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Gorakhpur News: देश में 80 फीसदी महिलाएं अभी भी एनीमिया से ग्रसित : डॉ. मंजू पुरी

Mon, 29 Jul 2024 06:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jul 2024 06:21 AM IST
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80 percent women in the country are still suffering from anemia: Dr. Manju Puri
एनआइजीएफ कांफ्रेंस का समापन
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- प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में मेडिकल कॉलेज प्रयागराज की टीम प्रथम, पीजीआई चंडीगढ़ को दूसरा व बीआरडी मेडिकल कॉलेज को तीसरा स्थान मिला
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। ऑल इंडिया गायकोनालॉजिस्ट फोरम (एनआईजीएफ) का दूसरा वार्षिक अधिवेशन रविवार शाम संपन्न हुआ। दो दिवसीय अधिवेशन के दौरान महिलाओं से जुड़े तमाम बिंदुओं पर इलाज के दौरान आने वाली दिक्कतों और नई सुविधाओं पर चर्चा की गई। इस दौरान महिला डॉक्टरों ने अपने-अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किए, जिन पर संबंधित विशेषज्ञों ने भी सवाल जवाब किए। समापन अवसर पर एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता हुई, इसमें प्रयागराज की टीम को प्रथम, चंडीगढ़ को दूसरा और बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर की टीम को तीसरा स्थान मिला। फिर मिलने के वादे के साथ महिला डॉक्टरों ने देर शाम शहर से विदा लिया।
इस दौरान डॉ. मंजू पुरी ने एनीमिया फ्री इंडिया पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि देश की 70 से 80 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं। इसकी वजह से महिलाओं में कमजोरी, सांस फूलना, चक्कर आना, घबराहट आदि की दिक्कत होती है। किशोरावस्था में लड़कियों को खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, ड्राई फ्रूट्स, दाल, दूध, दही, गुड़, चना इत्यादि से आयरन की कमी नहीं होगी। अंडा, चिकन, मीट भी आयरन के अच्छे स्रोत हैं।
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एंडोस्कोपी पर डॉ. नूतन जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि अब हिस्टरोस्कोपी और लेप्रोस्कोपी से लगभग हर तरह की बीमारी को सही समय पर पहचान सकते हैं। मायोमा, ओवरीसिस्ट, एंडोमेट्रियोसिस, एडिनोमायोसिस आदि का इलाज होता है। आईवीएफ में इसका विशेष महत्व है। प्रो. दीपिका डेका ने कहा कि समय से अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट होने पर नवजात की मृत्युदर को कम किया जा सकता है।
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प्रेसिडेंट डॉ. साधना गुप्ता ने बच्चेदानी में होने वाली गांठ पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मायोमा से अधिक रक्तस्राव, पेट में दर्द और कभी-कभी इसकी वजह से बच्चा रुकने में भी दिक्कत आ सकती है। आजकल मायोमा का उपचार टैबलेट से भी होता है।
डॉ. अर्चना सिंह ने प्रेगनेंसी के दौरान थायराइड की बीमारियों के बारे में जानकारी दी। डॉ. कृष्ण ने गर्भ के दौरान झटका आने को गंभीर बीमारी बताया। डॉ. प्रीति कुमार ने आयरन की कमी को दूर करने में इंजेक्शन की भूमिका को रेखांकित किया। इसके अलावा रोल प्ले के जरिए आईवीएफ, एचपीबी स्क्रीनिंग आदि पर चर्चा हुई। क्विज पेपर और पोस्टर प्रेजेंटेशन के विजेता भी घोषित किए गए। संचालन डॉ. बबीता शुक्ला ने किया।
इस अवसर पर हुए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में मेडिकल कॉलेज प्रयागराज की टीम नंबर वन, पीजीआई चंडीगढ़ की टीम नंबर दो और बीआरडी मेडिकल कॉलेज की टीम तीसरे स्थान पर रही।

अंत में अध्यक्ष डॉ. साधना गुप्ता, सचिव डॉ. अमृत सरकारी जयपुरिया और संचालक डॉ. बबीता शुक्ला ने डॉ. राधा जीना, डॉ. रीना श्रीवास्तव, डॉ. मधु गुलाटी, डॉ. मधुबाला, डॉ. किरण श्रीवास्तव, डॉ. रोचि स्मृति, डॉ. सविता अग्रवाल, डॉ. अल्पना अग्रवाल, डॉ. अरुण छापरिया, डॉ. अनुभव गुप्ता, डॉ. प्रीति प्रियदर्शनी, डॉ. अंजू श्रीवास्तव. डॉ. शिखा अग्रवाल, डॉ. शिखा सेठ आदि महिला डॉक्टरों को सम्मानित किया।
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