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यश चोपड़ा: बर्फीली वादियां, शिफॉन की साड़ियां और मोहब्बत; निर्देशक ने कैसे बदली बॉलीवुड में रोमांस की तस्वीर?
Sun, 27 Sep 2026 06:08 AM IST
राजश्री वर्मा
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: राजश्री वर्मा
Updated Sun, 27 Sep 2026 06:08 AM IST
सार
Yash Chopra Birth Anniversary: हिंदी सिनेमा के दिग्गज और मशहूर फिल्मकार रहे यश चोपड़ा की आज 94वीं जयंती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कैसे उन्होंने बॉलीवुड में प्यार और रोमांस की परिभाषा को ही बदल दिया।
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यश चोपड़ा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कुछ प्रेम कहानियां पूरी होकर याद रहती हैं और कुछ अधूरी रहकर। कुछ रिश्ते शादी तक पहुंचते हैं तो कुछ उम्र भर दिल में कहीं दबे रहते हैं। यश चोपड़ा ने हिंदी सिनेमा में प्रेम को कुछ इसी तरह दिखाया था। उनके लिए मोहब्बत सिर्फ नायक-नायिका का मिलना नहीं थी, बल्कि वह एक ऐसी भावना थी, जिसमें चाहत के साथ दर्द, दूरी, जिम्मेदारी और त्याग भी शामिल था।
शायद यही वजह है कि उनकी फिल्मों का रोमांस आज भी बाकी फिल्मों से अलग महसूस होता है। 27 सितंबर, 1932 को लाहौर में जन्मे यश चोपड़ा के माता-पिता उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे, लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। वह भी अपने पिता और भाई बीआर चोपड़ा की तरह इंडस्ट्री में ही आ गए।
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शायद यही वजह है कि उनकी फिल्मों का रोमांस आज भी बाकी फिल्मों से अलग महसूस होता है। 27 सितंबर, 1932 को लाहौर में जन्मे यश चोपड़ा के माता-पिता उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे, लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। वह भी अपने पिता और भाई बीआर चोपड़ा की तरह इंडस्ट्री में ही आ गए।
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यश चोपड़ा
- फोटो : सोशल मीडिया
इस फिल्म से की करियर की शुरुआत
यश चोपड़ा ने फिल्मों को डायरेक्ट करने से पहले अपने भाई बीआर चोपड़ा के साथ कई वर्षों तक सहायक निर्देशक के तौर पर काम किया। इसके बाद उन्होंने 1959 में 'धूल का फूल' से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद 'वक्त', 'दीवार', 'कभी कभी', 'सिलसिला', 'चांदनी', 'लम्हे', 'डर', 'दिल तो पागल है' और 'वीर-जारा' जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली फिल्मकारों में शामिल कर दिया।
यश चोपड़ा ने फिल्मों को डायरेक्ट करने से पहले अपने भाई बीआर चोपड़ा के साथ कई वर्षों तक सहायक निर्देशक के तौर पर काम किया। इसके बाद उन्होंने 1959 में 'धूल का फूल' से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद 'वक्त', 'दीवार', 'कभी कभी', 'सिलसिला', 'चांदनी', 'लम्हे', 'डर', 'दिल तो पागल है' और 'वीर-जारा' जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली फिल्मकारों में शामिल कर दिया।
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यश चोपड़ा की यादगार रोमांटिक फिल्में
कभी-कभी: यश चोपड़ा की रोमांटिक फिल्मों की बात हो, तो सबसे पहले 'कभी कभी' का नाम आता है। 1976 की इस फिल्म में प्रेम सिर्फ जवानी की कहानी नहीं था। अमित और पूजा का अधूरा प्यार, फिर जिंदगी में आगे बढ़ जाना और वर्षों बाद उसी एहसास का लौटना। यश चोपड़ा ने दिखाया कि इंसान जिंदगी में आगे बढ़ जाए, फिर भी कुछ भावनाएं उसके अंदर जिंदा रह सकती हैं। फिल्म में अमिताभ, राखी, शशि कपूर, ऋषि कपूर और नीतू कपूर ने अहम किरदार निभाए।
