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Gorakhpur News: माफिया विनोद के अवैध फाॅर्म हाउस पर चला बुलडोजर
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जीडीए ने 30 मई को भेजा था आखिरी नोटिस, जीडीए और पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम ने देर रात पूरी की कार्रवाई
500 वर्ग मीटर में फैला था आलीशान आशियाना, 50 हजार के इनामी माफिया पर कार्रवाई देखने के लिए तपती धूप में खड़े थे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। रंगदारी मांगने व जमीन कब्जा करने के आरोप में फरार चल रहे 50 हजार रुपये के इनामी माफिया विनोद उपाध्याय के गुलरिहा के मोगलहा स्थित आलीशान फाॅर्म हाउस पर शनिवार को बुलडोजर चलाया गया। बिना नक्शा पास कराए निर्माण कराने पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने माफिया को नोटिस भेजा था। तय समय सीमा के भीतर जवाब न देने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। देर रात तक चली कार्रवाई के दौरान आसपास के लोगों की भारी भीड़ जुट गई। एहतियात के तौर पर भारी फोर्स तैनात की गई थी।
जानकारी के मुताबिक, माफिया विनोद उपाध्याय ने अपने भाई संजय उपाध्याय के साथ मिलकर पूर्व शासकीय अधिवक्ता प्रवीण श्रीवास्तव की जमीन पर कब्जा किया था। यह जमीन फाॅर्म हाउस के पास ही है। यह मामले सामने आने के बाद ही माफिया विनोद, उसके भाई संजय और गिरोह के सदस्यों पर पुलिस की नजर पड़ी।
जांच में पता चला कि माफिया विनोद ने गुलरिहा के सलेमपुर उर्फ मोगलहा में स्थित 500 वर्ग मीटर में बिना मानचित्र स्वीकृत कराए अवैध निर्माण कराया है। शिकायत पर 27 अप्रैल को जीडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। मकान में रह रहे लोगों से मानचित्र के बारे में पूछा तो वे कुछ नहीं बता सके। जिसके बाद जीडीए के अधिकारियों ने वाद दायर करते हुए 12 मई तक कार्यालय में प्रस्तुत होकर अपना पक्ष रखने के लिए माफिया को नोटिस दिया था, लेकिन वह प्रस्तुत नहीं हुआ।
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30 मई को जीडीए के पीठासीन अधिकारी ने माफिया के अवैध निर्माण को 15 दिन में ध्वस्त करने का आदेश पारित किया था, जिसके अनुपालन में शनिवार की सुबह जीडीए की टीम बुलडोजर लेकर सलेमपुर उर्फ मोगलहा स्थित माफिया के मकान पर पहुंची तो ताला बंद था। मजिस्ट्रेट को बुलाकर उनकी मौजूदगी में ताला तोड़ने के बाद मकान को खाली कराया गया। आशियाने को ध्वस्त करने में माफिया से पीड़ित प्रवीण श्रीवास्तव के जेसीबी का भी इस्तेमाल किया गया। मौके पर एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई के अलावा जीडीए व प्रशासन के अधिकारी फोर्स के साथ मौजूद रहे।
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करीब 2.5 करोड़ आंकी जा रही कीमत
माफिया विनोद का जो फॉर्म हाउस जमींदोज हुआ है उसकी कीमत करीब ढाई करोड़ आंकी गई है। जीडीए के अधिकारियों ने अवैध तरीके से बने घर का मूल्यांकन किया है। सलेमपुर मोगलहा के अलावा शाहपुर व गोरखनाथ के धर्मशाला बाजार में भी माफिया का ठिकाना चिह्नत है, जिसके बारे में नगर निगम व जीडीए की टीम जानकारी जुटा रही है। इसके अलावा कुछ अन्य जमीनों के बारे में भी जानकारी मिली है, जिस पर पुलिस प्रशासन की नजर पड़ गई है।
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तीन जेसीबी चली, निकले 80 सामान
