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Gorakhpur News: स्वास्थ्य विभाग ने डिजिटल हियरिंग मशीन कराई उपलब्ध, अब फिर सुन सकेगी बिटिया
Mon, 28 Nov 2022 01:28 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 28 Nov 2022 01:28 PM IST
सार
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि जिले के सभी 19 ब्लॉकों में आरबीएसके की 38 टीमें प्रतिदिन दौरा कर रही हैं। किसी का पाल्य जन्मजात गूंगेपन और बहरेपन की समस्या से ग्रसित है तो टीम से संपर्क करे, सभी को निशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
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(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जन्मजात न बोलने और सुनने की बीमारी से पीड़ित 12 वर्षीय बिटिया राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के प्रयासों से फिर से सुन सकेगी। इसके लिए उसे डिजिटल हियरिंग मशीन निशुल्क दी गई है।
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पुरानी मशीन खराब हो चुकी थी और पिता के पास इतने रुपये नहीं थे कि वे 46,000 रुपये की मशीन फिर से खरीद सकें। उन्होंने डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से मिल कर मदद की गुहार लगाई थी, जिस पर स्वास्थ्य विभाग ने मशीन की व्यवस्था कराई है।
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भटहट ब्लॉक के रहने वाले राजेश गुप्ता (38) एक वाहन एजेंसी में कर्मचारी हैं। बताया कि उनकी बेटी के जन्मजात विकार का पता तब चला, जब वह एक साल की हो गई। बोलने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देती थी। डॉक्टरों को दिखाया, हर जगह से सिर्फ लाखों रुपये के कॉक्लियर इंप्लांट की सलाह मिली, जो संभव नहीं था।
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बच्ची पांच साल की हो गई तो उसको अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली में दिखाया। वहां से सलाह मिली कि बच्ची की स्पीच थेरेपी कराएं और उसे डिजिटल हियरिंग मशीन दिलवा दें। बताया कि किसी तरह 46,000 रुपये की मशीन खरीद कर बच्ची को दी, लेकिन वह मशीन डुप्लीकेट थी, जिसकी वजह से थोड़े समय में ही खराब हो गई। इस बीच किसी तरह रुपये खर्च कर बच्ची को स्पीच थेरेपी भी दिलवाई। इससे बच्ची की स्थिति में काफी सुधार हुआ है।
15 बच्चों को और दी जानी है मशीन
सीएमओ ने बताया कि पांच वर्ष तक के बच्चों के निशुल्क कॉक्लियर इंप्लांट की सुविधा उपलब्ध है। चूंकि बच्ची इस श्रेणी में नहीं आती है, इसलिए डिजिटल हियरिंग मशीन का इंतजाम कराया गया है। यह मशीन उन्होंने सीआरसी से व्यवस्था कर उपलब्ध कराई है। जिले में 15 ऐसे बच्चे चिह्नित हैं, जिन्हें यह मशीन दी जाएगी।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि जिले के सभी 19 ब्लॉकों में आरबीएसके की 38 टीमें प्रतिदिन दौरा कर रही हैं। किसी का पाल्य जन्मजात गूंगेपन और बहरेपन की समस्या से ग्रसित है तो टीम से संपर्क करे, सभी को निशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।