सिलसिला: इसके बाद 1981 में 'सिलसिला' आई। शादी के बाद एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर जैसे विषय को मुख्यधारा के सिनेमा में इतनी संवेदनशीलता से दिखाना उस दौर में आसान नहीं था। खुद यश चोपड़ा ने बाद में 'सिलसिला' को अपनी उन फिल्मों में गिना, जिन्हें रिलीज के समय स्वीकार नहीं किया गया, लेकिन बाद में सफलता हासिल की थी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, रेखा, जया बच्चन, शशि कपूर और संजीव कुमार ने अहम रोल प्ले किया।
कभी-कभी: यश चोपड़ा की रोमांटिक फिल्मों की बात हो, तो सबसे पहले 'कभी कभी' का नाम आता है। 1976 की इस फिल्म में प्रेम सिर्फ जवानी की कहानी नहीं था। अमित और पूजा का अधूरा प्यार, फिर जिंदगी में आगे बढ़ जाना और वर्षों बाद उसी एहसास का लौटना। यश चोपड़ा ने दिखाया कि इंसान जिंदगी में आगे बढ़ जाए, फिर भी कुछ भावनाएं उसके अंदर जिंदा रह सकती हैं। फिल्म में अमिताभ, राखी, शशि कपूर, ऋषि कपूर और नीतू कपूर ने अहम किरदार निभाए।
सिलसिला: इसके बाद 1981 में 'सिलसिला' आई। शादी के बाद एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर जैसे विषय को मुख्यधारा के सिनेमा में इतनी संवेदनशीलता से दिखाना उस दौर में आसान नहीं था। खुद यश चोपड़ा ने बाद में 'सिलसिला' को अपनी उन फिल्मों में गिना, जिन्हें रिलीज के समय स्वीकार नहीं किया गया, लेकिन बाद में सफलता हासिल की थी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, रेखा, जया बच्चन, शशि कपूर और संजीव कुमार ने अहम रोल प्ले किया।
चांदनी
- फोटो : सोशल मीडिया
चांदनी: फिर 1989 में 'चांदनी' आई। श्रीदेवी का सफेद कपड़ों में नजर आना, बारिश, पहाड़ और संगीत... इन सबने मिलकर हिंदी फिल्मों के रोमांस की एक नई परिभाषा को तैयार कर दिया। यश चोपड़ा के सिनेमा में सिर्फ नेचुरल लोकेशन नहीं रहती थी, वह कहानी का हिस्सा बन जाती थी। इस फिल्म में श्रीदेवी के अलावा ऋषि कपूर, विनोद खन्ना और वहीदा रहमान ने भी अहम किरदार निभाए।
लम्हे
- फोटो : एक्स
लम्हे: 1991 में आई 'लम्हे' में उन्होंने उम्र और प्रेम से जुड़े सामाजिक सवालों को छुआ। यह ऐसी फिल्म थी, जिसे यश चोपड़ा खुद बेहद पसंद करते थे, बावजूद इसके कि रिलीज के समय इसे वह व्यावसायिक सफलता नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी। उनके लिए 'लम्हे' और 'सिलसिला' वे फिल्में थीं जिनसे उन्हें खास लगाव था।
डर फिल्म
- फोटो : सोशल मीडिया
डर: 1993 की 'डर' में उन्होंने प्रेम का एक बिल्कुल अलग चेहरा दिखाया। यहां प्रेम जुनून और डर के बीच खड़ा था। इसी फिल्म ने शाहरुख खान को एक अलग तरह की पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई।
दिल तो पागल है
- फोटो : इंस्टाग्राम @yrf
दिल तो पागल है: 1997 में 'दिल तो पागल है' आई। जहां शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर की कहानी के जरिए यश चोपड़ा ने प्रेम, दोस्ती और सोलमेट की धारणा को बड़े पर्दे पर पेश किया।
वीर जारा
- फोटो : सोशल मीडिया
वीर-जारा: 2004 में 'वीर-जारा' के साथ उन्होंने उम्र के आखिरी पड़ाव में भी प्रेम की अपनी भाषा नहीं बदली। यह प्रेम दो देशों की सीमाओं के बीच फंसा था, लेकिन कहानी का केंद्र वही था इंतजार और समर्पण। फिल्म में प्रेम का मतलब साथ रहना नहीं, बल्कि किसी के लिए पूरी जिंदगी इंतजार करना बन गया।
यश चोपड़ा और उनकी पत्नी
- फोटो : सोशल मीडिया
असल जिंदगी में कैसी थी यश चोपड़ा की प्रेम कहानी?