माफिया के फार्म हाउस पर कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक-एक ब्यौरा तैयार किया। तीन जेसीबी लेकर पहुंचीं पुलिस ने पूरे घर को खंगाल डाला। टीम ने भीतर मौजूद सामानों की जानकारी ली। उसे रजिस्टर पर दर्ज किया। इसमें वैक्यूम क्लीनर मशीन, एसी, फ्रीज, कूलर, चौकी, कंबल, डबल बेड, 42 इंच का टीवी, सोफा, रजाई, चद्दर, बच्चे की कुर्सी सहित 80 सामानों को पुलिस ने बगल के बड़े कमरे में रखवा दिया।
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टाॅप-10 में शामिल विनोद पर दर्ज हैं 32 मुकदमे
रंगदारी मांगने, वसूली, धमकी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने के मामले में फरार विनोद पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित है। गुलरिहा, शाहपुर थाना पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच व एसटीएएफ की टीम गोरखपुर, लखनऊ, देवरिया के साथ ही आसपास के जिलों में पिछले 20 दिन से छापेमारी कर रही है। विनोद जिले के टाप-10 व प्रदेश के टॉप-61 माफिया की सूची में शामिल है। एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि माफिया शासन द्वारा चिह्नित है और इस पर 32 मुकदमे हैं। जिसमें चार हत्या और चार गैंगस्टर के मामले हैं।
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साहब, मेरी जमीन पर भी कब्जा है, मदद कीजिए
एक तरफ माफिया विनोद का मकान ध्वस्त हो रहा था, इसी बीच हिम्मत पाकर मोहल्ले की रंजना श्रीवास्तव आ गईं। अधिकारियों से बताया कि उसकी जमीन पर पड़ोस में रहने वाला राजकुमार अवैध निर्माण करा रहा है। उसे भी ध्वस्त कराया जाए, बाद में पुलिस ने उनके कागजात को भी चेक किया और कार्रवाई का भरोसा दिया। अभी चार दिन पहले ही कैंट थाना क्षेत्र स्थित माफिया अजीत शाही का अवैध मैरिज हाउस ध्वस्त हुआ है। जिसे उसने नगर निगम की जमीन पर नाम बदलकर कब्जा करके बनाया था। जिसके बाद अजीत पर कैंट थाने में जालसाजी और गीडा में भी धोखाधड़ी का केस हुआ था। अब पुलिस माफिया राकेश यादव व सुधीर सिंह के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने की तैयारी में है।
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सत्ता में आई बसपा तो विनोद की मिली ताकत
पीडब्लूडी कांड के बाद सुर्खियों में आ गया विनोद, फिर अपराध में बढ़ता गया कदम
गोरखपुर। छात्र राजनीति में दखल देकर बसपा में अच्छी पैठ बनाने वाले विनोद उपाध्याय ने सत्ता की छत्रछाया में रहकर संपत्ति अर्जित की। 2007 में पीडब्ल्यूडी कांड के बाद सुर्खियों में आया तो अपराध जगत सक्रिय होता गया और दस सालों में अपने नेटवर्क से माफिया बन गया।
विनोद ने 2007 में गोरखपुर सदर सीट से बसपा के बैनर तले चुनाव लड़ा। चुनाव हार गया लेकिन, पार्टी में बड़े नेताओं से करीबी रिश्ते बना लिए। पीडब्लूडी में ठेके के विवाद को लेकर 2007 में ही सिविल लाइंस इलाके में विनोद उपाध्याय गैंग पर लाल बहादुर यादव गैंग ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। इस घटना में विनोद गुट के दो लोग मारे गए थे। इसके बाद 2008 में लखनऊ में हत्या का के दर्ज हुआ।
इसी दौरान विनोद की नजर विवादित जमीनों पर टिक गई। उसने जोड़तोड़ और दबंगई से कई जमीनें अपने और अपने लोगों के नाम करवा लीं। लाल बहादुर यादव भी राजनीति में आ गया था। पिपरौली के ब्लॉक प्रमुख बन गया। मई 2014 में गोरखपुर विश्वविद्यालय गेट के सामने ही लाल बहादुर की हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने विनोद उपाध्याय समेत कुल 14 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। ब्यूरो
