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यह हैं गोरखपुर की 73 अवैध कॉलोनियां: प्लाट खरीद फंस गए लोग, घर बना नहीं सकते, बेचना भी मुश्किल
Wed, 17 May 2023 10:38 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 17 May 2023 10:38 AM IST
सार
जीडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि सर्किल रेट का 50 फीसदी जमा कर संबंधित कॉलोनाइजर, अपनी कॉलोनी को वैध करा सकते हैं। दूसरे विकल्प के तौर पर उनके पास लैंड पूलिंग योजना का सहारा है, जिसके तहत प्राधिकरण 75 फीसदी जमीन अपने पास रख लेगा और बाकी 25 फीसदी जमीन विकसित कर लौटा देगा।
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अवैध कॉलोनियों में चलेगा बुलडोजर। (सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गोरखपुर में अवैध कॉलोनियों के फेर में कॉलोनाइजर कम और वहां जमीन खरीदने वाले लोगों की गर्दन ज्यादा फंस गई है। बिना कॉलोनी का ले-आउट स्वीकृत हुए वहां आवास तो बनाया ही नहीं जा सकता। इन कॉलोनियों का नाम सार्वजनिक होने के बाद जमीन बेच पाना भी आसान साबित नहीं होगा। जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर के मुताबिक ज्यादातर अवैध कॉलोनियां शहर की सीमा से सटी या फिर बाहरी क्षेत्र में बसी हैं और ज्यादातर का भू-प्रयोग कृषि है।
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उपाध्यक्ष ने बताया कि सर्किल रेट का 50 फीसदी जमा कर संबंधित कॉलोनाइजर, अपनी कॉलोनी को वैध करा सकते हैं। दूसरे विकल्प के तौर पर उनके पास लैंड पूलिंग योजना का सहारा है, जिसके तहत प्राधिकरण 75 फीसदी जमीन अपने पास रख लेगा और बाकी 25 फीसदी जमीन विकसित कर लौटा देगा। मगर, इन दोनों विकल्प को अपनाना कॉलोनाइजर के लिए आसान नहीं है। कॉलोनियों की ज्यादातर जमीन बिक चुकी है। ऐसे में 50 फीसदी सर्किल रेट जमा करने पर कॉलोनाइजर को मुनाफे की जगह उलटा नुकसान हो जाएगा।
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इसी तरह मानक के मुताबिक जमीन नहीं होने की वजह से लैंड पूलिंग योजना का भी वह लाभ नहीं ले सकते। ऐसे में दोनों ही दशाओं में जमीन लेने वालों का नुकसान है। वह जमीन पर निर्माण नहीं करा सकते। उपाध्यक्ष का कहना है कि निर्माण हुआ तो प्राधिकरण उसे तोड़ने के साथ ही संबंधित पर कार्रवाई भी करेगा। इन काॅलोनियों की जमीन का इस्तेमाल कृषि या बागवानी आदि के तौर पर किया जा सकेगा। प्राधिकरण ने अब तक 73 अवैध कॉलोनियां चिह्नित की हैं। सभी में आबादी नहीं बसी है। इनमें से 23 को ध्वस्त कराया जा चुका है।
इन अवैध कॉलोनियों में जमीन लेकर फंसे हैं लोग
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