धन से सेवा भक्ति करे। परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम के द्वारा संभव है।
पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज ने बताया कि पूतना राक्षसी ने बालकृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पूतना का वध कर उसका कल्याण किया। वहीं, गति प्रदान की जो गति मां यशोदा मैया को दी है। भगवान कहते हैं मेरा भक्त कैसा भी हो एक बार मेरी शरण में आने के बाद में उसे इस भवसागर से पार कर देता हूं और सदैव के लिए अपनी शरण प्रदान कर देता हूं। ऐसे भगवान दीनबंधु की शरण भला कौन नहीं लेना चाहेगा।
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उन्होंने कहा कि आज कल की युवा पीढ़ी अपने धर्म, अपने भगवान को नहीं मानती है, लेकिन तुम अपने धर्म को जानना चाहते हो तो पहले गीता, भागवत, रामायण पढ़ो, तुम नहीं तुम्हारी आने वाली पीढ़ी भी संस्कारी हो जाएगी। ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा छोड़कर गिरिराज की पूजा शुरू कर दी, तो इंद्र ने कुपित होकर मूसलाधार बारिश की, तब कृष्ण भगवान ने अपनी कनिष्ठ अंगुली पर पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। इस दौरान मुनेश्वर चौधरी, सावित्री, राज, विजय, ज्ञान प्रकाश आदि मौजूद रहे।ो
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