गोरखपुर: 12 हजार से ज्यादा मतदाताओं ने दबाया नोटा का बटन, फिर भी नहीं रोक पाए विजेता की राह
चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल से पहले जब बैलेट पेपर का उपयोग होता था, तब भी मतदाताओं के पास बैलेट पेपर को खाली छोड़कर अपना विरोध दर्ज कराने का अधिकार होता था।
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गोरखपुर जिले के नौ विधानसभा क्षेत्रों में 12 हजार 109 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। मतदान के दौरान उम्मीदवार पसंद नहीं आने पर मतदाताओं ने नन ऑफ द एबव (नोटा) का बटन दबाकर विरोध तो जरूर दर्ज कराया, लेकिन किसी की भी जीत की राह नहीं रोक पाए। जिले में नोटा का बटन दबाकर मतदाताओं ने प्रत्याशियों को आईना दिखाने की कोशिश की है। हालांकि, कई निर्दल प्रत्याशियों को नोटा से कम वोट मिले हैं।
सबसे अधिक चिल्लूपार विधानसभा में 1,951 और सबसे कम गोरखपुर सदर विधानसभा में 1,194 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। कई निर्दली प्रत्याशियों को तो नोटा से भी कम मत मिले हैं। गोरखपुर ग्रामीण में 1,041, बांसगांव में 1,460, कैंपियरगंज में 965, खजनी में 1,381, पिपराइच में 1,313, चौरीचौरा में 1,214, सहजनवां में 1,590 मतदाताआें ने नोटा का बटन दबाया।
पहले भी था विरोध दर्ज कराने का अधिकार
चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल से पहले जब बैलेट पेपर का उपयोग होता था, तब भी मतदाताओं के पास बैलेट पेपर को खाली छोड़कर अपना विरोध दर्ज कराने का अधिकार होता था। इसका मतलब यह था कि मतदाताओं को चुनाव लड़ने वाला कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है।
गुलाबी रंग का होता है नोटा का बटन
नोटा का मतलब इनमें से कोई नहीं है। संदेश है कि आपको चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में से कोई भी पसंद नहीं है। ईवीएम में नोटा का बटन गुलाबी रंग का होता है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने दिसंबर 2013 के विधानसभा चुनावों से नोटा का विकल्प दिया था। वोटों की गिनती के समय नोटा के वोट भी गिने जाते हैं।