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Gorakhpur News: गोरखपुर क्षेत्र में 29 प्रतिशत बच्चों को नहीं मिल पा रहा मां का दूध
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नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में है इस बात का जिक्र
एम्स के डॉ. रामशंकर रथ ने जागरूकता कार्यक्रम में दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। नेशनल हेल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट गोरखपुर समेत पूरी यूपी में लिए चिंताजनक है। यह रिपोर्ट बताती है कि गोरखपुर क्षेत्र में छह माह से कम उम्र के 71 प्रतिशत बच्चों को ही मां का दूध मिल पाता है। शेष 29 प्रतिशत शिुशओं को किसी न किसी कारण से जन्म के तुरंत बाद ही दूध का विकल्प देना पड़ता है। बात करें यूपी की तो महज 24 फीसदी बच्चे ही ऐसे हैं जिन्हें जन्म के पहले एक घंटे के भीतर मां का दूध मिलता है, जो किसी भी नवजात के लिए सबसे सर्वोत्तम माना गया है।
एक से सात अगस्त तक देश भर में स्तनपान जागरूकता सप्ताह के तहत विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके पीछे की बड़ी वजह यह है कि भारत जैसे देश में भी 100 प्रतिशत शिशुओं को मां का दूध नहीं मिल पा रहा। नेशनल हेल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट तो और भी चौंकाने वाली है।
एम्स के सामुदायिक और पारिवारिक चिकित्सा विभाग के डॉ. राम शंकर रथ ने बताया कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट के अनुसार गोरखपुर में प्रथम छह माह के दौरान स्तनपान की दर 71 प्रतिशत है। इसे 100 प्रतिशत कराने के लिए सभी को प्रयास करना है।
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सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि यूपी में जन्म लेने के पहले घंटे में केवल 24 प्रतिशत शिशु ही मां का दूध पी पाते हैं। इसमें से भी बस्ती में 10 प्रतिशत, संतकबीरनगर में 12.9 प्रतिशत, कुशीनगर में 14.6 प्रतिशत, महराजगंज में 11.7 प्रतिशत, देवरिया में 18.2 प्रतिशत और गोरखपुर में 38.3 प्रतिशत शिशुओं को ही यह सौभाग्य मिलता है।
यह स्थिति तब है, जबकि जन्म से पहले एक घंटे के अंदर मां का दूध पीने से शिशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वह ताउम्र कई गंभीर बीमारियों से बचा रहता है। इसी प्रकार जन्म से छह माह के अंदर भी स्तनपान करने वाले शिशुओं की संख्या पूरे प्रदेश में लगभग 60 प्रतिशत है। इसमें गोरखपुर में 71.2 प्रतिशत, देवरिया में 54.8, बस्ती में 72.1, कुशीनगर में 63.2, महराजगंज में 62.1, संतकबीरनगर में 61.7 और सिद्धार्थनगर में 70.4 प्रतिशत शिशु शामिल हैं।
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शत प्रतिशत शिशुओं को दूध पिलाने के लिए किया जागरूक
गोरखपुर। एम्स के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग की तरफ से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डुमरी खास, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुर और शहरी स्वास्थ्य केंद्र झरना टोला में स्तनपान जागरूकता से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पाल ने कहा कि मां का दूध शिशुओं के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी होता है। सामुदायिक चिकित्सा और पारिवारिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. हरी शंकर जोशी और डॉ. आनंद मोहन दीक्षित ने छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध पिलाने की सलाह दी।
डॉ. प्रदीप खरया ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान ही महिला को सावधानी रखते हुए अपने आहार पर ध्यान देना होगा। डॉ. अनिल कोपरकर और सीनियर रेजिडेंट डॉ. श्रीदेवी ने भी महिलाओं को जागरूक किया। जूनियर रेजिडेंट डॉ. फैसल ने दुग्धपान नहीं कराने से मां व बच्चे के सेहत पर पड़ने वाले कुप्रभावों की जानकारी दी।
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एम्स के डॉ. रामशंकर रथ ने जागरूकता कार्यक्रम में दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। नेशनल हेल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट गोरखपुर समेत पूरी यूपी में लिए चिंताजनक है। यह रिपोर्ट बताती है कि गोरखपुर क्षेत्र में छह माह से कम उम्र के 71 प्रतिशत बच्चों को ही मां का दूध मिल पाता है। शेष 29 प्रतिशत शिुशओं को किसी न किसी कारण से जन्म के तुरंत बाद ही दूध का विकल्प देना पड़ता है। बात करें यूपी की तो महज 24 फीसदी बच्चे ही ऐसे हैं जिन्हें जन्म के पहले एक घंटे के भीतर मां का दूध मिलता है, जो किसी भी नवजात के लिए सबसे सर्वोत्तम माना गया है।
एक से सात अगस्त तक देश भर में स्तनपान जागरूकता सप्ताह के तहत विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके पीछे की बड़ी वजह यह है कि भारत जैसे देश में भी 100 प्रतिशत शिशुओं को मां का दूध नहीं मिल पा रहा। नेशनल हेल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट तो और भी चौंकाने वाली है।
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एम्स के सामुदायिक और पारिवारिक चिकित्सा विभाग के डॉ. राम शंकर रथ ने बताया कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट के अनुसार गोरखपुर में प्रथम छह माह के दौरान स्तनपान की दर 71 प्रतिशत है। इसे 100 प्रतिशत कराने के लिए सभी को प्रयास करना है।
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सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि यूपी में जन्म लेने के पहले घंटे में केवल 24 प्रतिशत शिशु ही मां का दूध पी पाते हैं। इसमें से भी बस्ती में 10 प्रतिशत, संतकबीरनगर में 12.9 प्रतिशत, कुशीनगर में 14.6 प्रतिशत, महराजगंज में 11.7 प्रतिशत, देवरिया में 18.2 प्रतिशत और गोरखपुर में 38.3 प्रतिशत शिशुओं को ही यह सौभाग्य मिलता है।
यह स्थिति तब है, जबकि जन्म से पहले एक घंटे के अंदर मां का दूध पीने से शिशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वह ताउम्र कई गंभीर बीमारियों से बचा रहता है। इसी प्रकार जन्म से छह माह के अंदर भी स्तनपान करने वाले शिशुओं की संख्या पूरे प्रदेश में लगभग 60 प्रतिशत है। इसमें गोरखपुर में 71.2 प्रतिशत, देवरिया में 54.8, बस्ती में 72.1, कुशीनगर में 63.2, महराजगंज में 62.1, संतकबीरनगर में 61.7 और सिद्धार्थनगर में 70.4 प्रतिशत शिशु शामिल हैं।
शत प्रतिशत शिशुओं को दूध पिलाने के लिए किया जागरूक
गोरखपुर। एम्स के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग की तरफ से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डुमरी खास, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुर और शहरी स्वास्थ्य केंद्र झरना टोला में स्तनपान जागरूकता से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पाल ने कहा कि मां का दूध शिशुओं के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी होता है। सामुदायिक चिकित्सा और पारिवारिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. हरी शंकर जोशी और डॉ. आनंद मोहन दीक्षित ने छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध पिलाने की सलाह दी।
डॉ. प्रदीप खरया ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान ही महिला को सावधानी रखते हुए अपने आहार पर ध्यान देना होगा। डॉ. अनिल कोपरकर और सीनियर रेजिडेंट डॉ. श्रीदेवी ने भी महिलाओं को जागरूक किया। जूनियर रेजिडेंट डॉ. फैसल ने दुग्धपान नहीं कराने से मां व बच्चे के सेहत पर पड़ने वाले कुप्रभावों की जानकारी दी।