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Gorakhpur News: चिड़ियाघर में आएगा हाइब्रिड बब्बर शेर
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- शेरनी गौरी के साथ बनेगी जोड़ी, स्थानीय वातावरण में अनुकूल साबित होगा शेर
गोरखपुर। शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में अब हाइब्रिड बब्बर शेर लाने की तैयारी है। तिरुपति चिड़ियाघर से लाए जा रहे शेर की जोड़ी यहां पहले से मौजूद बब्बर शेरनी गौरी के साथ बनाई जाएगी। चिड़ियाघर प्रबंधन का मानना है कि हाइब्रिड बब्बर शेर स्थानीय वातावरण के लिहाज से अधिक अनुकूल साबित हो सकता है।
बब्बर शेर मूल रूप से गुजरात के गिर फॉरेस्ट में पाए जाते हैं। गिर का वातावरण अपेक्षाकृत सूखा और बब्बर शेरों के प्राकृतिक आवास के अनुकूल है। इसके विपरीत गोरखपुर में नमी यानी ह्यूमिडिटी अधिक होने के कारण बब्बर शेरों को यहां वातावरण के साथ सामंजस्य बैठाने में परेशानी होती है और वे तनाव में रहते हैं।
जानकारों के अनुसार एक समय बब्बर शेरों की संख्या काफी कम हो गई थी। संख्या बढ़ाने के लिए लंबे समय तक ब्रीडिंग कराई गई। सीमित जीन पूल में हुई ब्रीडिंग के कारण इनमें बीमारियों और वातावरण में होने वाले बदलावों से लड़ने की क्षमता प्रभावित होने की बात सामने आती रही है। ऐसे में गोरखपुर जैसे अलग जलवायु वाले क्षेत्र में इनके संरक्षण को चुनौती माना जाता है।
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एशियाई और अफ्रीकी शेरों का क्रॉस
हाइब्रिड बब्बर शेर एशियाई और अफ्रीकी शेरों के क्रॉस से तैयार किए जाते हैं। इनमें सामान्य बब्बर शेरों की तुलना में प्रतिरोधक क्षमता अधिक और आकार बड़ी होने की बात कही जाती है। इसी वजह से गोरखपुर चिड़ियाघर में हाइब्रिड बब्बर शेर लाने का निर्णय लिया गया है। चिड़ियाघर के उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि तिरुपति से शेर के आने के बाद उसे चिड़ियाघर के वातावरण के अनुकूल ढालने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद उसकी जोड़ी बब्बर शेरनी गौरी के साथ बनाने की तैयारी है। इससे चिड़ियाघर में बब्बर शेरों की मौजूदगी बनाए रखने के साथ उनके संरक्षण और प्रजनन की दिशा में भी प्रयास आगे बढ़ेंगे।
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गोरखपुर। शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में अब हाइब्रिड बब्बर शेर लाने की तैयारी है। तिरुपति चिड़ियाघर से लाए जा रहे शेर की जोड़ी यहां पहले से मौजूद बब्बर शेरनी गौरी के साथ बनाई जाएगी। चिड़ियाघर प्रबंधन का मानना है कि हाइब्रिड बब्बर शेर स्थानीय वातावरण के लिहाज से अधिक अनुकूल साबित हो सकता है।
बब्बर शेर मूल रूप से गुजरात के गिर फॉरेस्ट में पाए जाते हैं। गिर का वातावरण अपेक्षाकृत सूखा और बब्बर शेरों के प्राकृतिक आवास के अनुकूल है। इसके विपरीत गोरखपुर में नमी यानी ह्यूमिडिटी अधिक होने के कारण बब्बर शेरों को यहां वातावरण के साथ सामंजस्य बैठाने में परेशानी होती है और वे तनाव में रहते हैं।
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जानकारों के अनुसार एक समय बब्बर शेरों की संख्या काफी कम हो गई थी। संख्या बढ़ाने के लिए लंबे समय तक ब्रीडिंग कराई गई। सीमित जीन पूल में हुई ब्रीडिंग के कारण इनमें बीमारियों और वातावरण में होने वाले बदलावों से लड़ने की क्षमता प्रभावित होने की बात सामने आती रही है। ऐसे में गोरखपुर जैसे अलग जलवायु वाले क्षेत्र में इनके संरक्षण को चुनौती माना जाता है।
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एशियाई और अफ्रीकी शेरों का क्रॉस
हाइब्रिड बब्बर शेर एशियाई और अफ्रीकी शेरों के क्रॉस से तैयार किए जाते हैं। इनमें सामान्य बब्बर शेरों की तुलना में प्रतिरोधक क्षमता अधिक और आकार बड़ी होने की बात कही जाती है। इसी वजह से गोरखपुर चिड़ियाघर में हाइब्रिड बब्बर शेर लाने का निर्णय लिया गया है। चिड़ियाघर के उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि तिरुपति से शेर के आने के बाद उसे चिड़ियाघर के वातावरण के अनुकूल ढालने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद उसकी जोड़ी बब्बर शेरनी गौरी के साथ बनाने की तैयारी है। इससे चिड़ियाघर में बब्बर शेरों की मौजूदगी बनाए रखने के साथ उनके संरक्षण और प्रजनन की दिशा में भी प्रयास आगे बढ़ेंगे।