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जेल गया पर रौब कम न हुआ
विनोद पर 2014 में हत्या का प्रयास, आर्म्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ। 2020 आते-आते विनोद पर गंभीर धाराओं में दर्ज मुकदमों की संख्या 25 पहुंच गई। जमानत पर छूटा, तो फरार हो गया। पुलिस ने 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया। 17 जुलाई 2020 को पुलिस ने विनोद को गोमतीनगर के विपुल खंड से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद से माफिया अंडरग्राउंड होकर अपराध करने लगा। लखनऊ में ही अपने आप को पूरी तरह से स्थापित कर लिया। हनक ऐसी कि उसके पड़ोसी तक उसे मंत्री जानते थे। इस बीच एक बार फिर उसका नाम सुर्खियों में आया तो उस पर इनाम 50 हजार रुपये कर दिया गया।
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जेल में एक थप्पड़ का बदला हत्या कर लिया था विनोद ने
छात्र राजनीति से जुड़ा विनोद दिसंबर 2004 में जेल में बंद था। नेपाल के भैरहवा का शातिर अपराधी जीतनारायण मिश्र भी गोरखपुर जेल के अंदर था। किसी बात को लेकर उसने विनोद को थप्पड़ मार दिया था। विनोद कुछ दिन बाद जमानत पर बाहर आया। उधर, जीत नारायण को बस्ती जेल भेज दिया गया। 7 अगस्त 2005 को जमानत मिल गई। जीतनारायण अपने बहनोई गोरेलाल के साथ संतकबीरनगर के बखिरा जाने के लिए जीप पर बैठा। जैसे ही वह उतरा कार से आए बदमाशों ने घेर लिया और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। 70 सेकेंड के अंदर जीत नारायण और गोरेलाल की हत्या हो चुकी थी। इस केस में माफिया विनोद नामजद हुआ।
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500 वर्ग मीटर में फैला था आलीशान आशियाना, 50 हजार के इनामी माफिया पर कार्रवाई देखने के लिए तपती धूप में खड़े थे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। रंगदारी मांगने व जमीन कब्जा करने के आरोप में फरार चल रहे 50 हजार रुपये के इनामी माफिया विनोद उपाध्याय के गुलरिहा के मोगलहा स्थित आलीशान फाॅर्म हाउस पर शनिवार को बुलडोजर चलाया गया। बिना नक्शा पास कराए निर्माण कराने पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने माफिया को नोटिस भेजा था। तय समय सीमा के भीतर जवाब न देने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। देर रात तक चली कार्रवाई के दौरान आसपास के लोगों की भारी भीड़ जुट गई। एहतियात के तौर पर भारी फोर्स तैनात की गई थी।
जानकारी के मुताबिक, माफिया विनोद उपाध्याय ने अपने भाई संजय उपाध्याय के साथ मिलकर पूर्व शासकीय अधिवक्ता प्रवीण श्रीवास्तव की जमीन पर कब्जा किया था। यह जमीन फाॅर्म हाउस के पास ही है। यह मामले सामने आने के बाद ही माफिया विनोद, उसके भाई संजय और गिरोह के सदस्यों पर पुलिस की नजर पड़ी।
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जांच में पता चला कि माफिया विनोद ने गुलरिहा के सलेमपुर उर्फ मोगलहा में स्थित 500 वर्ग मीटर में बिना मानचित्र स्वीकृत कराए अवैध निर्माण कराया है। शिकायत पर 27 अप्रैल को जीडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। मकान में रह रहे लोगों से मानचित्र के बारे में पूछा तो वे कुछ नहीं बता सके। जिसके बाद जीडीए के अधिकारियों ने वाद दायर करते हुए 12 मई तक कार्यालय में प्रस्तुत होकर अपना पक्ष रखने के लिए माफिया को नोटिस दिया था, लेकिन वह प्रस्तुत नहीं हुआ।
