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यूपी: प्रदेश में जरूरतमंदों बच्चों के स्कॉलरशिप की 63 फीसदी सीटें लैप्स, छह जिलों में प्रवेश शून्य, छह में मात्र एक पास

Sat, 21 Aug 2021 01:44 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 21 Aug 2021 01:44 PM IST
सार

सरकार की ओर से छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित कुल 15143 सीटों के सापेक्ष, केवल 5517 विद्यार्थियों ने ही परीक्षा के लिए आवेदन किया और महज 2171 छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला।

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63 percent seats scholarship needy children in state lapse
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की बारहवीं तक की पढ़ाई के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित परीक्षा, शिक्षा विभाग की उदासीनता के चलते पूरे प्रदेश में फेल होती नजर आ रही है। सरकार की ओर से छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित कुल 15143 सीटों के सापेक्ष, केवल 5517 विद्यार्थियों ने ही परीक्षा के लिए आवेदन किया और महज 2171 छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला।
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गौरतलब है कि, प्रदेश के सभी सरकारी-स्थानीय निकाय और अशासकीय सहायता प्राप्त (केंद्रीय विद्यालय, आवासीय सैनिक स्कूल, जवाहर नवोदय स्कूल को छोड़कर ) स्कूलों की कक्षा आठ में पढ़ रहे छात्र इस परीक्षा के लिए पात्र हैं, बशर्ते उन्होंने सातवीं कक्षा 55 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की हो और उनके अभिभावकों की कुल वार्षिक आय 1,50,000 रुपये से ज्यादा न हो। अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्रों को न्यूनतम अंकों में पांच प्रतिशत की छूट है।
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गोरखपुर जिले में ही कुल स्वीकृत सीटों की संख्या 309 हैं, मगर वर्ष-2020 की परीक्षा में 263 अभ्यर्थियों ने ही आवेदन फार्म को भरा है। जबकि, इस छात्रवृत्ति से कक्षा आठवीं में पढ़ने वाले छात्र के बारहवीं तक की पढ़ाई के लिए एक हजार रुपये प्रतिमाह की छात्रवृत्ति मिलती है। यानी, चार वर्षों में 48 हजार रुपये बच्चे को आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए मिलते हैं। अगर ये छात्रवृत्ति बच्चों तक पहुंच जाए तो उनकी पढ़ाई का सपना धन के अभाव में नहीं टूटेगा। जागरूकता के अभाव में इस स्कॉलरशिप का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा है।
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प्रचार प्रसार की कमी, शिक्षक भी नहीं लेते रुचि

छात्रवृत्ति के लिए अपेक्षा अनुरूप आवेदन न आने की मूल वजह प्रचार प्रसार की कमी रही है। प्रत्येक वर्ष अक्तूबर नवंबर में ऑनलाइन आवेदन फार्म भराया जाता है।

जिले में 2514 परिषदीय और 600 से अधिक हैं माध्यमिक विद्यालय
गोरखपुर जिले के 2514 परिषदीय स्कूलों में तीन लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। जबकि ,इन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या 9600 से अधिक हैं। ऐसे ही यूपी बोर्ड, सीबीएसई और सीआईएससीई के कुल मिलाकर 600 स्कूल हैं। पढ़ने वाले बच्चों की संख्या दो लाख से अधिक है। पढ़ाने वाले शिक्षक दस हजार से अधिक है। इसके बावजूद सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के लिए आवेदन फार्म नहीं भरवाया जा रहा है।

पिछले चार वर्षों में गोरखपुर की स्थिति
2017- 100 से कम फार्म
2018- 218 पंजीकरण, 87 उत्तीर्ण
2019- 330 पंजीकरण, 112 उत्तीर्ण
2020- 263 पंजीकरण, 61 उत्तीर्ण

छह जिलों में प्रवेश शून्य, छह में मात्र एक पास
प्रदेश के 75 जिलों के लिए कुल स्वीकृत 15143 छात्रवृत्ति की सीटें निर्धारित हैं। इनमें उन्नाव, महोबा, शामली, रायबरेली, बलरामपुर, फर्रूखाबाद जिले से एक भी आवेदन फार्म नहीं भरवाया जा सका है। जबकि मथुरा, संभल, श्रावस्ती, अमरोह, अलीगढ़ एटा से एक भी छात्र का चयन नहीं हो सका है।

गोरखपुर जनपद में शासन की ओर से स्वीकृत 3

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आरके सिंह ने बताया कि 09 सीटों के लिए आवेदन फार्म भरवाया जाएगा। छात्रवृत्ति के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सभी प्रधानाध्यापकों और खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किया जाएगा। ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों से आवेदन फार्म भरवाया जाएगा, ताकि जरूरतमंद छात्रों की आगे की पढ़ाई का सपना साकार हो सके।

जिला विद्यालय निरीक्षक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया ने बताया कि छात्रवृत्ति परीक्षा के प्रचार प्रसार को लेकर ठोस रणनीति बनाई जाएगी। ज्यादा से ज्यादा बच्चों को आवेदन फार्म भरने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रधानाचार्यों के साथ होने वाली बैठक में इस मुद्दे को रखा जाएगा। आवश्यक दिशा-निर्देश देकर आवेदन फार्म भरवाए जाएंगे।
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