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सीबीएसई: कोचिंग के सहारे रहने वाले विद्यार्थियों का बिगड़ा रिजल्ट, स्कूल में नियमित पढ़ाई का मिला फायदा

Mon, 02 Aug 2021 09:01 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 02 Aug 2021 09:01 AM IST
सार

मॉडरेशन पॉलिसी के अंतर्गत तीन साल के रिजल्ट को बनाना था प्रमोशन का आधार। मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में शामिल होने लायक भी नहीं बचे बच्चे।

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12th result released by CBSE result of non schooling children worse than children studying in regular school
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कोचिंग इंस्टीट्यूट से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी और स्कूल गए बिना केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की बारहवीं की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों का रिजल्ट बिगड़ गया है। इससे नाराज विद्यार्थियों और अभिभावकों ने कई कोचिंग इंस्टीट्यूट पर हंगामा किया है। 
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जानकारी के मुताबिक प्रतीयोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के बारहवीं कक्षा के नतीजे खराब आए हैं। इसकी मुख्य वजह उनका स्कूल नहीं जाना है। सभी कोचिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ते हैं और सिर्फ परीक्षा देने विद्यालय जाते हैं। लिहाजा ज्यादातर विद्यार्थियों को पासिंग मार्क्स मिले हैं। इससे उनकी मेडिकल या इंजीनियरिंग की परीक्षा की राह कठिन हो गई है। साथ ही अच्छी यूनिवर्सिटी के स्नातक पाठ्यक्रम में दाखिला मिलना भी मुश्किल हो गया है। 

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ऐसे होता है दाखिला 
ज्यादातर कोचिंग इंस्टीट्यूट का निजी स्कूलों में संपर्क रहता है। वह दसवीं पास करने वाले विद्यार्थियों का दाखिला ग्यारहवीं कक्षा में कराते हैं, लेकिन स्कूल नहीं भेजते हैं। कोचिंग इंस्टीट्यूट से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराते हैं। विद्यार्थी स्कूल नहीं जाता है, फिर भी कक्षा की उपस्थिति पूरी रहती है। विद्यार्थी से सालाना परीक्षा दिलवाई जाती है। प्रोजेक्ट वर्क नहीं कराया जाता है। 

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दाखिले में आएगी दिक्कत

एमबीबीएस या बीटेक की पढ़ाई के लिए बारहवीं में अच्छे अंक का होना जरूरी है। आईआईटी में दाखिले के लिए 75 फीसदी मार्क्स की अनिवार्यता है। जिन विद्यार्थियों को बारहवीं कक्षा में 62 फीसदी अंक मिले हैं, उन सबकी दिक्कत बढ़नी तय है। मेडिकल कॉलेजों में भी दाखिले के लिए बारहवीं में अच्छे अंक का होना जरूरी है। दिल्ली सहित तमाम विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जहां मेरिट से स्नातक की सीटें भरी जाती हैं। इस दौड़ में भी ऐसे विद्यार्थियों के पिछड़ने की आशंका है। 

ये बचा है विकल्प
बोर्ड परीक्षा में जिन विद्यार्थियों के परिणाम खराब हो गए हैं, उनके पास दोबारा परीक्षा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। पहले ऐसे विद्यार्थियों का एनआईओएस के तहत दाखिला कराकर परीक्षाएं दिलवाई जाती थीं। निजी स्कूलों में केंद्र बनते थे। किसी तरह से अच्छे अंक दिलवा दिए जाते थे। अब शासन ने एनआईओएस की परीक्षाओं के लिए केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय और राजकीय विद्यालयों को केंद्र बनाने का फैसला किया है। इससे मदद की गुंजाइश खत्म हो गई है। 

इस आधार पर घोषित हुए परिणाम
मॉडरेशन पॉलिसी के तहत तीन साल के रिजल्ट को कक्षा में प्रमोशन का आधार बनाया गया है। इसका मतलब है कि एक स्कूल में तीन साल तक पढ़ने और अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को फायदा मिला है। इस बार परीक्षाएं नहीं कराई गई थीं। आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर रिजल्ट घोषित किए गए हैं। जिन विद्यार्थियों ने कोचिंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लेकर बारहवीं कक्षा में पढ़ाई की औपचारिकता पूरी की है, उन्हें मॉडरेशन पॉलिसी का फायदा नहीं मिला है। 

स्कूल से नियमित पढ़ाई का फायदा मिला 

स्कूलों से दसवीं व बारहवीं की नियमित पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम अच्छे आए हैं। ज्यादातर विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं। 90 फीसदी से ज्यादा अंक पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। इससे स्कूल संचालक गदगद हैं। उनका कहना है कि अब स्कूलिंग का महत्व बढ़ेगा। विद्यार्थी नियमित रूप से स्कूल आएंगे, फिर परीक्षा देकर पास होंगे। 

जिला विद्यालय निरीक्षक ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि कक्षाओं में 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है। इस संबंध में शासनादेश भी है। इसका अनुपालन शख्ती से कराया जाएगा। बिना स्कूल आए परीक्षा दिलवाने व सर्टिफिकेट बांटने वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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