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Gorakhpur News: बिजली निगम के 10 हजार उपभोक्ता लापता...खोजने में हांफ रहे कर्मचारी-अफसर
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- शहरी क्षेत्र के इन उपभोक्ताओं पर 85 करोड़ रुपये का बकाया
- सभी चारों बिजली खंडों के इन बकाएदारों की तलाश कर पते पर नोटिस भेजने की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। शहर के 10 हजार बिजली के उपभोक्ता लापता हैं। इन पर बिजली निगम का करीब 85 करोड़ रुपये बकाया है। इन उपभोक्ताओं के नाम से बिल भी बन रहा है। इनकी तलाश में विभाग के अधिकारी-कर्मचारी पिछले सात-आठ वर्षों से लगे हुए हैं, लेकिन नाकामी ही हाथ लगी है। पता चला है कि ज्यादातर का नाम-पता भी गलत है।
बिजली निगम के आंकड़ों के मुताबिक, बकाएदारों से वसूली करने के लिए इन उपभोक्ताओं के पते पर नोटिस भी भेजा जा चुका है। लेकिन, इनकी ओर से बिल जमा नहीं किया गया। जब भी बकाए को लेकर शासन से सख्ती बरती जाती है तो अधिकारी इन उपभोक्ताओं को खोजने में जुट जाते हैं और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
अधीक्षण अभियंता, शहरी लोकेंद्र बहादुर सिंह ने एक बार फिर से इन बकाएदारों की तलाश शुरू करवाई है। जिनके नाम पर कनेक्शन है, वह जिंदा भी हैं या नहीं अब इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।
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0- तो आखिर जिम्मेदार कौन?
बिजली निगम के बकाएदार उपभोक्ताओं की तलाश करने वाली टीम को निराशा हाथ लग रही है। जबकि, कनेक्शन लेते वक्त आवेदन करने वाले उपभोक्ता से मतदाता पहचान पत्र के साथ अन्य प्रमाण पत्र भी लिए जाते हैं। अवर अभियंता मौके पर जाकर तस्दीक भी करते हैं। मुआयना करने के बाद अवर अभियंता की रिपोर्ट के बाद इन्हें कनेक्शन स्वीकृत किया जाता है। इन सब के बाद भी निगम के रिकाॅर्ड में इनके पते सही नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में अभियंताओं की लापरवाही या मिलीभगत से ही ये उपभोक्ता निगम काे राजस्व की क्षति पहुंचा रहे हैं।
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कोट
इन उपभोक्ताओं की तलाश की जाएगी। ये सभी कनेक्शन आठ से 10 वर्ष पुराने हैं। ये कनेक्शन कैसे जारी किए गए, इसके लिए भी शीर्ष अधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा। उपभोक्ताओं के दिए पते के आधार पर ही उन्हें नोटिस देकर खोजा जाएगा।
- लोकेंद्र बहादुर सिंह, अधीक्षण अभियंता
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- सभी चारों बिजली खंडों के इन बकाएदारों की तलाश कर पते पर नोटिस भेजने की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। शहर के 10 हजार बिजली के उपभोक्ता लापता हैं। इन पर बिजली निगम का करीब 85 करोड़ रुपये बकाया है। इन उपभोक्ताओं के नाम से बिल भी बन रहा है। इनकी तलाश में विभाग के अधिकारी-कर्मचारी पिछले सात-आठ वर्षों से लगे हुए हैं, लेकिन नाकामी ही हाथ लगी है। पता चला है कि ज्यादातर का नाम-पता भी गलत है।
बिजली निगम के आंकड़ों के मुताबिक, बकाएदारों से वसूली करने के लिए इन उपभोक्ताओं के पते पर नोटिस भी भेजा जा चुका है। लेकिन, इनकी ओर से बिल जमा नहीं किया गया। जब भी बकाए को लेकर शासन से सख्ती बरती जाती है तो अधिकारी इन उपभोक्ताओं को खोजने में जुट जाते हैं और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
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अधीक्षण अभियंता, शहरी लोकेंद्र बहादुर सिंह ने एक बार फिर से इन बकाएदारों की तलाश शुरू करवाई है। जिनके नाम पर कनेक्शन है, वह जिंदा भी हैं या नहीं अब इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।
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0- तो आखिर जिम्मेदार कौन?
बिजली निगम के बकाएदार उपभोक्ताओं की तलाश करने वाली टीम को निराशा हाथ लग रही है। जबकि, कनेक्शन लेते वक्त आवेदन करने वाले उपभोक्ता से मतदाता पहचान पत्र के साथ अन्य प्रमाण पत्र भी लिए जाते हैं। अवर अभियंता मौके पर जाकर तस्दीक भी करते हैं। मुआयना करने के बाद अवर अभियंता की रिपोर्ट के बाद इन्हें कनेक्शन स्वीकृत किया जाता है। इन सब के बाद भी निगम के रिकाॅर्ड में इनके पते सही नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में अभियंताओं की लापरवाही या मिलीभगत से ही ये उपभोक्ता निगम काे राजस्व की क्षति पहुंचा रहे हैं।
कोट
इन उपभोक्ताओं की तलाश की जाएगी। ये सभी कनेक्शन आठ से 10 वर्ष पुराने हैं। ये कनेक्शन कैसे जारी किए गए, इसके लिए भी शीर्ष अधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा। उपभोक्ताओं के दिए पते के आधार पर ही उन्हें नोटिस देकर खोजा जाएगा।
- लोकेंद्र बहादुर सिंह, अधीक्षण अभियंता