Chhath 2023: खरना के साथ शुरू हुआ 36 घंटे का छठ महापर्व, आज अस्तांचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी महिलाएं
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, सोमवार को छठ महापर्व का अंतिम दिन है। इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र, ध्रुव योग और शुभ नामक नामक औदायिक योग है। बताया कि सूर्य को परम ब्रह्म और माया षष्ठी को परा प्रकृति की संज्ञा दी जाती है। इस महापर्व पर समस्त देवगणों की अनुकंपा व्रतियों को प्राप्त होगी।
विस्तार
शनिवार को दिनभर निर्जल उपवास रखने के बाद शाम को व्रतियों ने चूल्हे को स्थापित किया। अक्षत, धूप, दीप और सिंदूर से इसकी पूजा की। प्रसाद के लिए रखे आटे से रोटी और साठी के चावल की खीर बनाई। इसे रसियाव रोटी भी कहते हैं। वहीं पर खरना अनुष्ठान किया। शनिवार को छठ घाटों पर पर्व की तैयारियां जोर-शोर से चलती रही।
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, रविवार को छठ महापर्व का तीसरा दिन है। इस दिन पंचमी तिथि सुबह आठ बजकर 15 मिनट तक, पश्चात षष्ठी तिथि है। इस दिन मूल नक्षत्र दिन में 10 बजकर 34 मिनट तक पश्चिम पूर्वाषाढ़, सुकर्मा और सिद्धि नामक औदायिक योग है। इस दिन श्रद्धालु दिनभर व्रत रखेंगी। शाम को अस्तांचलगामी सूर्य को तालाब या नदी में खड़ी होकर व्रती महिलाएं अर्घ्य देंगी। अर्घ्य, दूध और जल से दिया जाएगा। अर्घ्य देने के बाद सूपों में रखा सामान भगवान सूर्य और माता षष्ठी देवी को अर्पित किया जाएगा।
कल दिया जाएगा उगते हुए सूर्य को अर्घ्य
छठ माता की प्रतिमाएं स्थापित
महानगर में बने अस्थायी घाट
पूजन सामग्री खरीदने के लिए बाजारों में उमड़ी भीड़
अर्घ्य मुहूर्त
सोमवार: सुबह छह बजकर 39 मिनट पर सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
बोले श्रद्धालु
20 सालों से व्रत कर रही हूं। पहले पूजन सामग्रियों को खरीदने में दिक्कत होती थी, सामानों के लिए भटकना पड़ता था, लेकिन अब हर सामान आसानी से मिल जाता है। व्रत करने में भी सुविधा है।-अहिल्या शर्मा,भगत चौराहा
पांच साल से व्रत कर रही हूं। संतान की मनोकामना के लिए व्रत का संकल्प लिया था। मां ने संतान देकर गोद भर दी। मन्नत पूरी होने के बाद से छठ व्रत करना शुरू कर दिया था।-दीपा शुक्ला,कालीबाड़ी
छठ माता सभी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। आज तक जो भी माता से मांगा, वह मिला है। शादी के बाद से छठ का व्रत कर रही हूं, आगे भी सिलसिला जारी रहेगा।-बबिता मद्धेशिया,पादरी बाजार