पर्दे पर प्रेम के इतने अलग-अलग रूप दिखाने वाले यश चोपड़ा की अपनी शादी भी किसी फिल्मी कहानी से कम दिलचस्प नहीं थी। उन्होंने 1970 में पामेला से शादी की। पामेला बाद में पामेला चोपड़ा के नाम से मशहूर हुईं और सिर्फ उनकी पत्नी ही नहीं, बल्कि गायिका, लेखिका और संगीत से जुड़ी उनकी महत्वपूर्ण सहयोगी भी रहीं। दोनों के दो बेटे हुए- आदित्य चोपड़ा और उदय चोपड़ा।
पामेला ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने यश को पहली बार दिल्ली में एक क्रिकेट कार्यक्रम के दौरान देखा था। यश उनसे कुछ पंक्तियां आगे बैठे थे और बार-बार पीछे मुड़कर देख रहे थे। लेकिन इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा इसके बाद आता है। खुद यश चोपड़ा ने बताया था कि एक बार दिल्ली से उनकी फ्लाइट छूट गई। उन्हें अभिनेता रमेश शर्मा के घर रुकना पड़ा। वहीं, उनकी मुलाकात फिर पामेला से हुई। इसके बाद एक महीने में सगाई हुई और दो महीने बाद शादी।
पर्दे पर प्रेम के इतने अलग-अलग रूप दिखाने वाले यश चोपड़ा की अपनी शादी भी किसी फिल्मी कहानी से कम दिलचस्प नहीं थी। उन्होंने 1970 में पामेला से शादी की। पामेला बाद में पामेला चोपड़ा के नाम से मशहूर हुईं और सिर्फ उनकी पत्नी ही नहीं, बल्कि गायिका, लेखिका और संगीत से जुड़ी उनकी महत्वपूर्ण सहयोगी भी रहीं। दोनों के दो बेटे हुए- आदित्य चोपड़ा और उदय चोपड़ा।
पामेला ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने यश को पहली बार दिल्ली में एक क्रिकेट कार्यक्रम के दौरान देखा था। यश उनसे कुछ पंक्तियां आगे बैठे थे और बार-बार पीछे मुड़कर देख रहे थे। लेकिन इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा इसके बाद आता है। खुद यश चोपड़ा ने बताया था कि एक बार दिल्ली से उनकी फ्लाइट छूट गई। उन्हें अभिनेता रमेश शर्मा के घर रुकना पड़ा। वहीं, उनकी मुलाकात फिर पामेला से हुई। इसके बाद एक महीने में सगाई हुई और दो महीने बाद शादी।
स्विट्जरलैंड
- फोटो : instagram
स्विट्जरलैंड को बना दिया रोमांस का हिस्सा
आज बॉलीवुड की किसी रोमांटिक फिल्म में बर्फीली पहाड़ियों और उड़ती हुई शिफॉन साड़ी का सीन देखने को मिले, तो यह यश चोपड़ा की फिल्मों की याद दिला देता है। डायरेक्टर ने स्विट्जरलैंड को अपनी फिल्मों में इतनी बार दिखाया कि वहां की एक झील को 'चोपड़ा लेक' तक कहा जाने लगा। स्विस सरकार ने भी भारतीय सिनेमा और यश चोपड़ा के वहां के पर्यटन पर प्रभाव को सम्मानित किया था।
आज बॉलीवुड की किसी रोमांटिक फिल्म में बर्फीली पहाड़ियों और उड़ती हुई शिफॉन साड़ी का सीन देखने को मिले, तो यह यश चोपड़ा की फिल्मों की याद दिला देता है। डायरेक्टर ने स्विट्जरलैंड को अपनी फिल्मों में इतनी बार दिखाया कि वहां की एक झील को 'चोपड़ा लेक' तक कहा जाने लगा। स्विस सरकार ने भी भारतीय सिनेमा और यश चोपड़ा के वहां के पर्यटन पर प्रभाव को सम्मानित किया था।
कई स्टार्स को बनाया सुपरस्टार
यश चोपड़ा ने अपनी फिल्मों के जरिए कई सितारों को स्टारडम का दिलाया। साल 1975 में आई फिल्म 'दीवार' से उन्होंने अमिताभ बच्चन की 'एंग्री यंग मैन' की छवि बनाई। इसके बाद उन्होंने अमिताभ के साथ 'कभी-कभी, 'त्रिशूल', 'काला पत्थर', 'सिलसिला' में भी काम किया, जो यश चोपड़ा की बेहतरीन फिल्में हैं। वहीं, बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान के साथ बतौर निर्देशक यश चोपड़ा ने 'डर', 'दिल तो पागल है', 'वीर जारा', 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाई। शाहरुख के साथ यश चोपड़ा की आखिरी फिल्म 'जब तक है जान' थी।
यश चोपड़ा ने अपनी फिल्मों के जरिए कई सितारों को स्टारडम का दिलाया। साल 1975 में आई फिल्म 'दीवार' से उन्होंने अमिताभ बच्चन की 'एंग्री यंग मैन' की छवि बनाई। इसके बाद उन्होंने अमिताभ के साथ 'कभी-कभी, 'त्रिशूल', 'काला पत्थर', 'सिलसिला' में भी काम किया, जो यश चोपड़ा की बेहतरीन फिल्में हैं। वहीं, बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान के साथ बतौर निर्देशक यश चोपड़ा ने 'डर', 'दिल तो पागल है', 'वीर जारा', 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाई। शाहरुख के साथ यश चोपड़ा की आखिरी फिल्म 'जब तक है जान' थी।