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30 मई को जीडीए के पीठासीन अधिकारी ने माफिया के अवैध निर्माण को 15 दिन में ध्वस्त करने का आदेश पारित किया था, जिसके अनुपालन में शनिवार की सुबह जीडीए की टीम बुलडोजर लेकर सलेमपुर उर्फ मोगलहा स्थित माफिया के मकान पर पहुंची तो ताला बंद था। मजिस्ट्रेट को बुलाकर उनकी मौजूदगी में ताला तोड़ने के बाद मकान को खाली कराया गया। आशियाने को ध्वस्त करने में माफिया से पीड़ित प्रवीण श्रीवास्तव के जेसीबी का भी इस्तेमाल किया गया। मौके पर एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई के अलावा जीडीए व प्रशासन के अधिकारी फोर्स के साथ मौजूद रहे।
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करीब 2.5 करोड़ आंकी जा रही कीमत
माफिया विनोद का जो फॉर्म हाउस जमींदोज हुआ है उसकी कीमत करीब ढाई करोड़ आंकी गई है। जीडीए के अधिकारियों ने अवैध तरीके से बने घर का मूल्यांकन किया है। सलेमपुर मोगलहा के अलावा शाहपुर व गोरखनाथ के धर्मशाला बाजार में भी माफिया का ठिकाना चिह्नत है, जिसके बारे में नगर निगम व जीडीए की टीम जानकारी जुटा रही है। इसके अलावा कुछ अन्य जमीनों के बारे में भी जानकारी मिली है, जिस पर पुलिस प्रशासन की नजर पड़ गई है।
तीन जेसीबी चली, निकले 80 सामान
माफिया के फार्म हाउस पर कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक-एक ब्यौरा तैयार किया। तीन जेसीबी लेकर पहुंचीं पुलिस ने पूरे घर को खंगाल डाला। टीम ने भीतर मौजूद सामानों की जानकारी ली। उसे रजिस्टर पर दर्ज किया। इसमें वैक्यूम क्लीनर मशीन, एसी, फ्रीज, कूलर, चौकी, कंबल, डबल बेड, 42 इंच का टीवी, सोफा, रजाई, चद्दर, बच्चे की कुर्सी सहित 80 सामानों को पुलिस ने बगल के बड़े कमरे में रखवा दिया।
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टाॅप-10 में शामिल विनोद पर दर्ज हैं 32 मुकदमे
रंगदारी मांगने, वसूली, धमकी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने के मामले में फरार विनोद पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित है। गुलरिहा, शाहपुर थाना पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच व एसटीएएफ की टीम गोरखपुर, लखनऊ, देवरिया के साथ ही आसपास के जिलों में पिछले 20 दिन से छापेमारी कर रही है। विनोद जिले के टाप-10 व प्रदेश के टॉप-61 माफिया की सूची में शामिल है। एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि माफिया शासन द्वारा चिह्नित है और इस पर 32 मुकदमे हैं। जिसमें चार हत्या और चार गैंगस्टर के मामले हैं।
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साहब, मेरी जमीन पर भी कब्जा है, मदद कीजिए
एक तरफ माफिया विनोद का मकान ध्वस्त हो रहा था, इसी बीच हिम्मत पाकर मोहल्ले की रंजना श्रीवास्तव आ गईं। अधिकारियों से बताया कि उसकी जमीन पर पड़ोस में रहने वाला राजकुमार अवैध निर्माण करा रहा है। उसे भी ध्वस्त कराया जाए, बाद में पुलिस ने उनके कागजात को भी चेक किया और कार्रवाई का भरोसा दिया। अभी चार दिन पहले ही कैंट थाना क्षेत्र स्थित माफिया अजीत शाही का अवैध मैरिज हाउस ध्वस्त हुआ है। जिसे उसने नगर निगम की जमीन पर नाम बदलकर कब्जा करके बनाया था। जिसके बाद अजीत पर कैंट थाने में जालसाजी और गीडा में भी धोखाधड़ी का केस हुआ था। अब पुलिस माफिया राकेश यादव व सुधीर सिंह के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने की तैयारी में है।
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सत्ता में आई बसपा तो विनोद की मिली ताकत
पीडब्लूडी कांड के बाद सुर्खियों में आ गया विनोद, फिर अपराध में बढ़ता गया कदम
गोरखपुर। छात्र राजनीति में दखल देकर बसपा में अच्छी पैठ बनाने वाले विनोद उपाध्याय ने सत्ता की छत्रछाया में रहकर संपत्ति अर्जित की। 2007 में पीडब्ल्यूडी कांड के बाद सुर्खियों में आया तो अपराध जगत सक्रिय होता गया और दस सालों में अपने नेटवर्क से माफिया बन गया।
विनोद ने 2007 में गोरखपुर सदर सीट से बसपा के बैनर तले चुनाव लड़ा। चुनाव हार गया लेकिन, पार्टी में बड़े नेताओं से करीबी रिश्ते बना लिए। पीडब्लूडी में ठेके के विवाद को लेकर 2007 में ही सिविल लाइंस इलाके में विनोद उपाध्याय गैंग पर लाल बहादुर यादव गैंग ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। इस घटना में विनोद गुट के दो लोग मारे गए थे। इसके बाद 2008 में लखनऊ में हत्या का के दर्ज हुआ।
इसी दौरान विनोद की नजर विवादित जमीनों पर टिक गई। उसने जोड़तोड़ और दबंगई से कई जमीनें अपने और अपने लोगों के नाम करवा लीं। लाल बहादुर यादव भी राजनीति में आ गया था। पिपरौली के ब्लॉक प्रमुख बन गया। मई 2014 में गोरखपुर विश्वविद्यालय गेट के सामने ही लाल बहादुर की हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने विनोद उपाध्याय समेत कुल 14 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। ब्यूरो
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जेल गया पर रौब कम न हुआ
विनोद पर 2014 में हत्या का प्रयास, आर्म्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ। 2020 आते-आते विनोद पर गंभीर धाराओं में दर्ज मुकदमों की संख्या 25 पहुंच गई। जमानत पर छूटा, तो फरार हो गया। पुलिस ने 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया। 17 जुलाई 2020 को पुलिस ने विनोद को गोमतीनगर के विपुल खंड से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद से माफिया अंडरग्राउंड होकर अपराध करने लगा। लखनऊ में ही अपने आप को पूरी तरह से स्थापित कर लिया। हनक ऐसी कि उसके पड़ोसी तक उसे मंत्री जानते थे। इस बीच एक बार फिर उसका नाम सुर्खियों में आया तो उस पर इनाम 50 हजार रुपये कर दिया गया।
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जेल में एक थप्पड़ का बदला हत्या कर लिया था विनोद ने
छात्र राजनीति से जुड़ा विनोद दिसंबर 2004 में जेल में बंद था। नेपाल के भैरहवा का शातिर अपराधी जीतनारायण मिश्र भी गोरखपुर जेल के अंदर था। किसी बात को लेकर उसने विनोद को थप्पड़ मार दिया था। विनोद कुछ दिन बाद जमानत पर बाहर आया। उधर, जीत नारायण को बस्ती जेल भेज दिया गया। 7 अगस्त 2005 को जमानत मिल गई। जीतनारायण अपने बहनोई गोरेलाल के साथ संतकबीरनगर के बखिरा जाने के लिए जीप पर बैठा। जैसे ही वह उतरा कार से आए बदमाशों ने घेर लिया और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। 70 सेकेंड के अंदर जीत नारायण और गोरेलाल की हत्या हो चुकी थी। इस केस में माफिया विनोद नामजद हुआ।